नीचभंग राज योग क्या है?

जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में हो पर कुछ तय शर्तें पूरी हों, तो उसकी नीचता का भंग (परिहार) माना जाता है। फलदीपिका ऐसे संयोगों को नीचभंग राज योग कहता है।

स्रोत: Phaladeepika (Mantreswara), 7.26 (Neechabhanga)

आपकी कुंडली में

अर्थ
नीच का भंग, यानी नीच राशि के असर का कम होना
मुख्य शर्त
नीच राशि का स्वामी या ग्रह की उच्च राशि का स्वामी लग्न/चंद्र से केंद्र में
मुख्य स्रोत
फलदीपिका 7.26-30
स्रोत-स्तर
शास्त्र

परिचय

हर ग्रह की एक उच्च राशि होती है और उससे ठीक सातवीं नीच राशि। जैसे सूर्य मेष में उच्च और तुला में नीच; मंगल मकर में उच्च और कर्क में नीच। नीच राशि में ग्रह को परंपरा कम सहज स्थिति मानती है।

पर ग्रंथ यहीं नहीं रुकते। वे बताते हैं कि किन हालात में यह नीचता "भंग" हो जाती है, यानी उसका असर कम हो जाता है। ऐसे संयोग को नीचभंग कहते हैं, और फलदीपिका (अध्याय 7, श्लोक 26-30) इन्हें राज योगों में गिनता है।

फलदीपिका की शर्तें

कोई ग्रह नीच राशि में हो, और इनमें से कोई शर्त पूरी हो:

  1. नीच राशि का स्वामी, या उस ग्रह की उच्च राशि का स्वामी, लग्न या चंद्रमा से केंद्र (1, 4, 7, 10) में हो (7.26, 7.29)।
  2. नीच राशि का स्वामी और उच्च राशि का स्वामी आपस में केंद्र में हों (7.27)।
  3. नीच ग्रह पर उस राशि के स्वामी की दृष्टि हो (7.28)। श्लोक यह भी कहता है कि अगर नीच ग्रह 6, 8, 12 के बाहर हो तो यह और अच्छा माना जाता है।

अनुवादक की टिप्पणियों में दो और रूप हैं:

  • कुछ विद्वानों के अनुसार, जो ग्रह उस राशि में उच्च होता है, वह लग्न या चंद्र से केंद्र में हो।
  • नीच ग्रह खुद लग्न या चंद्र से केंद्र में हो।

एक उदाहरण

मान लीजिए मंगल कर्क में है, यानी नीच। अब:

  • कर्क का स्वामी चंद्रमा है,
  • मंगल की उच्च राशि मकर का स्वामी शनि है,
  • और कर्क में उच्च होने वाला ग्रह गुरु (बृहस्पति) है।

अगर इनमें से कोई लग्न या चंद्र से केंद्र में हो, या चंद्रमा मंगल को देखे (कर्क से सातवीं राशि मकर में चंद्र हो तो उसकी दृष्टि कर्क पर पड़ती है), तो नीचभंग की शर्त पूरी होती है। रमन की How to Judge a Horoscope में भी ऐसे उदाहरण हैं, जैसे गुरु के कारण मंगल का नीचभंग।

अलग-अलग मत

होरा सार की एक टिप्पणी एक तेलुगु ग्रंथ (जातक मार्तंड) का मत बताती है: केवल लग्नेश का नीचभंग ही सच्चा नीचभंग राज योग है, दूसरे ग्रहों का नहीं। ePandit यह मत नोट के रूप में दिखाता है।

यह भी याद रखिए कि "नीचभंग" का सीधा अर्थ है "नीच का असर कम होना"। यह अपने आप किसी बड़े फल की घोषणा नहीं है। परंपरा मानती है कि ऐसे ग्रह से जुड़े विषयों में शुरुआती कठिनाई के बाद सँभलने और आगे बढ़ने की संभावना रहती है।

ePandit में कैसे दिखता है

हर नीच ग्रह के साथ ePandit लिखता है:

  • ग्रह किस राशि में नीच है,
  • कौन-कौन सी नीचभंग शर्तें पूरी हुईं, हर एक का स्रोत (श्लोक या टिप्पणी) के साथ,
  • और अगर कोई शर्त पूरी नहीं हुई, तो बस इतना कि "नीचभंग की शर्त नहीं मिली"। इसके साथ कोई डराने वाली बात नहीं, क्योंकि एक ग्रह की स्थिति पूरी कुंडली का एक हिस्सा भर है।

राहु-केतु के लिए नीचभंग नहीं गिना जाता।

उच्च और नीच राशियाँ

ग्रह उच्च राशि नीच राशि
सूर्य मेष तुला
चंद्र वृषभ वृश्चिक
मंगल मकर कर्क
बुध कन्या मीन
गुरु कर्क मकर
शुक्र मीन कन्या
शनि तुला मेष

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरा कोई ग्रह नीच है, क्या चिंता करूँ?

नहीं। नीच राशि एक स्थिति है, फैसला नहीं। बहुत-सी कुंडलियों में नीचभंग की कोई शर्त भी पूरी होती है, और ग्रह की दशा, भाव और दूसरे संबंध साथ देखे जाते हैं।

क्या नीचभंग वाला ग्रह उच्च जैसा हो जाता है?

ग्रंथ ऐसा नहीं कहते। वे इसे नीचता का भंग, यानी असर का कम होना, बताते हैं; फल पूरी कुंडली पर निर्भर है।

लग्न पता न हो तो?

तब केवल चंद्रमा से केंद्र वाली और दृष्टि वाली शर्तें जाँची जाती हैं, और यह साफ़ लिखा जाता है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • Phaladeepika (Mantreswara) · 7.26 (Neechabhanga)
  • Phaladeepika (Mantreswara) · 7.27
  • Phaladeepika (Mantreswara) · 7.28
  • Phaladeepika (Mantreswara) · 7.26, translator's note
  • Phaladeepika (Mantreswara) · 7.30, translator's note
  • Hora Sara (commentary) · note on Neechabhanga
  • B. V. Raman, How to Judge a Horoscope · on the 1st house

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14