16 वर्ग कुंडलियाँ
D1 से D60 तक: कौन-सा वर्ग किस विषय के लिए, और जन्म समय से कितना संवेदनशील।
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अक्षवेदांश (D45): सामान्य विचार, और बाद की परंपरा में पिता की ओर की विरासत
अक्षवेदांश (D45) हर राशि को 40 कला के पैंतालीस भागों में बाँटता है। पराशर इसे सब तरह के विचार से जोड़ते हैं, और बाद की परंपरा इसमें पिता की...
चतुर्थांश (D4): घर, संपत्ति और भाग्य का वर्ग
चतुर्थांश (D4) हर राशि को 7°30′ के चार भागों में बाँटता है। ये भाग उसी राशि और उससे चौथी, सातवीं, दसवीं राशि में जाते हैं, और परंपरा इसे घर,...
चतुर्विंशांश (D24): विद्या और पढ़ाई का वर्ग
चतुर्विंशांश (D24), जिसे सिद्धांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°15′ के चौबीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे विद्या, पढ़ाई और ज्ञान से जोड़ती है...
दशमांश (D10): काम और करियर का वर्ग
दशमांश (D10) हर राशि को 3-3 अंश के दस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे काम, करियर और समाज में पद से जोड़ती है, और इसे दसवें भाव के साथ पढ़ती...
द्रेष्काण (D3): भाई-बहन और साहस का वर्ग
द्रेष्काण (D3) हर राशि को 10-10 अंश के तीन भागों में बाँटता है। पराशर की विधि में ये भाग उसी राशि, उससे पाँचवीं और नौवीं राशि में जाते हैं,...
द्वादशांश (D12): माता-पिता का वर्ग
द्वादशांश (D12) हर राशि को 2°30′ के बारह भागों में बाँटता है, जो उसी राशि से क्रम से चलते हैं। परंपरा इसे माता-पिता और उनसे मिली विरासत से ज...
होरा (D2): धन और संसाधनों का वर्ग
होरा (D2) हर राशि को 15-15 अंश के दो भागों में बाँटता है। पराशर की विधि में हर ग्रह या तो सूर्य की होरा (सिंह) में जाता है या चंद्र की होरा...
खवेदांश (D40): सामान्य भलाई, और बाद की परंपरा में ननिहाल की विरासत
खवेदांश (D40), जिसे चत्वारिंशांश भी कहते हैं, हर राशि को 45 कला के चालीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे सामान्य भलाई से, और बाद की परंपरा म...
नवांश (D9): जीवनसाथी, धर्म और ग्रहों का भीतरी बल
नवांश (D9) हर राशि को 3°20′ के नौ भागों में बाँटता है। मुख्य कुंडली (D1) के बाद यह सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला वर्ग है; परंपरा इसे जीवनसाथी,...
सप्तांश (D7): संतान का वर्ग
सप्तांश (D7) हर राशि को लगभग 4°17′ के सात भागों में बाँटता है। परंपरा इसे संतान और वंश से जोड़ती है, और इसे हमेशा पाँचवें भाव के साथ पढ़ती ह...
भांश (D27): सामर्थ्य और स्वभाव का वर्ग
भांश (D27), जिसे सप्तविंशांश या नक्षत्रांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°6′40″ के सत्ताईस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे व्यक्ति के सामान्य साम...
षष्ट्यंश (D60): सबसे बारीक वर्ग
षष्ट्यंश (D60) हर राशि को आधे-आधे अंश के साठ भागों में बाँटता है। परंपरा इसे सबसे बारीक वर्ग मानती है और पूर्व कर्म से जोड़ती है; यह इतना सं...
षोडशांश (D16): वाहन और सुख-सुविधा का वर्ग
षोडशांश (D16), जिसे कलांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°52′30″ के सोलह भागों में बाँटता है। परंपरा इसे वाहन, सुख-सुविधा और मन की प्रसन्नता से जो...
षोडशवर्ग क्या है?
षोडशवर्ग जन्म-कुंडली के सोलह विभाजन हैं, D1 से D60 तक। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र हर वर्ग को जीवन के किसी विषय से जोड़ता है। ऊँचे वर्ग जन्म-स...
त्रिंशांश (D30): जीवन की परीक्षाएँ और उनसे निपटने का ढंग
त्रिंशांश (D30) बाकी वर्गों से अलग है: इसमें हर राशि पाँच असमान भागों में बँटती है, और हर भाग मंगल, शनि, गुरु (बृहस्पति), बुध या शुक्र को मिलता है। परं...
विंशांश (D20): उपासना और साधना का वर्ग
विंशांश (D20) हर राशि को 1°30′ के बीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे उपासना, साधना और आध्यात्मिक रुचि से जोड़ती है।