षोडशवर्ग क्या है?

षोडशवर्ग जन्म-कुंडली के सोलह विभाजन हैं, D1 से D60 तक। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र हर वर्ग को जीवन के किसी विषय से जोड़ता है। ऊँचे वर्ग जन्म-समय के बहुत छोटे अंतर से बदल जाते हैं, इसलिए ePandit हर वर्ग के साथ बताता है कि उसका लग्न कितने मिनट में बदल सकता है।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

आपकी कुंडली में

वर्गों की संख्या
16
BPHS ch. 6
वर्ग
D1, D2, D3, D4, D7, D9, D10, D12, D16, D20, D24, D27, D30, D40, D45, D60
ePandit की विधि
पाराशर विधि, लाहिड़ी अयनांश
समय-संवेदनशीलता
हर वर्ग-लग्न के साथ बदलने के मिनट (पहले / बाद)

परिचय

"षोडश" का अर्थ है सोलह। जन्म-कुंडली (D1) में हर राशि 30 अंश की एक इकाई है। वर्ग बनाने के लिए हर राशि को बराबर (या तय) हिस्सों में बाँटते हैं, और देखते हैं कि ग्रह किस हिस्से में है। हर हिस्सा किसी राशि को मिलता है, और इस तरह एक नया चार्ट बनता है। जैसे नवांश (D9) में हर राशि के नौ हिस्से होते हैं, हर एक 3°20′ का।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (अध्याय 6) सोलह वर्ग, उनकी गणना और हर वर्ग का विषय बताता है; अध्याय 7 वर्गों के समूह और विंशोपक बल की बात करता है।

सोलह वर्ग और उनके विषय

वर्ग नाम परंपरा (BPHS) इसे किससे जोड़ती है लग्न औसतन कितने मिनट में बदलता है
D1 राशि शरीर और पूरा जीवन (मूल कुंडली) ~120
D2 होरा धन और संपत्ति ~60
D3 द्रेष्काण भाई-बहन और उनसे सुख ~40
D4 चतुर्थांश भाग्य, घर और स्थायी संपत्ति ~30
D7 सप्तांश संतान और आगे की पीढ़ी ~17
D9 नवांश जीवनसाथी, और हर ग्रह की दूसरी नज़र ~13
D10 दशांश काम, पद और समाज में भूमिका ~12
D12 द्वादशांश माता-पिता ~10
D16 षोडशांश वाहन और सुख-सुविधाएँ ~7.5
D20 विंशांश उपासना और आध्यात्मिक साधना ~6
D24 चतुर्विंशांश विद्या और शिक्षा ~5
D27 भांश ग्रहों का सामान्य सामर्थ्य ~4.5
D30 त्रिंशांश जीवन की चुनौतियों का विचार ~20–30 (पाँच असमान भाग)
D40 खवेदांश जीवन के सामान्य अच्छे-बुरे अनुभव; बाद की परंपरा में माता की ओर की विरासत ~3
D45 अक्षवेदांश सभी विषयों का सामान्य विचार; बाद की परंपरा में पिता की ओर की विरासत ~2.7
D60 षष्ट्यंश सभी विषयों का सूक्ष्म विचार ~2

मिनट केवल मोटा औसत हैं (लगभग 2 घंटे ÷ हिस्सों की संख्या)। असली अंतर लग्न की राशि, जन्म-स्थान और लग्न-अंश पर निर्भर है। D30 में हर राशि के केवल पाँच असमान हिस्से (5° से 8°) होते हैं, इसलिए उसका अंतर 20–30 मिनट है।

वर्गों को कैसे पढ़ा जाता है

  • D1 नींव है। हर वर्ग D1 से ही निकलता है, और परंपरा पहले D1 पढ़ती है।
  • वर्ग दूसरी नज़र है। किसी विषय के लिए उससे जुड़ा वर्ग देखा जाता है, जैसे साथी के लिए नवांश, काम के लिए दशांश। परंपरा मानती है कि वर्ग D1 की बात की पुष्टि करता है या उसमें रंग जोड़ता है।
  • एक वर्ग में किसी ग्रह की स्थिति अकेले कुछ तय नहीं करती। उदाहरण के लिए, किसी वर्ग में ग्रह का नीच राशि में होना केवल एक स्थिति का नाम है; उसे "समस्या" के रूप में नहीं पढ़ा जाता।
  • षड्बल के सप्तवर्गज बल में इनमें से सात वर्ग (D1, D2, D3, D7, D9, D12, D30) गिने जाते हैं।

ऊँचे वर्ग और जन्म-समय

लग्न लगभग दो घंटे में एक राशि पार करता है। D9 में हर राशि के नौ हिस्से हैं, तो D9 का लग्न औसतन लगभग 13 मिनट में बदल जाता है। D60 में साठ हिस्से हैं, इसलिए उसका लग्न लगभग 2 मिनट में बदल सकता है।

अस्पताल की घड़ी, याद से बताया गया समय, या "लगभग सुबह 7 बजे" जैसे समय में इतना अंतर आसानी से होता है। इसलिए ePandit हर वर्ग के साथ लिखता है कि उसका लग्न जन्म के कितने मिनट पहले या बाद होने पर बदल जाता।

  • अगर यह अंतर कुछ ही मिनट का है, तो उस वर्ग के लग्न और भावों पर ज़्यादा भरोसा न करें।
  • ग्रहों की वर्ग-राशियाँ लग्न से धीरे बदलती हैं, पर चंद्रमा ऊँचे वर्गों में जल्दी बदल सकता है।
  • जन्म-समय पता न हो, तो ऊँचे वर्ग छोड़ देना ही ठीक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सबसे ज़रूरी वर्ग कौन-सा है?

D1 के बाद परंपरा नवांश (D9) को सबसे ज़्यादा महत्व देती है। बाकी वर्ग विषय के अनुसार देखे जाते हैं।

D60 को इतना महत्व क्यों दिया जाता है, और फिर भी उस पर भरोसा क्यों कम?

BPHS सूक्ष्म विचार के लिए षष्ट्यंश को महत्व देता है, पर उसका लग्न लगभग 2 मिनट में बदल सकता है। बहुत सटीक जन्म-समय के बिना उसे पढ़ना ठीक नहीं।

क्या वर्ग में ग्रह नीच हो तो चिंता की बात है?

नहीं। यह एक स्थिति का नाम है। परंपरा D1, दशा और पूरा चित्र साथ देखती है; किसी एक वर्ग की एक स्थिति अकेले कुछ तय नहीं करती।

दूसरे software में वर्ग अलग क्यों दिखता है?

कुछ वर्गों (जैसे D2 होरा) की एक से ज़्यादा विधियाँ हैं, और अयनांश का छोटा अंतर भी सीमा पर बैठे ग्रह को खिसका सकता है। ePandit पाराशर विधि और लाहिड़ी अयनांश लेता है।

क्या D6 या D8 भी षोडशवर्ग में है?

नहीं। BPHS के सोलह वर्ग हैं: D1, D2, D3, D4, D7, D9, D10, D12, D16, D20, D24, D27, D30, D40, D45, D60।

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आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13