परिचय
जन्म कुंडली उस पल की तस्वीर है जब आपका जन्म हुआ। उस पल पूर्व दिशा के क्षितिज पर जो राशि उदय हो रही थी, वह लग्न कहलाती है, और वहीं से कुंडली का पहला घर (भाव) शुरू होता है। बाकी ग्यारह भाव उसके बाद की राशियों से क्रम से बनते हैं। फिर नौ ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु, केतु) उस पल जिस राशि में थे, उसी भाव में लिखे जाते हैं।
इसे D1 इसलिए कहते हैं कि इसमें हर राशि को एक ही हिस्सा माना गया है। जब राशि को 2, 3, 9 या 60 हिस्सों में बाँटते हैं, तो D2, D3, D9, D60 जैसे वर्ग बनते हैं। वे सब D1 पर ही टिके हैं, इसलिए कुंडली पढ़ने की शुरुआत हमेशा यहीं से होती है।
कुंडली में क्या-क्या होता है
- लग्न: पहला भाव। परंपरा इसे व्यक्ति के अपने स्वभाव और शरीर-मन की बनावट से जोड़ती है।
- बारह भाव: हर भाव जीवन के किसी क्षेत्र से जुड़ा माना जाता है, जैसे दूसरा परिवार और वाणी से, चौथा घर और माँ से, सातवाँ साथी से, दसवाँ काम से।
- बारह राशियाँ: मेष से मीन तक। हर राशि का एक स्वामी ग्रह है।
- नौ ग्रह: हर ग्रह किसी राशि और किसी भाव में बैठा होता है। राहु और केतु चंद्रमा के पात-बिंदु हैं, जिन्हें परंपरा ग्रहों के साथ गिनती है।
- चंद्र राशि और नक्षत्र: चंद्रमा जिस राशि में हो, वह आपकी चंद्र राशि है। उत्तर भारत में नाम और राशिफल इसी से देखे जाते हैं। लग्न और चंद्र राशि अक्सर अलग होते हैं, और दोनों अपनी जगह सही हैं।
उत्तर भारतीय कुंडली में चौखाने के बीच का ऊपर वाला खाना हमेशा पहला भाव होता है और उसमें लिखी संख्या लग्न की राशि बताती है।
ePandit कुंडली कैसे बनाता है
- निरयन (sidereal) राशिचक्र, लाहिड़ी अयनांश। इसलिए हमारी मेष राशि पश्चिमी Aries की तारीखों से मेल नहीं खाती।
- ग्रह की दृश्य (apparent) स्थिति और राहु-केतु के लिए मध्यम पात (mean node)।
- पूर्ण-राशि भाव: लग्न की पूरी राशि पहला भाव, अगली पूरी राशि दूसरा भाव। इसके साथ हम भाव-चलित (श्रीपति पद्धति) भी अलग से छापते हैं, ताकि जो ग्रह भाव की सीमा पर हो, वह भी दिखे।
- उच्च, नीच, स्वगृही जैसी स्थितियाँ तालिका में केवल जानकारी के रूप में लिखी जाती हैं। ज्योतिष में इन्हें स्थिति के नाम कहते हैं; इनमें से कोई अकेला कुछ तय नहीं करता।
जन्म-समय क्यों इतना ज़रूरी है
लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, कभी इससे जल्दी, कभी देर से। इसलिए जन्म-समय में आधे घंटे का अंतर भी कभी-कभी लग्न बदल देता है, और साथ में हर भाव का ग्रह बदल जाता है। चंद्रमा लगभग सवा दो दिन एक राशि में रहता है, इसलिए चंद्र राशि पर समय का असर कम होता है।
ePandit हर कुंडली में यह भी बताता है कि जन्म कितने मिनट पहले या बाद होता तो लग्न बदल जाता। अगर यह अंतर छोटा हो, तो परिवार से समय एक बार और पक्का कर लेना अच्छा रहता है। समय पता न हो, तो हम चंद्र राशि और नक्षत्र से ही बात करते हैं।
कुंडली को कैसे पढ़ें: एक कारक, पूरा चित्र नहीं
परंपरा मानती है कि कुंडली पढ़ना कई बातों को साथ रखकर देखना है: लग्न और उसका स्वामी, चंद्रमा, भावों के स्वामी कहाँ बैठे हैं, चल रही दशा, और फिर नवांश जैसे वर्ग। किसी एक ग्रह या एक भाव से पूरे जीवन के बारे में निष्कर्ष निकालना परंपरा का तरीका नहीं है।
इसलिए ePandit की कुंडली में हर तालिका के साथ उसकी विधि लिखी होती है, और हम किसी एक स्थिति को डर की बात नहीं बनाते। अपनी मुफ़्त कुंडली बनाकर आप अपना लग्न, चंद्र राशि, नक्षत्र और दशा एक जगह देख सकते हैं।