षड्बल क्या है और इसके अंक कैसे पढ़ें?

षड्बल ग्रह के बल का एक गणित-आधारित माप है, जो छह हिस्सों को जोड़कर बनता है। ePandit इसे बी. वी. रमन की पुस्तक Graha and Bhava Balas की विधि से निकालता है और हर ग्रह का कुल, परंपरा का आवश्यक न्यूनतम और दोनों का अनुपात दिखाता है। यह अंक अकेले कोई फल तय नहीं करता।

स्रोत: B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, षड्बल के सभी घटक, आवश्यक न्यूनतम (art. 122) और हल किया गया उदाहरण

आपकी कुंडली में

विधि
बी. वी. रमन, Graha and Bhava Balas (श्रीपति)
इकाई
60 षष्ट्यंश (विरूप) = 1 रूप
आवश्यक न्यूनतम
सूर्य 300 · चंद्र 360 · मंगल 300 · बुध 420 · गुरु (बृहस्पति) 390 · शुक्र 330 · शनि 300
Raman, art. 122
अनुपात
कुल ÷ आवश्यक न्यूनतम
नैसर्गिक बल
सूर्य 60 · चंद्र 51.43 · शुक्र 42.86 · गुरु 34.29 · बुध 25.71 · मंगल 17.14 · शनि 8.57

परिचय

"षड्" का अर्थ है छह। षड्बल में हर ग्रह (सूर्य से शनि तक) के छह अलग बल गिने जाते हैं और फिर जोड़े जाते हैं। इकाई षष्ट्यंश (विरूप) है; 60 षष्ट्यंश = 1 रूप।

ePandit की गणना बी. वी. रमन, Graha and Bhava Balas की विधि पर है, जो श्रीपति की परंपरा मानती है और भारत के कई षड्बल software का आधार है। हमने पुस्तक के अपने हल किए गए उदाहरण से हर घटक मिलाकर अपनी गणना जाँची है। राहु और केतु का षड्बल नहीं निकाला जाता।

छह बल और उनके हिस्से

  1. स्थान बल (ग्रह कहाँ बैठा है): उच्च बल (नीच बिंदु से ग्रह की दूरी), सप्तवर्गज बल (D1, D2, D3, D7, D9, D12, D30 में राशि और मैत्री), ओज-युग्म बल (विषम-सम राशि और नवांश), केंद्र बल (केंद्र, पणफर या आपोक्लिम), द्रेष्काण बल।
  2. दिग् बल (दिशा): सूर्य और मंगल दसवें भाव में, गुरु और बुध लग्न में, चंद्र और शुक्र चौथे में, शनि सातवें में पूरा दिग् बल पाते हैं। रमन की विधि में दूरी भाव-मध्य से नापी जाती है।
  3. काल बल (समय): नतोन्नत (दिन या रात का जन्म), पक्ष (चंद्रमा की कला), त्रिभाग (दिन-रात के तिहाई भाग), वर्ष, मास, वार और होरा के स्वामी, अयन बल (ग्रह की क्रांति), और दो ग्रहों के बहुत पास होने पर युद्ध बल।
  4. चेष्टा बल (गति): मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की गति से। रमन के उदाहरण की तरह सूर्य और चंद्र का चेष्टा बल कुल में नहीं जोड़ा जाता; तालिका में वहाँ "–" लिखा होता है।
  5. नैसर्गिक बल (स्वाभाविक, हर कुंडली में एक-सा): सूर्य 60, चंद्र 51.43, शुक्र 42.86, गुरु 34.29, बुध 25.71, मंगल 17.14, शनि 8.57।
  6. दृक् बल (दृष्टि): सौम्य ग्रहों की दृष्टि का जोड़ घटा क्रूर ग्रहों की दृष्टि का जोड़, फिर चार से भाग। इसलिए यह कभी-कभी ऋण (minus) में भी आता है।

आवश्यक न्यूनतम और अनुपात

रमन हर ग्रह के लिए एक आवश्यक न्यूनतम बताते हैं:

ग्रह आवश्यक न्यूनतम (षष्ट्यंश) रूप
सूर्य 300 5
चंद्र 360 6
मंगल 300 5
बुध 420 7
गुरु 390 6.5
शुक्र 330 5.5
शनि 300 5

ePandit हर ग्रह का अनुपात दिखाता है: कुल षड्बल ÷ आवश्यक न्यूनतम।

  • अनुपात 1 से ऊपर हो तो इसका अर्थ है कि ग्रह के पास परंपरा के न्यूनतम से ज़्यादा बल है, यानी अपने विषयों में काम करने की ज़्यादा गुंजाइश।
  • अनुपात 1 से नीचे हो तो यह कुछ बुरा नहीं कहता। इसका इतना ही अर्थ है कि उस विषय में कुंडली के दूसरे कारक, जैसे दशा, भाव-स्वामी या दूसरा ग्रह, आगे रहते हैं।
  • हम किसी ग्रह पर इन अंकों से कोई ठप्पा नहीं लगाते, और इनसे कोई उपाय नहीं निकलता।

दूसरे software से अंतर क्यों दिखता है

जगन्नाथ होरा (JHora) जैसे software में षड्बल कुछ अलग आ सकता है। इसका कारण गणना की गलती नहीं, विधि का अंतर है:

  • दिग् बल: JHora दूरी लग्न ± 90° से नापता है, रमन भाव-मध्य से। अंतर कुछ षष्ट्यंश तक।
  • नतोन्नत बल: JHora कोण से गिनता है, रमन आधी रात से समय से।
  • सप्तवर्गज बल: JHora का नियम अलग है; हमारा नियम रमन के उदाहरण को ठीक-ठीक दोहराता है।
  • दृक् बल: JHora BPHS के श्लोकों वाले दृष्टि-वक्र लेता है, रमन विशेष दृष्टियाँ अलग से जोड़ते हैं।
  • अयन बल: क्रांति निकालने का तरीका अलग।

चेष्टा, पक्ष, त्रिभाग, वार, होरा, वर्ष, मास और नैसर्गिक बल दोनों में लगभग एक जैसे आते हैं, और दोनों सूर्य-चंद्र का चेष्टा बल कुल में नहीं जोड़ते।

पुस्तक के उदाहरण में कुछ जगह छपाई या जोड़ की छोटी भूलें हैं; हमारी गणना उनका सही जोड़ लेती है।

ePandit षड्बल का उपयोग कैसे करता है

  • षड्बल पूरी तरह जन्म-समय पर टिका है। समय पता न हो तो हम इसे नहीं दिखाते।
  • कुंडली के "तकनीकी" हिस्से में छहों बल, कुल (षष्ट्यंश और रूप), आवश्यक न्यूनतम और अनुपात केवल अंकों में मिलते हैं।
  • पढ़ाई में यह केवल यह तय करने में मदद करता है कि किस ग्रह की बात पहले हो। कुंडली, दशा और गोचर की पढ़ाई इसके बिना भी पूरी रहती है।

परंपरा मानती है कि एक ग्रह का अंक पूरा चित्र नहीं है; पूरी कुंडली साथ देखी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरे किसी ग्रह का अनुपात 1 से कम है, क्या यह चिंता की बात है?

नहीं। इसका अर्थ केवल इतना है कि उस विषय में कुंडली के दूसरे कारक आगे रहते हैं। कोई फल या घटना इससे तय नहीं होती।

षष्ट्यंश और रूप क्या हैं?

षड्बल की इकाइयाँ। 60 षष्ट्यंश (विरूप) = 1 रूप। जैसे 420 षष्ट्यंश = 7 रूप।

सूर्य और चंद्र का चेष्टा बल "–" क्यों है?

रमन की विधि में सूर्य और चंद्र का चेष्टा बल कुल में नहीं जोड़ा जाता, क्योंकि उनका गति-बल दूसरे हिस्सों (अयन और पक्ष) में आ जाता है। JHora भी इसे नहीं जोड़ता।

राहु-केतु का षड्बल क्यों नहीं है?

परंपरा की षड्बल पद्धति सात ग्रहों के लिए है। राहु-केतु चंद्रमा के पात-बिंदु हैं, इसलिए उनका षड्बल नहीं निकाला जाता।

क्या षड्बल से कोई उपाय तय होता है?

नहीं। यह गणित का एक माप है। इससे न रत्न, न पूजा, न कोई और उपाय निकलता है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas · षड्बल के सभी घटक, आवश्यक न्यूनतम (art. 122) और हल किया गया उदाहरण
  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · षड्बल के अध्याय (तुलना के लिए)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13