यह क्या है
दशमांश में हर राशि के दस बराबर हिस्से होते हैं, हर हिस्सा 3 अंश का। नवांश के बाद यह सबसे ज़्यादा देखा जाने वाला वर्ग है, क्योंकि लोग अक्सर काम और करियर के बारे में पूछते हैं।
कैसे निकाला जाता है
नियम: विषम राशि में पहला हिस्सा उसी राशि का, फिर आगे क्रम से। सम राशि में पहला हिस्सा उससे नौवीं राशि का, फिर आगे क्रम से।
उदाहरण: कोई ग्रह मेष के 17° पर है। 17 ÷ 3 = 5.67, यानी छठा हिस्सा। मेष विषम है, इसलिए मेष से छठी राशि: कन्या। D10 में यह ग्रह कन्या में होगा। वृषभ के 17° पर होता, तो गिनती वृषभ से नौवीं राशि मकर से शुरू होती, और छठा हिस्सा मिथुन होता।
परंपरा इसमें क्या देखती है
पराशर दशमांश को बड़े कामों और पद-प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं। परंपरा इसमें D10 का लग्न, दसवें भाव का स्वामी, और सूर्य, बुध और शनि की स्थिति देखती है, जिन्हें काम और ज़िम्मेदारी से जुड़ा माना जाता है। इससे यह झलक मिलती है कि किस तरह के काम में व्यक्ति सहज रहता है, जैसे ऐसे काम जिनमें लोगों से मिलना हो, या हिसाब-किताब हो, या लंबी योजना।
जन्म-समय कितना मायने रखता है
लग्न औसतन हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश आगे बढ़ता है; कुछ राशियाँ जल्दी उदय होती हैं, कुछ धीरे। D10 का एक भाग 3° का है, इसलिए जन्म-समय में लगभग 12 मिनट का अंतर D10 का लग्न बदल सकता है। चंद्रमा एक भाग लगभग 5–6 घंटे में पार करता है। ePandit आपकी कुंडली में हर वर्ग के साथ यह भी दिखाता है कि जन्म-समय कितने मिनट बदलने पर उस वर्ग का लग्न बदलेगा। अगर जन्म-समय में 10–15 मिनट का संदेह है, तो D10 के लग्न से ज़्यादा ग्रहों की राशियों पर ध्यान दीजिए।
इसे शांति से कैसे पढ़ें
D10 को एक दूसरी नज़र की तरह पढ़िए, फ़ैसले की तरह नहीं। पहले मुख्य कुंडली (D1) में दसवें भाव और उसके स्वामी को देखा जाता है, फिर चल रही दशा को। D10 बस यह देखने में मदद करता है कि वही बात यहाँ भी दिखती है या नहीं। किसी ग्रह का इस वर्ग में किसी ख़ास राशि में होना अकेले कुछ तय नहीं करता। करियर के फ़ैसले आपकी रुचि, कौशल और मौकों से बनते हैं। D10 एक भाषा है जो इन्हें समझने में मदद कर सकती है, रास्ता तय नहीं करती।