सीखें: वैदिक ज्योतिष, सरल भाषा में
हर पन्ना शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान करके लिखा गया है, और हर बात के साथ उसका आधार लिखा है।
यह वैदिक ज्योतिष की लाइब्रेरी है, सरल भाषा में: 27 नक्षत्र, 12 राशियाँ, 9 ग्रह, 12 भाव, 16 वर्ग कुंडलियाँ, दशा, योग, दोष, पंचांग, संस्कार, त्योहार और उपाय। हर पन्ने पर उसके आधार ग्रंथ लिखे हैं, और कुंडली सहेजी हो तो आपकी अपनी स्थिति उसी पन्ने पर दिखती है।
349 पन्ने
छूकर समझिए
नक्षत्र · 27 पन्ने
नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
अश्विनी 27 नक्षत्रों में पहला है और पूरी तरह मेष राशि में आता है। इसके स्वामी केतु और देवता अश्विनी कुमार हैं; परंपरा इसे नई शुरुआत, फुर्ती...
नक्षत्र
भरणी नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
भरणी 27 नक्षत्रों में दूसरा है और पूरी तरह मेष राशि में आता है। इसके स्वामी शुक्र और देवता धर्मराज (यम) हैं; परंपरा इसे ज़िम्मेदारी उठाने, ग...
नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
कृत्तिका 27 नक्षत्रों में तीसरा है; इसका पहला चरण मेष में और बाकी तीन वृषभ में आते हैं। इसके स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं; परंपरा इसे स्प...
नक्षत्र
रोहिणी नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
रोहिणी 27 नक्षत्रों में चौथा है और पूरी तरह वृषभ राशि में आता है। इसके स्वामी चंद्र और देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं; परंपरा इसे बढ़त, सुंदरत...
नक्षत्र
मृगशिरा नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
मृगशिरा 27 नक्षत्रों में पाँचवाँ है; इसके पहले दो चरण वृषभ में और बाकी दो मिथुन में आते हैं। इसके स्वामी मंगल और देवता चंद्रमा (सोम) हैं; पर...
नक्षत्र
आर्द्रा नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
आर्द्रा 27 नक्षत्रों में छठा है और पूरी तरह मिथुन राशि में आता है। इसके स्वामी राहु और देवता रुद्र हैं; परंपरा इसे गहरी सोच, सवाल करने और बद...
नक्षत्र
पुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में सातवाँ है; इसके पहले तीन चरण मिथुन में और चौथा चरण कर्क में आता है। इसके स्वामी गुरु (बृहस्पति) और देवता अदिति हैं...
नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ है और पूरी तरह कर्क राशि में आता है। इसके स्वामी शनि और देवता गुरु हैं; परंपरा इसे पोषण, देखभाल, अनुशासन और...
नक्षत्र
आश्लेषा नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
आश्लेषा 27 नक्षत्रों में नौवाँ है और पूरी तरह कर्क राशि में आता है। इसके स्वामी बुध और देवता सर्प (नाग) हैं; परंपरा इसे गहरी समझ, सूझबूझ और...
नक्षत्र
मघा नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
मघा 27 नक्षत्रों में दसवाँ है और पूरी तरह सिंह राशि में आता है। इसके स्वामी केतु और देवता पितर (पूर्वज) हैं; परंपरा इसे परिवार, अपनी जड़ों क...
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
पूर्वा फाल्गुनी 27 नक्षत्रों में ग्यारहवाँ है और पूरी तरह सिंह राशि में आता है। इसके स्वामी शुक्र और देवता भग हैं; परंपरा इसे आनंद, मेल-जोल,...
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
उत्तरा फाल्गुनी 27 नक्षत्रों में बारहवाँ है; इसका पहला चरण सिंह में और बाकी तीन कन्या में आते हैं। इसके स्वामी सूर्य और देवता अर्यमा हैं; पर...
नक्षत्र
हस्त नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
हस्त 27 नक्षत्रों में तेरहवाँ है और पूरी तरह कन्या राशि में आता है। इसके स्वामी चंद्र और देवता सूर्य (सविता) हैं; परंपरा इसे हाथ के हुनर, सू...
नक्षत्र
चित्रा नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर
चित्रा 27 नक्षत्रों में चौदहवाँ है; इसके पहले दो चरण कन्या में और बाकी दो तुला में आते हैं। इसके स्वामी मंगल और देवता त्वष्टा (विश्वकर्मा) ह...
नक्षत्र
स्वाती नक्षत्र: देवता, स्वभाव और नामाक्षर
स्वाती 27 नक्षत्रों में पंद्रहवाँ है, पूरा तुला राशि में। इसके स्वामी राहु और देवता वायु हैं; परंपरा इसे लचीलेपन, स्वतंत्रता और खुलेपन से जो...
नक्षत्र
विशाखा नक्षत्र: देवता, स्वभाव और नामाक्षर
विशाखा 27 नक्षत्रों में सोलहवाँ है, जो तुला और वृश्चिक दोनों राशियों में फैला है। इसके स्वामी गुरु और देवता इंद्र और अग्नि हैं; प...
नक्षत्र
अनुराधा नक्षत्र: देवता, स्वभाव और नामाक्षर
अनुराधा 27 नक्षत्रों में सत्रहवाँ है, पूरा वृश्चिक राशि में। इसके स्वामी शनि और देवता मित्र हैं; परंपरा इसे दोस्ती, सहयोग और निष्ठा से जोड़त...
नक्षत्र
ज्येष्ठा नक्षत्र: देवता, स्वभाव और नामाक्षर
ज्येष्ठा 27 नक्षत्रों में अठारहवाँ है, पूरा वृश्चिक राशि में। इसके स्वामी बुध और देवता इंद्र हैं; परंपरा इसे ज़िम्मेदारी और अपनों की परवाह स...
नक्षत्र
मूल नक्षत्र: जड़ तक पहुँचने वाला नक्षत्र
मूल धनु राशि का पहला नक्षत्र है, जिसके स्वामी केतु और देवता निर्ऋति हैं। परंपरा इसे जड़ तक जाकर सच खोजने और पुराने को छोड़कर नई शुरुआत करने...
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: अपराजित उत्साह का नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा धनु राशि का दूसरा नक्षत्र है, जिसके स्वामी शुक्र और देवता आप: (जल) हैं। परंपरा इसे उत्साह, आत्मविश्वास और जल जैसी ताज़गी देने वा...
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: स्थिर निष्ठा का नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा धनु के अंत से मकर तक फैला नक्षत्र है, जिसके स्वामी सूर्य और देवता विश्वेदेव हैं। परंपरा इसे धैर्य, ईमानदारी और लंबे समय तक टिकने...
नक्षत्र
श्रवण नक्षत्र: सुनने और सीखने का नक्षत्र
श्रवण मकर राशि का नक्षत्र है, जिसके स्वामी चंद्र और देवता विष्णु हैं। परंपरा इसे ध्यान से सुनने, सीखने और ज्ञान को आगे बाँटने से जोड़ती है।
नक्षत्र
शतभिषा नक्षत्र: एकांत और खोज का नक्षत्र
शतभिषा कुंभ राशि का नक्षत्र है, जिसके स्वामी राहु और देवता वरुण हैं। परंपरा इसे स्वतंत्र सोच, खोज, एकांत और सच की तलाश से जोड़ती है।
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र: तप और आदर्श का नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद कुंभ से मीन तक फैला नक्षत्र है, जिसके स्वामी गुरु और देवता अज एकपाद हैं। परंपरा इसे आदर्श, गहरी लगन और भीतरी बदलाव...
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: गहराई और धैर्य का नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद मीन राशि का नक्षत्र है, जिसके स्वामी शनि और देवता अहिर्बुध्न्य हैं। परंपरा इसे शांत गहराई, धैर्य, संयम और करुणा से जोड़ती है।
नक्षत्र
रेवती नक्षत्र: पोषण और सुरक्षित यात्रा का नक्षत्र
रेवती 27 नक्षत्रों में आख़िरी है, जिसके स्वामी बुध और देवता पूषा हैं। परंपरा इसे कोमलता, पोषण, दूसरों को राह दिखाने और एक चक्र के सुंदर समाप...
नक्षत्र
धनिष्ठा नक्षत्र: लय और समृद्धि का नक्षत्र
धनिष्ठा मकर के अंत से कुंभ तक फैला नक्षत्र है, जिसके स्वामी मंगल और देवता अष्ट वसु हैं। परंपरा इसे लय, ऊर्जा, समूह में काम और समृद्धि से जोड...
राशियाँ · 12 पन्ने
राशियाँ
मेष राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
मेष राशिचक्र की पहली राशि है, जिसके स्वामी मंगल हैं और तत्व अग्नि। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और मेष लग्न...
राशियाँ
वृषभ राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
वृषभ राशिचक्र की दूसरी राशि है, जिसके स्वामी शुक्र हैं और तत्व पृथ्वी। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और वृषभ...
राशियाँ
मिथुन राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
मिथुन राशिचक्र की तीसरी राशि है, जिसके स्वामी बुध हैं और तत्व वायु। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और मिथुन लग...
राशियाँ
कर्क राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
कर्क राशिचक्र की चौथी राशि है, जिसके स्वामी चंद्र हैं और तत्व जल। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और कर्क लग्न...
राशियाँ
सिंह राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
सिंह राशिचक्र की पाँचवीं राशि है, जिसके स्वामी सूर्य हैं और तत्व अग्नि। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और सिंह...
राशियाँ
कन्या राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
कन्या राशिचक्र की छठी राशि है, जिसके स्वामी बुध हैं और तत्व पृथ्वी। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और कन्या लग...
राशियाँ
तुला राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
तुला राशिचक्र की सातवीं राशि है, जिसके स्वामी शुक्र हैं और तत्व वायु। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और तुला ल...
राशियाँ
वृश्चिक राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
वृश्चिक राशिचक्र की आठवीं राशि है, जिसके स्वामी मंगल हैं और तत्व जल। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और वृश्चिक...
राशियाँ
धनु राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
धनु राशिचक्र की नौवीं राशि है, जिसके स्वामी गुरु हैं और तत्व अग्नि। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और धनु लग्न...
राशियाँ
मकर राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
मकर राशिचक्र की दसवीं राशि है, जिसके स्वामी शनि हैं और तत्व पृथ्वी। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और मकर लग्न...
राशियाँ
कुंभ राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
कुंभ राशिचक्र की ग्यारहवीं राशि है, जिसके स्वामी शनि हैं और तत्व वायु। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और कुंभ...
राशियाँ
मीन राशि: स्वभाव, नक्षत्र और नामाक्षर
मीन राशिचक्र की बारहवीं राशि है, जिसके स्वामी गुरु हैं और तत्व जल। यहाँ इसका स्वभाव परंपरा के अनुसार, इसके नक्षत्र, नौ नामाक्षर और मीन लग्न...
ग्रह · 9 पन्ने
ग्रह
सूर्य: आत्मविश्वास और रोशनी का ग्रह
सूर्य नवग्रहों में केंद्र माना जाता है। परंपरा इसे आत्मविश्वास, पिता, अधिकार और जीवन की रोशनी से जोड़ती है। इस पेज पर उसकी राशियाँ, षड्बल और...
ग्रह
चंद्र: मन और भावनाओं का ग्रह
चंद्र जिस राशि में होता है, वही आपकी चंद्र राशि है, और जिस नक्षत्र में होता है वही जन्म-नक्षत्र। परंपरा चंद्र को मन, माँ और भावनाओं से जोड़त...
ग्रह
मंगल: साहस और ऊर्जा का ग्रह
मंगल को परंपरा साहस, ऊर्जा, पहल और भाई-बहनों से जोड़ती है। इस पेज पर मंगल को एक ग्रह के रूप में समझते हैं: उसकी राशियाँ, दृष्टि, षड्बल और मह...
ग्रह
बुध: बुद्धि और बातचीत का ग्रह
बुध को परंपरा बुद्धि, वाणी, हिसाब-किताब और सीखने से जोड़ती है। इस पेज पर उसकी राशियाँ, षड्बल और 17 वर्ष की महादशा सरल भाषा में हैं।
ग्रह
गुरु: ज्ञान और मार्गदर्शन का ग्रह
गुरु, जिन्हें गुरु भी कहते हैं, को परंपरा ज्ञान, धर्म, शिक्षक और संतान से जोड़ती है। इस पेज पर उनकी राशियाँ, दृष्टि, षड्बल और महादशा सरल...
ग्रह
शुक्र: प्रेम, कला और सौंदर्य का ग्रह
शुक्र को परंपरा प्रेम, कला, सौंदर्य और जीवन के सुख से जोड़ती है। इसकी महादशा 20 वर्ष की है, जो नौ दशाओं में सबसे लंबी है।
ग्रह
शनि: धैर्य, मेहनत और अनुशासन का ग्रह
शनि को परंपरा धैर्य, मेहनत, अनुशासन और न्याय से जोड़ती है। शनि धीरे चलता है और धीरे, पर टिकाऊ फल देने वाला माना जाता है। यहाँ बिना डर के, सी...
ग्रह
राहु: चंद्र-पथ का उत्तरी बिंदु
राहु कोई पिंड नहीं, एक छाया बिंदु है: जहाँ चंद्र का रास्ता सूर्य के रास्ते को काटता है। परंपरा इसे नई चीज़ों, जिज्ञासा और दुनिया से जुड़ने क...
ग्रह
केतु: चंद्र-पथ का दक्षिणी बिंदु
केतु, राहु के ठीक सामने का छाया बिंदु है। परंपरा इसे भीतर की ओर मुड़ने, गहराई, अध्यात्म और छोड़ देने की समझ से जोड़ती है।
भाव · 12 पन्ने
भाव
पहला भाव: लग्न, यानी तनु भाव
पहला भाव, यानी लग्न या तनु भाव, कुंडली का शुरुआती बिंदु है। परंपरा इसे स्वभाव, दुनिया से मिलने के ढंग और जीवन की सामान्य दिशा से जोड़ती है;...
भाव
दूसरा भाव: धन भाव
दूसरा भाव, यानी धन भाव, परंपरा में जमा पूँजी, परिवार, वाणी और खान-पान से जुड़ा है। परंपरा इसे संजोने का भाव मानती है, किसी रकम का नहीं।
भाव
तीसरा भाव: सहज या पराक्रम भाव
तीसरा भाव, यानी सहज या पराक्रम भाव, परंपरा में साहस, अपनी मेहनत, छोटे भाई-बहन और बातचीत से जुड़ा है। यह उपचय भाव है, जिसे परंपरा समय के साथ...
भाव
चौथा भाव: सुख या बंधु भाव
चौथा भाव, यानी सुख या बंधु भाव, परंपरा में घर, माँ, ज़मीन-मकान, वाहन और मन की शांति से जुड़ा है। यह केंद्र भाव है और कुंडली की तली में, जड़ो...
भाव
पाँचवाँ भाव: पुत्र या विद्या भाव
पाँचवाँ भाव, यानी पुत्र या विद्या भाव, परंपरा में संतान, बुद्धि, पढ़ाई, रचनात्मकता और पूर्व पुण्य से जुड़ा है। यह त्रिकोण भाव है, जिसे परंपर...
भाव
षष्ठ भाव: सेवा, ऋण और प्रतिस्पर्धा
छठा भाव परंपरा में सेवा, रोज़ की दिनचर्या, ऋण और प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है। इसका पुराना नाम रिपु भाव है, पर इसका असली अर्थ है चुनौतियों का सा...
भाव
सातवाँ भाव: कलत्र या जाया भाव
सातवाँ भाव, यानी कलत्र या जाया भाव, परंपरा में जीवन-साथी, विवाह, व्यापार की साझेदारी और दूसरों से जुड़ने के ढंग से जुड़ा है। यह लग्न के ठीक...
भाव
आठवाँ भाव: रंध्र भाव
आठवाँ भाव, यानी रंध्र भाव, परंपरा में गहरे शोध, बदलाव, छिपी बातों, विरासत और साझा धन से जुड़ा है। यह भीतर उतरकर समझने और नए सिरे से शुरू करन...
भाव
नौवाँ भाव: भाग्य या धर्म भाव
नौवाँ भाव, यानी भाग्य या धर्म भाव, परंपरा में आस्था, गुरु, पिता, ऊँची पढ़ाई, लंबी यात्राओं और भाग्य से जुड़ा है। यह सबसे ऊँचा त्रिकोण भाव मा...
भाव
दसवाँ भाव: कर्म भाव
दसवाँ भाव, यानी कर्म भाव, परंपरा में काम-काज, करियर, समाज में पहचान और ज़िम्मेदारी से जुड़ा है। यह कुंडली का सबसे ऊँचा बिंदु है, जहाँ इंसान...
भाव
ग्यारहवाँ भाव: लाभ भाव
ग्यारहवाँ भाव, यानी लाभ भाव, परंपरा में आमदनी, लाभ, मित्र, बड़े भाई-बहन और इच्छाओं के पूरे होने से जुड़ा है। यह उपचय भाव है, जिसे परंपरा समय...
भाव
बारहवाँ भाव: व्यय या मोक्ष भाव
बारहवाँ भाव, यानी व्यय या मोक्ष भाव, परंपरा में ख़र्च, दान, दूर देश, विश्राम, एकांत और मुक्ति की खोज से जुड़ा है। यह कुंडली का आख़िरी भाव है...
वर्ग कुंडलियाँ · 16 पन्ने
वर्ग कुंडलियाँ
अक्षवेदांश (D45): सामान्य विचार, और बाद की परंपरा में पिता की ओर की विरासत
अक्षवेदांश (D45) हर राशि को 40 कला के पैंतालीस भागों में बाँटता है। पराशर इसे सब तरह के विचार से जोड़ते हैं, और बाद की परंपरा इसमें पिता की...
वर्ग कुंडलियाँ
चतुर्थांश (D4): घर, संपत्ति और भाग्य का वर्ग
चतुर्थांश (D4) हर राशि को 7°30′ के चार भागों में बाँटता है। ये भाग उसी राशि और उससे चौथी, सातवीं, दसवीं राशि में जाते हैं, और परंपरा इसे घर,...
वर्ग कुंडलियाँ
चतुर्विंशांश (D24): विद्या और पढ़ाई का वर्ग
चतुर्विंशांश (D24), जिसे सिद्धांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°15′ के चौबीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे विद्या, पढ़ाई और ज्ञान से जोड़ती है...
वर्ग कुंडलियाँ
दशमांश (D10): काम और करियर का वर्ग
दशमांश (D10) हर राशि को 3-3 अंश के दस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे काम, करियर और समाज में पद से जोड़ती है, और इसे दसवें भाव के साथ पढ़ती...
वर्ग कुंडलियाँ
द्रेष्काण (D3): भाई-बहन और साहस का वर्ग
द्रेष्काण (D3) हर राशि को 10-10 अंश के तीन भागों में बाँटता है। पराशर की विधि में ये भाग उसी राशि, उससे पाँचवीं और नौवीं राशि में जाते हैं,...
वर्ग कुंडलियाँ
द्वादशांश (D12): माता-पिता का वर्ग
द्वादशांश (D12) हर राशि को 2°30′ के बारह भागों में बाँटता है, जो उसी राशि से क्रम से चलते हैं। परंपरा इसे माता-पिता और उनसे मिली विरासत से ज...
वर्ग कुंडलियाँ
होरा (D2): धन और संसाधनों का वर्ग
होरा (D2) हर राशि को 15-15 अंश के दो भागों में बाँटता है। पराशर की विधि में हर ग्रह या तो सूर्य की होरा (सिंह) में जाता है या चंद्र की होरा...
वर्ग कुंडलियाँ
खवेदांश (D40): सामान्य भलाई, और बाद की परंपरा में ननिहाल की विरासत
खवेदांश (D40), जिसे चत्वारिंशांश भी कहते हैं, हर राशि को 45 कला के चालीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे सामान्य भलाई से, और बाद की परंपरा म...
वर्ग कुंडलियाँ
नवांश (D9): जीवनसाथी, धर्म और ग्रहों का भीतरी बल
नवांश (D9) हर राशि को 3°20′ के नौ भागों में बाँटता है। मुख्य कुंडली (D1) के बाद यह सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला वर्ग है; परंपरा इसे जीवनसाथी,...
वर्ग कुंडलियाँ
सप्तांश (D7): संतान का वर्ग
सप्तांश (D7) हर राशि को लगभग 4°17′ के सात भागों में बाँटता है। परंपरा इसे संतान और वंश से जोड़ती है, और इसे हमेशा पाँचवें भाव के साथ पढ़ती ह...
वर्ग कुंडलियाँ
भांश (D27): सामर्थ्य और स्वभाव का वर्ग
भांश (D27), जिसे सप्तविंशांश या नक्षत्रांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°6′40″ के सत्ताईस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे व्यक्ति के सामान्य साम...
वर्ग कुंडलियाँ
षष्ट्यंश (D60): सबसे बारीक वर्ग
षष्ट्यंश (D60) हर राशि को आधे-आधे अंश के साठ भागों में बाँटता है। परंपरा इसे सबसे बारीक वर्ग मानती है और पूर्व कर्म से जोड़ती है; यह इतना सं...
वर्ग कुंडलियाँ
षोडशांश (D16): वाहन और सुख-सुविधा का वर्ग
षोडशांश (D16), जिसे कलांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°52′30″ के सोलह भागों में बाँटता है। परंपरा इसे वाहन, सुख-सुविधा और मन की प्रसन्नता से जो...
वर्ग कुंडलियाँ
षोडशवर्ग क्या है?
षोडशवर्ग जन्म-कुंडली के सोलह विभाजन हैं, D1 से D60 तक। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र हर वर्ग को जीवन के किसी विषय से जोड़ता है। ऊँचे वर्ग जन्म-स...
वर्ग कुंडलियाँ
त्रिंशांश (D30): जीवन की परीक्षाएँ और उनसे निपटने का ढंग
त्रिंशांश (D30) बाकी वर्गों से अलग है: इसमें हर राशि पाँच असमान भागों में बँटती है, और हर भाग मंगल, शनि, गुरु, बुध या शुक्र को मिलता है। परं...
वर्ग कुंडलियाँ
विंशांश (D20): उपासना और साधना का वर्ग
विंशांश (D20) हर राशि को 1°30′ के बीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे उपासना, साधना और आध्यात्मिक रुचि से जोड़ती है।
महादशा और अंतर्दशा · 81 पन्ने
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में केतु अंतर्दशा
केतु की महादशा में केतु की अंतर्दशा को केतु–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में शुक्र अंतर्दशा
केतु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को केतु–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में सूर्य अंतर्दशा
केतु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को केतु–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में चंद्र अंतर्दशा
केतु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को केतु–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में मंगल अंतर्दशा
केतु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को केतु–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में राहु अंतर्दशा
केतु की महादशा में राहु की अंतर्दशा को केतु–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में गुरु अंतर्दशा
केतु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को केतु–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में शनि अंतर्दशा
केतु की महादशा में शनि की अंतर्दशा को केतु–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
केतु महादशा में बुध अंतर्दशा
केतु की महादशा में बुध की अंतर्दशा को केतु–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में शुक्र अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को शुक्र–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में सूर्य अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को शुक्र–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में चंद्र अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को शुक्र–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में मंगल अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को शुक्र–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में राहु अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में राहु की अंतर्दशा को शुक्र–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में गुरु अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को शुक्र–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में शनि अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में शनि की अंतर्दशा को शुक्र–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में बुध अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में बुध की अंतर्दशा को शुक्र–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शुक्र महादशा में केतु अंतर्दशा
शुक्र की महादशा में केतु की अंतर्दशा को शुक्र–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में सूर्य अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को सूर्य–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में चंद्र अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को सूर्य–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में मंगल अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को सूर्य–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में राहु अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में राहु की अंतर्दशा को सूर्य–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में गुरु अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को सूर्य–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में शनि अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा को सूर्य–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में बुध अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में बुध की अंतर्दशा को सूर्य–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में केतु अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में केतु की अंतर्दशा को सूर्य–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
सूर्य महादशा में शुक्र अंतर्दशा
सूर्य की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को सूर्य–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में चंद्र अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को चंद्र–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में मंगल अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को चंद्र–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में राहु अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में राहु की अंतर्दशा को चंद्र–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में गुरु अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को चंद्र–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में शनि अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में शनि की अंतर्दशा को चंद्र–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में बुध अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में बुध की अंतर्दशा को चंद्र–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में केतु अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में केतु की अंतर्दशा को चंद्र–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में शुक्र अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को चंद्र–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
चंद्र महादशा में सूर्य अंतर्दशा
चंद्र की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को चंद्र–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में मंगल अंतर्दशा
मंगल की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को मंगल–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में राहु अंतर्दशा
मंगल की महादशा में राहु की अंतर्दशा को मंगल–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में गुरु अंतर्दशा
मंगल की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को मंगल–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में शनि अंतर्दशा
मंगल की महादशा में शनि की अंतर्दशा को मंगल–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में बुध अंतर्दशा
मंगल की महादशा में बुध की अंतर्दशा को मंगल–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में केतु अंतर्दशा
मंगल की महादशा में केतु की अंतर्दशा को मंगल–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में शुक्र अंतर्दशा
मंगल की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को मंगल–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में सूर्य अंतर्दशा
मंगल की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को मंगल–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
मंगल महादशा में चंद्र अंतर्दशा
मंगल की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को मंगल–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में राहु अंतर्दशा
राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा को राहु–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा
राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को राहु–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में शनि अंतर्दशा
राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा को राहु–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में बुध अंतर्दशा
राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा को राहु–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में केतु अंतर्दशा
राहु की महादशा में केतु की अंतर्दशा को राहु–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में शुक्र अंतर्दशा
राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को राहु–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में सूर्य अंतर्दशा
राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को राहु–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में चंद्र अंतर्दशा
राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को राहु–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
राहु महादशा में मंगल अंतर्दशा
राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को राहु–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में गुरु अंतर्दशा
गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को गुरु–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में शनि अंतर्दशा
गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशा को गुरु–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में बुध अंतर्दशा
गुरु की महादशा में बुध की अंतर्दशा को गुरु–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में केतु अंतर्दशा
गुरु की महादशा में केतु की अंतर्दशा को गुरु–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में शुक्र अंतर्दशा
गुरु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को गुरु–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में सूर्य अंतर्दशा
गुरु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को गुरु–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में चंद्र अंतर्दशा
गुरु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को गुरु–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में मंगल अंतर्दशा
गुरु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को गुरु–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
गुरु महादशा में राहु अंतर्दशा
गुरु की महादशा में राहु की अंतर्दशा को गुरु–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में शनि अंतर्दशा
शनि की महादशा में शनि की अंतर्दशा को शनि–शनि दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में बुध अंतर्दशा
शनि की महादशा में बुध की अंतर्दशा को शनि–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में केतु अंतर्दशा
शनि की महादशा में केतु की अंतर्दशा को शनि–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में शुक्र अंतर्दशा
शनि की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को शनि–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में सूर्य अंतर्दशा
शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को शनि–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में चंद्र अंतर्दशा
शनि की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को शनि–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में मंगल अंतर्दशा
शनि की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को शनि–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में राहु अंतर्दशा
शनि की महादशा में राहु की अंतर्दशा को शनि–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
शनि महादशा में गुरु अंतर्दशा
शनि की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को शनि–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में बुध अंतर्दशा
बुध की महादशा में बुध की अंतर्दशा को बुध–बुध दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में केतु अंतर्दशा
बुध की महादशा में केतु की अंतर्दशा को बुध–केतु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में शुक्र अंतर्दशा
बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा को बुध–शुक्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में सूर्य अंतर्दशा
बुध की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा को बुध–सूर्य दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा
बुध की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा को बुध–चंद्र दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा
बुध की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को बुध–मंगल दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में राहु अंतर्दशा
बुध की महादशा में राहु की अंतर्दशा को बुध–राहु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में गुरु अंतर्दशा
बुध की महादशा में गुरु की अंतर्दशा को बुध–गुरु दशा भी कहते हैं।
महादशा और अंतर्दशा
बुध महादशा में शनि अंतर्दशा
बुध की महादशा में शनि की अंतर्दशा को बुध–शनि दशा भी कहते हैं।
नक्षत्र चरण · 108 पन्ने
नक्षत्र चरण
अश्विनी नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
अश्विनी का चरण 1 मेष 0°00′ से मेष 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अश्विनी नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
अश्विनी का चरण 2 मेष 3°20′ से मेष 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अश्विनी नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
अश्विनी का चरण 3 मेष 6°40′ से मेष 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अश्विनी नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
अश्विनी का चरण 4 मेष 10°00′ से मेष 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
भरणी नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
भरणी का चरण 1 मेष 13°20′ से मेष 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
भरणी नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
भरणी का चरण 2 मेष 16°40′ से मेष 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
भरणी नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
भरणी का चरण 3 मेष 20°00′ से मेष 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
भरणी नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
भरणी का चरण 4 मेष 23°20′ से मेष 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
कृत्तिका नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
कृत्तिका का चरण 1 मेष 26°40′ से मेष 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
कृत्तिका नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
कृत्तिका का चरण 2 वृषभ 0°00′ से वृषभ 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
कृत्तिका नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
कृत्तिका का चरण 3 वृषभ 3°20′ से वृषभ 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
कृत्तिका नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
कृत्तिका का चरण 4 वृषभ 6°40′ से वृषभ 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रोहिणी नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
रोहिणी का चरण 1 वृषभ 10°00′ से वृषभ 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रोहिणी नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
रोहिणी का चरण 2 वृषभ 13°20′ से वृषभ 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रोहिणी नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
रोहिणी का चरण 3 वृषभ 16°40′ से वृषभ 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रोहिणी नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
रोहिणी का चरण 4 वृषभ 20°00′ से वृषभ 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मृगशिरा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
मृगशिरा का चरण 1 वृषभ 23°20′ से वृषभ 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मृगशिरा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
मृगशिरा का चरण 2 वृषभ 26°40′ से वृषभ 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मृगशिरा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
मृगशिरा का चरण 3 मिथुन 0°00′ से मिथुन 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मृगशिरा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
मृगशिरा का चरण 4 मिथुन 3°20′ से मिथुन 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आर्द्रा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
आर्द्रा का चरण 1 मिथुन 6°40′ से मिथुन 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आर्द्रा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
आर्द्रा का चरण 2 मिथुन 10°00′ से मिथुन 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आर्द्रा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
आर्द्रा का चरण 3 मिथुन 13°20′ से मिथुन 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आर्द्रा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
आर्द्रा का चरण 4 मिथुन 16°40′ से मिथुन 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुनर्वसु नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुनर्वसु का चरण 1 मिथुन 20°00′ से मिथुन 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुनर्वसु नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुनर्वसु का चरण 2 मिथुन 23°20′ से मिथुन 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुनर्वसु नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुनर्वसु का चरण 3 मिथुन 26°40′ से मिथुन 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुनर्वसु नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुनर्वसु का चरण 4 कर्क 0°00′ से कर्क 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुष्य नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुष्य का चरण 1 कर्क 3°20′ से कर्क 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुष्य नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुष्य का चरण 2 कर्क 6°40′ से कर्क 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुष्य नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुष्य का चरण 3 कर्क 10°00′ से कर्क 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पुष्य नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
पुष्य का चरण 4 कर्क 13°20′ से कर्क 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आश्लेषा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
आश्लेषा का चरण 1 कर्क 16°40′ से कर्क 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आश्लेषा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
आश्लेषा का चरण 2 कर्क 20°00′ से कर्क 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आश्लेषा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
आश्लेषा का चरण 3 कर्क 23°20′ से कर्क 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
आश्लेषा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
आश्लेषा का चरण 4 कर्क 26°40′ से कर्क 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मघा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
मघा का चरण 1 सिंह 0°00′ से सिंह 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मघा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
मघा का चरण 2 सिंह 3°20′ से सिंह 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मघा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
मघा का चरण 3 सिंह 6°40′ से सिंह 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मघा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
मघा का चरण 4 सिंह 10°00′ से सिंह 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा फाल्गुनी का चरण 1 सिंह 13°20′ से सिंह 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा फाल्गुनी का चरण 2 सिंह 16°40′ से सिंह 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा फाल्गुनी का चरण 3 सिंह 20°00′ से सिंह 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा फाल्गुनी का चरण 4 सिंह 23°20′ से सिंह 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा फाल्गुनी का चरण 1 सिंह 26°40′ से सिंह 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा फाल्गुनी का चरण 2 कन्या 0°00′ से कन्या 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा फाल्गुनी का चरण 3 कन्या 3°20′ से कन्या 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा फाल्गुनी का चरण 4 कन्या 6°40′ से कन्या 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
हस्त नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
हस्त का चरण 1 कन्या 10°00′ से कन्या 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
हस्त नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
हस्त का चरण 2 कन्या 13°20′ से कन्या 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
हस्त नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
हस्त का चरण 3 कन्या 16°40′ से कन्या 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
हस्त नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
हस्त का चरण 4 कन्या 20°00′ से कन्या 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
चित्रा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
चित्रा का चरण 1 कन्या 23°20′ से कन्या 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
चित्रा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
चित्रा का चरण 2 कन्या 26°40′ से कन्या 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
चित्रा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
चित्रा का चरण 3 तुला 0°00′ से तुला 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
चित्रा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
चित्रा का चरण 4 तुला 3°20′ से तुला 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
स्वाती नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
स्वाती का चरण 1 तुला 6°40′ से तुला 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
स्वाती नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
स्वाती का चरण 2 तुला 10°00′ से तुला 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
स्वाती नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
स्वाती का चरण 3 तुला 13°20′ से तुला 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
स्वाती नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
स्वाती का चरण 4 तुला 16°40′ से तुला 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
विशाखा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
विशाखा का चरण 1 तुला 20°00′ से तुला 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
विशाखा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
विशाखा का चरण 2 तुला 23°20′ से तुला 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
विशाखा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
विशाखा का चरण 3 तुला 26°40′ से तुला 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
विशाखा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
विशाखा का चरण 4 वृश्चिक 0°00′ से वृश्चिक 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अनुराधा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
अनुराधा का चरण 1 वृश्चिक 3°20′ से वृश्चिक 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अनुराधा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
अनुराधा का चरण 2 वृश्चिक 6°40′ से वृश्चिक 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अनुराधा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
अनुराधा का चरण 3 वृश्चिक 10°00′ से वृश्चिक 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
अनुराधा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
अनुराधा का चरण 4 वृश्चिक 13°20′ से वृश्चिक 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
ज्येष्ठा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
ज्येष्ठा का चरण 1 वृश्चिक 16°40′ से वृश्चिक 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
ज्येष्ठा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
ज्येष्ठा का चरण 2 वृश्चिक 20°00′ से वृश्चिक 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
ज्येष्ठा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
ज्येष्ठा का चरण 3 वृश्चिक 23°20′ से वृश्चिक 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
ज्येष्ठा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
ज्येष्ठा का चरण 4 वृश्चिक 26°40′ से वृश्चिक 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मूल नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
मूल का चरण 1 धनु 0°00′ से धनु 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मूल नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
मूल का चरण 2 धनु 3°20′ से धनु 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मूल नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
मूल का चरण 3 धनु 6°40′ से धनु 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
मूल नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
मूल का चरण 4 धनु 10°00′ से धनु 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वाषाढ़ा का चरण 1 धनु 13°20′ से धनु 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वाषाढ़ा का चरण 2 धनु 16°40′ से धनु 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वाषाढ़ा का चरण 3 धनु 20°00′ से धनु 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वाषाढ़ा का चरण 4 धनु 23°20′ से धनु 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तराषाढ़ा का चरण 1 धनु 26°40′ से धनु 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तराषाढ़ा का चरण 2 मकर 0°00′ से मकर 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तराषाढ़ा का चरण 3 मकर 3°20′ से मकर 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तराषाढ़ा का चरण 4 मकर 6°40′ से मकर 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
श्रवण नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
श्रवण का चरण 1 मकर 10°00′ से मकर 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
श्रवण नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
श्रवण का चरण 2 मकर 13°20′ से मकर 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
श्रवण नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
श्रवण का चरण 3 मकर 16°40′ से मकर 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
श्रवण नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
श्रवण का चरण 4 मकर 20°00′ से मकर 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
धनिष्ठा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
धनिष्ठा का चरण 1 मकर 23°20′ से मकर 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
धनिष्ठा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
धनिष्ठा का चरण 2 मकर 26°40′ से मकर 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
धनिष्ठा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
धनिष्ठा का चरण 3 कुंभ 0°00′ से कुंभ 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
धनिष्ठा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
धनिष्ठा का चरण 4 कुंभ 3°20′ से कुंभ 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
शतभिषा नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
शतभिषा का चरण 1 कुंभ 6°40′ से कुंभ 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
शतभिषा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
शतभिषा का चरण 2 कुंभ 10°00′ से कुंभ 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
शतभिषा नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
शतभिषा का चरण 3 कुंभ 13°20′ से कुंभ 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
शतभिषा नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
शतभिषा का चरण 4 कुंभ 16°40′ से कुंभ 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा भाद्रपद का चरण 1 कुंभ 20°00′ से कुंभ 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा भाद्रपद का चरण 2 कुंभ 23°20′ से कुंभ 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा भाद्रपद का चरण 3 कुंभ 26°40′ से कुंभ 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
पूर्वा भाद्रपद का चरण 4 मीन 0°00′ से मीन 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा भाद्रपद का चरण 1 मीन 3°20′ से मीन 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा भाद्रपद का चरण 2 मीन 6°40′ से मीन 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा भाद्रपद का चरण 3 मीन 10°00′ से मीन 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तरा भाद्रपद का चरण 4 मीन 13°20′ से मीन 16°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रेवती नक्षत्र, चरण 1: अंश, नवांश और नामाक्षर
रेवती का चरण 1 मीन 16°40′ से मीन 20°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रेवती नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
रेवती का चरण 2 मीन 20°00′ से मीन 23°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रेवती नक्षत्र, चरण 3: अंश, नवांश और नामाक्षर
रेवती का चरण 3 मीन 23°20′ से मीन 26°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
नक्षत्र चरण
रेवती नक्षत्र, चरण 4: अंश, नवांश और नामाक्षर
रेवती का चरण 4 मीन 26°40′ से मीन 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
ज्योतिष की बातें · 26 पन्ने
ज्योतिष की बातें
अष्टकवर्ग क्या है और इसके अंक कैसे पढ़ें?
अष्टकवर्ग एक गिनती की पद्धति है: सात ग्रहों की अपनी-अपनी तालिका (भिन्नाष्टकवर्ग) हर राशि को 0 से 8 तक बिंदु देती है, और सबका जोड़ सर्वाष्टकव...
ज्योतिष की बातें
कुंडली मिलान कैसे होता है?
उत्तर भारत में कुंडली मिलान अष्टकूट से होता है: आठ कूट, कुल 36 गुण। ePandit पहले नाड़ी, भकूट, गण और मंगल के दोष और उनके परिहार (जब दोष लागू नहीं माना जाता) देखता है, फिर...
ज्योतिष की बातें
अवकहड़ा चक्र क्या है?
अवकहड़ा चक्र जन्म-कुंडली के साथ छपने वाली एक छोटी तालिका है, जो चंद्रमा की राशि और नक्षत्र से बनती है: नामाक्षर, वर्ण, वश्य, योनि, गण, नाड़ी...
ज्योतिष की बातें
भकूट दोष क्या है, और इसके परिहार क्या हैं?
भकूट अष्टकूट मिलान का 7 अंक वाला कूट है, जो दोनों चंद्र राशियों की दूरी से निकलता है। 2-12, 5-9 या 6-8 पर इसे भकूट दोष कहते हैं। मुहूर्त-चिं...
ज्योतिष की बातें
बुधादित्य योग क्या है?
बुधादित्य योग तब माना जाता है जब सूर्य और बुध एक ही राशि में हों। यह बहुत आम स्थिति है; रमन इसमें शर्त जोड़ते हैं कि बुध सूर्य से 10° के भीत...
ज्योतिष की बातें
भाव-चलित (चलित कुंडली) क्या है?
भाव-चलित कुंडली भावों को राशि की सीमा से नहीं, लग्न और दशम के असली अंशों से बाँटती है। इससे पता चलता है कि कोई ग्रह, जो राशि-कुंडली में एक भ...
ज्योतिष की बातें
चंद्र-मंगल योग क्या है?
चंद्र-मंगल योग तब माना जाता है जब चंद्रमा और मंगल एक ही राशि में हों; रमन इसमें दोनों की आपसी दृष्टि भी जोड़ते हैं। वे इसे आर्थिक स्थिरता के...
ज्योतिष की बातें
धन योग क्या है?
धन योग वे संयोग हैं जिन्हें परंपरा कमाई और संसाधनों से जोड़ती है। ePandit मुख्य रूप से देखता है कि 2 और 11 के स्वामी, 5 और 9 के स्वामियों से...
ज्योतिष की बातें
गजकेसरी योग क्या है?
गजकेसरी योग तब बनता है जब गुरु चंद्रमा से केंद्र (1, 4, 7 या 10वें भाव) में हो। यह बहुत प्रसिद्ध योग है और काफ़ी कुंडलियों में मिलता है; इसक...
ज्योतिष की बातें
गंडमूल और गंडांत में क्या अंतर है?
गंडमूल छह नक्षत्रों (अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती) में जन्म को कहते हैं। गंडांत इससे कहीं छोटा है: केवल तीन नक्षत्र-संधियों क...
ज्योतिष की बातें
काल सर्प दोष क्या है, और ग्रंथ इसके बारे में क्या कहते हैं?
'काल सर्प' उस पैटर्न का प्रचलित नाम है जिसमें सातों ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही ओर हों। BPHS इसका नाम नहीं लेता; यह बाद का वर्गीकरण है। e...
ज्योतिष की बातें
केमद्रुम योग क्या है?
केमद्रुम योग तब गिना जाता है जब चंद्रमा के दोनों ओर (दूसरे और बारहवें भाव में) सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह न हो। ग्रंथ इसके साथ कई परिहार भी बत...
ज्योतिष की बातें
जन्म कुंडली (D1) क्या है?
जन्म कुंडली, जिसे राशि कुंडली या D1 भी कहते हैं, जन्म के क्षण के आकाश का नक्शा है: बारह भाव, बारह राशियाँ और नौ ग्रह। बाकी हर गणना, जैसे दशा...
ज्योतिष की बातें
मंगल-विचार (मंगल दोष) क्या है?
मंगल दोष (कुज दोष) वह स्थिति है जब मंगल लग्न, चंद्र या शुक्र से 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, और कोई परिहार लागू न हो। यह केवल विवाह-मिलान...
ज्योतिष की बातें
नाड़ी दोष क्या है, और इसके परिहार क्या हैं?
नाड़ी अष्टकूट मिलान का सबसे ज़्यादा अंक (8) वाला कूट है। वर और कन्या के जन्म-नक्षत्र एक ही नाड़ी में हों, तो इसे नाड़ी दोष कहते हैं। मुहूर्त...
ज्योतिष की बातें
नीचभंग राज योग क्या है?
जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो पर कुछ तय शर्तें पूरी हों, तो उसकी नीचता का भंग (परिहार) माना जाता है। फलदीपिका ऐसे संयोगों को नीचभंग राज य...
ज्योतिष की बातें
पंचमहापुरुष योग क्या हैं?
जब मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि अपनी या उच्च राशि में होकर लग्न से केंद्र में हों, तो क्रम से रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश योग बनते हैं। इ...
ज्योतिष की बातें
परिवर्तन योग क्या है?
जब दो भावों के स्वामी एक-दूसरे की राशि में बैठें, तो उसे परिवर्तन (राशि-अदला-बदली) योग कहते हैं। फलदीपिका ऐसे 66 जोड़ों को तीन समूहों में बा...
ज्योतिष की बातें
शिशु का पाया क्या है और कैसे निकलता है?
पाया जन्मपत्री में लिखी जाने वाली एक लोक-परंपरा है: सोना, चाँदी, ताँबा या लोहा। इसे निकालने की दो विधियाँ प्रचलित हैं, जो अक्सर अलग उत्तर दे...
ज्योतिष की बातें
पितृ दोष क्या है, और ग्रंथ क्या कहते हैं?
परंपरा 9वें भाव और सूर्य को पिता, बड़ों और पूर्वजों से जोड़ती है, और पितृ-पक्ष का श्राद्ध उन्हें याद करने की जीवित परंपरा है। 'पितृ दोष' नाम...
ज्योतिष की बातें
राज योग क्या है?
BPHS के अनुसार जब किसी केंद्र (1, 4, 7, 10) का स्वामी और किसी त्रिकोण (1, 5, 9) का स्वामी आपस में जुड़ते हैं, तो राज योग बनता है। यह ज़िम्मे...
ज्योतिष की बातें
साढ़ेसाती क्या है, और ग्रंथ इसे कैसे देखते हैं?
साढ़ेसाती शनि के उस गोचर का प्रचलित नाम है जब वह आपकी चंद्र राशि से 12वीं, पहली और दूसरी राशि से गुज़रता है, लगभग साढ़े सात वर्ष। ग्रंथ इसे...
ज्योतिष की बातें
षड्बल क्या है और इसके अंक कैसे पढ़ें?
षड्बल ग्रह के बल का एक गणित-आधारित माप है, जो छह हिस्सों को जोड़कर बनता है। ePandit इसे बी. वी. रमन की पुस्तक Graha and Bhava Balas की विधि...
ज्योतिष की बातें
विंशोत्तरी दशा क्या है और कैसे निकलती है?
विंशोत्तरी दशा 120 वर्ष का एक समय-चक्र है जिसमें नौ ग्रह बारी-बारी से अपनी महादशा चलाते हैं। जन्म-नक्षत्र का स्वामी पहली दशा देता है, और चंद...
ज्योतिष की बातें
विपरीत राज योग क्या है?
जब 6, 8 या 12वें भाव का स्वामी इन्हीं तीन में से किसी भाव में हो, तो हर्ष, सरल या विमल योग बनता है। इन्हें मिलाकर विपरीत राज योग कहते हैं। प...
ज्योतिष की बातें
कुंडली में योग क्या होते हैं?
योग ग्रहों का कोई ख़ास मेल है, जिसका नियम ग्रंथों में लिखा है, जैसे गजकेसरी या पंचमहापुरुष योग। कोई योग अकेले जीवन का फैसला नहीं करता; ePand...
पंचांग · 12 पन्ने
पंचांग
अभिजित मुहूर्त: दोपहर का शांत समय
मुहूर्त-चिंतामणि दिन को 15 मुहूर्तों में बाँटता है, और इनमें आठवाँ अभिजित है, जो स्थानीय दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है। परंपरा इसे...
पंचांग
चंद्र बल: आज का चंद्रमा, आपकी जन्म-राशि से
चंद्र बल में आज के चंद्रमा की राशि को आपकी जन्म-राशि से गिना जाता है। मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ स्थान अनुकूल है, और...
पंचांग
चौघड़िया: दिन के आठ हिस्से
चौघड़िया दिन और रात को 8-8 हिस्सों में बाँटकर हर हिस्से को अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग नाम देने की परंपरा है। यह पश्चिम भारत में...
पंचांग
होरा: दिन के 24 घंटे और उनके स्वामी
होरा दिन का एक 'घंटा' है, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है: सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल के क्रम में। मुहूर्त-चिंतामणि कहता...
पंचांग
करण: आधी तिथि का माप
करण पंचांग का पाँचवाँ अंग है: एक करण आधी तिथि के बराबर होता है। कुल 11 करण हैं, 4 स्थिर और 7 चर। सातवाँ चर करण विष्टि ही "भद्रा" कहलाता है,...
पंचांग
मुहूर्त: अच्छा समय कैसे चुना जाता है
मुहूर्त चुनने में पंचांग के पाँच अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण), मुहूर्त का लग्न, और व्यक्ति के लिए तारा बल और चंद्र बल देखे जाते हैं। इ...
पंचांग
पंचांग में नक्षत्र: चंद्रमा का आज का पड़ाव
पंचांग में "आज का नक्षत्र" वह नक्षत्र है जिसमें आज चंद्रमा है। आकाश के 27 नक्षत्र 13°20′ के हैं, और मुहूर्त-चिंतामणि इन्हें स्वभाव के अनुसार...
पंचांग
योग: सूर्य और चंद्रमा का मिला-जुला माप
पंचांग का चौथा अंग योग है। सूर्य और चंद्रमा के भोगांश को जोड़कर 13°20′ के हिस्सों में बाँटने से 27 योग बनते हैं, विष्कुम्भ से वैधृति तक। यह...
पंचांग
राहु काल: सूर्योदय-सूर्यास्त से निकला एक समय-खंड
राहु काल दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक हिस्सा है जो हर वार के लिए तय क्रम से आता है, और आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला जाता है। परंप...
पंचांग
तारा बल: आपके जन्म-नक्षत्र से आज की गिनती
तारा बल में आज का नक्षत्र आपके जन्म-नक्षत्र से गिना जाता है और नौ ताराओं में से एक बनता है। मुहूर्त-चिंतामणि इसका नियम देता है; परंपरा इसे स...
पंचांग
तिथि: चंद्रमा की चाल से बना दिन
तिथि पंचांग का पहला अंग है। चंद्रमा जब सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है, तो एक तिथि पूरी होती है। एक महीने में 30 तिथियाँ होती हैं, और ज़्या...
पंचांग
वार: सूर्योदय से सूर्योदय तक का दिन
वार पंचांग का दूसरा अंग है: सप्ताह का दिन। हर वार का एक स्वामी ग्रह है, और पंचांग में दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से बदलता है।
संस्कार · 9 पन्ने
संस्कार
अन्नप्राशन: बच्चे का पहला निवाला
अन्नप्राशन वह संस्कार है जिसमें बच्चे को पहली बार अन्न का स्वाद दिया जाता है। मुहूर्त-चिंतामणि बेटे के लिए छठा या आठवाँ और बेटी के लिए पाँचव...
संस्कार
जातकर्म: नवजात का पहला संस्कार
जातकर्म वह संस्कार है जो बच्चे के जन्म के समय किया जाता है: पिता का आशीर्वाद, प्रार्थना, और माँ की गोद में पहला आहार। पुरानी रीति में बच्चे...
संस्कार
कर्णवेध: कान छिदवाने का संस्कार
कर्णवेध में बच्चे के कान छेदे जाते हैं। मुहूर्त-चिंतामणि इसके लिए छठे से आठवें महीने, या किसी विषम वर्ष का समय बताता है। कई समुदायों में यह...
संस्कार
मुंडन: बच्चे के पहले बाल
मुंडन (चूड़ाकर्म) में बच्चे के जन्म के बाल पहली बार उतारे जाते हैं। मनुस्मृति इसके लिए पहला या तीसरा वर्ष बताती है, कई परिवार पाँचवाँ वर्ष भ...
संस्कार
नामकरण: बच्चे को उसका नाम देने का दिन
नामकरण बच्चे का पहला बड़ा संस्कार है, जिसमें घर-परिवार मिलकर उसे नाम देता है। परंपरा जन्म के 11वें या 12वें दिन, या बाद के किसी अच्छे दिन, स...
संस्कार
निष्क्रमण: बच्चे की पहली सैर
निष्क्रमण वह संस्कार है जिसमें बच्चे को पहली बार घर से बाहर ले जाकर सूर्य और आकाश के दर्शन कराए जाते हैं। मुहूर्त-चिंतामणि इसके लिए जन्म से...
संस्कार
उपनयन: ज्ञान की ओर पहला कदम
उपनयन वह संस्कार है जिसमें बच्चा गुरु के पास ज्ञान और अनुशासन की राह पर पहला कदम रखता है, और जनेऊ (यज्ञोपवीत) धारण करता है। मुहूर्त-चिंतामणि...
संस्कार
विद्यारंभ: पहले अक्षर की खुशी
विद्यारंभ में बच्चा पहली बार अक्षर लिखता है। मुहूर्त-चिंतामणि इसके लिए पाँचवाँ वर्ष और उत्तरायण बताता है, और परंपरा में वसंत पंचमी और विजयाद...
संस्कार
विवाह: एक संस्कार, दो परिवार
विवाह सोलह संस्कारों में सबसे बड़ा उत्सव है। मुहूर्त-चिंतामणि का विवाह-प्रकरण इसके महीने, नक्षत्र, तिथि, वार और लग्न बताता है, और गोधूलि वेल...
त्योहार · 37 पन्ने
त्योहार
अक्षय तृतीया: दान और नई शुरुआत का दिन
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया है। निर्णय सिंधु के अनुसार वह तृतीया ली जाती है जो पूर्वाह्न में हो, और दोनों दिन हो तो दूसरा दिन; यह युगादि...
त्योहार
अमावस्या: चाँद-रहित रात, शांत स्मरण का दिन
अमावस्या हर महीने कृष्ण पक्ष की आख़िरी तिथि है, जब चाँद सूर्य के बहुत पास होने से दिखाई नहीं देता। धर्मसिंधु स्नान-दान के लिए परली अमावस्या...
त्योहार
भाई दूज: बहन के घर भाई का भोजन
भाई दूज (यम द्वितीया) कार्तिक शुक्ल द्वितीया है, दिवाली का पाँचवाँ दिन। धर्मसिंधु इसकी कथा देता है: यमुना ने अपने भाई यम को इसी दिन घर बुलाक...
त्योहार
चैत्र नवरात्रि: वसंत में देवी की नौ रातें
चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक देवी की नौ रातें हैं, और नवमी राम नवमी है। धर्मसिंधु कहता है कि इसी प्रतिपदा से देवी-नवरात्र...
त्योहार
छठ पूजा: डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी का सूर्य और छठी मैया का व्रत है: चार दिन, नहाय-खाय से उषा-अर्घ्य तक। षष्ठी की शाम डूबते सूर्य को और सप्तमी की भोर उगत...
त्योहार
देवउठनी एकादशी: भगवान के जागने का उत्सव
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी कार्तिक शुक्ल एकादशी है। परंपरा मानती है कि आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से सोए भगवान विष्णु इस दिन जागते हैं और चातुर...
त्योहार
देवशयनी एकादशी: चातुर्मास की शुरुआत
देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल एकादशी है। परंपरा मानती है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में जाते हैं, और यहीं से चातुर्मास शुरू...
त्योहार
धनतेरस: दिवाली का पहला दीया
धनतेरस कृष्ण त्रयोदशी की शाम है, दिवाली के पाँच दिनों में पहली। ग्रंथ इस शाम घर के बाहर यम के निमित्त दीया रखने की बात करते हैं; परंपरा इसे...
त्योहार
दिवाली: अमावस्या की रात, दीयों की कतार
दिवाली अमावस्या की रात है: अमांत पंचांग में आश्विन की आखिरी रात, पूर्णिमांत में कार्तिक की। दीये और लक्ष्मी पूजा प्रदोष में होते हैं, इसलिए...
त्योहार
विजयादशमी: विजय का दिन
विजयादशमी या दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी है, नवरात्रि के बाद का दिन। धर्मसिंधु के अनुसार दशमी वह ली जाती है जो अपराह्न में हो; श्रवण नक्षत्र का...
त्योहार
एकादशी: महीने में दो बार आने वाला व्रत
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, यानी साल में 24 बार (अधिक मास हो तो 26)। यह भगवान विष्णु के स्मरण का व्रत माना जाता है। धर्मसिंधु स्मार...
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गणेश चतुर्थी: गणपति का आगमन
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है, जब घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना होती है। धर्मसिंधु के अनुसार यह व्रत मध्याह्न-व्यापिनी चतुर्थ...
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गंगा दशहरा: गंगा के धरती पर आने का दिन
गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी है, जिसे परंपरा गंगा के धरती पर उतरने (गंगावतार) का दिन मानती है। धर्मसिंधु के अनुसार वह दशमी ली जाती है जो पू...
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गोवर्धन पूजा: पर्वत, गायें और अन्नकूट
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दिवाली के अगले दिन होती है: गोवर्धन पर्वत (या गोबर/अन्न से बना पर्वत), गायों और श्रीकृष्ण की पूजा, औ...
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गुरु पूर्णिमा: व्यास और गुरुओं का दिन
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ की पूर्णिमा है। धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु इस पूर्णिमा पर व्यास-पूजा बताते हैं, और उसके लिए वह पूर्णिमा ली जाती है जो सूर...
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हनुमान जयंती: भक्ति और सेवा का दिन
उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाती है; कुछ क्षेत्रों में दूसरे दिन, जैसे दिवाली से पहले की कृष्ण चतुर्दशी या दक्षिण में...
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हरतालिका तीज: शिव-पार्वती की पूजा का व्रत
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया का व्रत है, जिसमें शिव और पार्वती की पूजा होती है। धर्मसिंधु के अनुसार इसमें चतुर्थी से जुड़ी तृतीया ली जा...
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होली: होलिका की अग्नि और रंगों का दिन
होली दो दिन का पर्व है: फाल्गुन पूर्णिमा की शाम होलिका दहन, और अगली सुबह रंगों की होली। धर्मसिंधु के अनुसार दहन प्रदोष-व्यापिनी और भद्रा-रहि...
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होलिका दहन: फाल्गुन पूर्णिमा की अग्नि
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात होता है, रंग वाली होली से एक शाम पहले। धर्मसिंधु के अनुसार वह पूर्णिमा ली जाती है जो प्रदोष (सूर्यास्त के...
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: आधी रात का जन्मोत्सव
जन्माष्टमी भाद्रपद (अमांत श्रावण) की कृष्ण अष्टमी है, श्रीकृष्ण के जन्म की रात। धर्मसिंधु के अनुसार अष्टमी वह ली जाती है जो निशीथ, यानी आधी...
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करवा चौथ: चंद्रोदय तक का व्रत
करवा चौथ (धर्मसिंधु में ‘करक चतुर्थी’) कार्तिक (अमांत आश्विन) की कृष्ण चतुर्थी है। ग्रंथ के अनुसार वह चतुर्थी ली जाती है जो चंद्रोदय के समय...
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महाशिवरात्रि: शिव की रात
महाशिवरात्रि माघ (पूर्णिमांत फाल्गुन) की कृष्ण चतुर्दशी की रात है। धर्मसिंधु के अनुसार वह चतुर्दशी ली जाती है जो निशीथ, यानी रात के आठवें मु...
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मकर संक्रांति: सूर्य का मकर में प्रवेश
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य (निरयण गणना में) मकर राशि में प्रवेश करता है, आजकल लगभग 14 या 15 जनवरी। धर्मसिंधु के अनुसार दिन में प्रवेश...
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मासिक शिवरात्रि: हर महीने शिव की रात
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात मासिक शिवरात्रि है। धर्मसिंधु कहता है कि यह अपनी इच्छा का (काम्य) व्रत है, और इसकी तिथि महाशिवरात्रि...
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नाग पंचमी: नाग-चित्रों की पूजा, जीवों का आदर
नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी है। धर्मसिंधु के अनुसार वह पंचमी ली जाती है जो सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक रहे और षष्ठी से जुड़ी हो। ग्रंथ द...
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नरक चतुर्दशी: भोर का स्नान, शाम के दीये
नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली, रूप चौदस या काली चौदस भी कहते हैं, कार्तिक (अमांत आश्विन) की कृष्ण चतुर्दशी है। धर्मसिंधु के अनुसार इस दिन भ...
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शारदीय नवरात्रि: देवी की नौ रातें
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक देवी की नौ रातें हैं। धर्मसिंधु के अनुसार आरंभ (घटस्थापना) उस प्रतिपदा पर होता है जो सूर्यो...
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प्रदोष व्रत: शाम की शिव-पूजा
प्रदोष व्रत हर पक्ष की त्रयोदशी पर, यानी महीने में दो बार, शाम को शिव-पूजा का व्रत है। धर्मसिंधु के अनुसार वह त्रयोदशी ली जाती है जो सूर्यास...
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पूर्णिमा: महीने का पूरा चाँद
पूर्णिमा हर शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि है, जब चाँद पूरा दिखता है। धर्मसिंधु के अनुसार स्नान-दान आदि के लिए पूर्णिमा ‘परली’ ली जाती है, यान...
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रक्षाबंधन: रक्षा-सूत्र का दिन
रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को होता है। धर्मसिंधु के अनुसार राखी भद्रा-रहित पूर्णिमा में, अपराह्न या प्रदोष के समय बाँधी जाती है; अगर पूर्णिमा...
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राम नवमी: मध्याह्न में राम-जन्म
राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी है, श्रीराम के जन्म का दिन और चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन। धर्मसिंधु के अनुसार श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र मे...
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ऋषि पंचमी: सात ऋषियों का स्मरण
ऋषि पंचमी भाद्रपद शुक्ल पंचमी है, जो आमतौर पर गणेश चतुर्थी के अगले दिन आती है। धर्मसिंधु के अनुसार वह पंचमी ली जाती है जो मध्याह्न (दोपहर) म...
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संकष्टी चतुर्थी: हर महीने गणेश का व्रत
संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर रखा जाने वाला गणेश-व्रत है। धर्मसिंधु के अनुसार वह चतुर्थी ली जाती है जो चंद्रोदय के समय ह...
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संक्रांति: सूर्य का नई राशि में प्रवेश
हर महीने जब सूर्य (निरयण गणना में) एक राशि से अगली राशि में प्रवेश करता है, उसे संक्रांति कहते हैं; साल में ऐसी बारह संक्रांतियाँ होती हैं।...
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शरद पूर्णिमा: कोजागर की रात
शरद पूर्णिमा आश्विन की पूर्णिमा है, जिसे धर्मसिंधु ‘कोजागर व्रत’ कहता है। यह वह पूर्णिमा ली जाती है जो निशीथ, यानी आधी रात, में हो। इस रात ल...
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तुलसी विवाह: आँगन का छोटा सा उत्सव
तुलसी विवाह में तुलसी के पौधे का भगवान विष्णु (दामोदर, श्रीकृष्ण या शालिग्राम) से प्रतीकात्मक विवाह किया जाता है। धर्मसिंधु कार्तिक शुक्ल नव...
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वसंत पंचमी: वसंत और विद्या का दिन
वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी है, जिसे धर्मसिंधु वसंतोत्सव का आरंभ कहता है। आज यह मुख्यतः सरस्वती पूजा का दिन है: पीले वस्त्र, किताबों-वाद्यों...