बुध: बुद्धि और बातचीत का ग्रह

बुध को परंपरा बुद्धि, वाणी, हिसाब-किताब और सीखने से जोड़ती है। इस पेज पर उसकी राशियाँ, षड्बल और 17 वर्ष की महादशा सरल भाषा में हैं।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), ch. 3: planetary dignities and natural relationships

आपकी कुंडली में

अपनी राशि (स्वगृह)
मिथुन, कन्या
BPHS ch. 3
उच्च
कन्या 15°
BPHS ch. 3
नीच
मीन 15°
BPHS ch. 3
मूलत्रिकोण
कन्या 15–20°
BPHS ch. 3; Raman
नैसर्गिक मित्र
सूर्य, शुक्र
BPHS ch. 3
नैसर्गिक सम
गुरु (बृहस्पति), मंगल, शनि
BPHS ch. 3

परिचय

बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है, इसलिए कुंडली में यह सूर्य से कभी बहुत दूर नहीं जाता; ज़्यादातर सूर्य वाली राशि में या उसके आस-पास मिलता है। यह साल में कई बार वक्री होता है।

बुध की दो राशियाँ हैं: मिथुन और कन्या। ज्योतिष में बुध को "राजकुमार" कहा गया है: जिज्ञासु, हँसमुख और सीखने को तैयार। परंपरा मानती है कि बुध जिन ग्रहों के साथ बैठता है, उनका रंग जल्दी ले लेता है।

क्या दर्शाता है

परंपरा मानती है कि बुध इन विषयों का कारक है:

  • बुद्धि, तर्क और जल्दी समझने की क्षमता
  • वाणी, लेखन और बातचीत
  • हिसाब-किताब, व्यापार और लेन-देन
  • पढ़ाई, भाषा और हास्य

काम के संदर्भ में परंपरा बुध को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें लिखना, बोलना, गिनती, व्यापार, पढ़ाना या जानकारी का लेन-देन हो।

ये झुकाव हैं, किसी व्यक्ति के बारे में तय बात नहीं। बुध का भाव, राशि, साथ के ग्रह और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।

उच्च, नीच, स्वगृही: सीधी भाषा में

बुध की अपनी राशियाँ मिथुन और कन्या हैं। उच्च स्थिति कन्या 15° पर मानी जाती है और नीच स्थिति मीन 15° पर, यानी ठीक सामने की राशि में उसी अंश पर। कन्या में तीनों बातें मिलती हैं: 15° उच्च बिंदु है, 15° से 20° मूलत्रिकोण, और यह राशि बुध की अपनी भी है।

नैसर्गिक संबंध में बुध के मित्र सूर्य और शुक्र हैं; सम गुरु, मंगल और शनि हैं; और पुराने वर्गीकरण में शत्रु चंद्र गिने जाते हैं। ये शब्द पुराने हैं; षड्बल में इनका काम बस इतना है कि किस राशि में ग्रह को स्थान बल के कितने अंक मिलें। रमन की विधि जन्म-कुंडली का तात्कालिक संबंध भी जोड़ती है।

उच्च, नीच, स्वगृही और मूलत्रिकोण स्थिति के नाम हैं, किसी के भविष्य का फ़ैसला नहीं। नीच स्थिति भी अकेले कुछ तय नहीं करती; भाव, दृष्टि, दशा, नवांश और पूरी कुंडली मिलकर ही बात कहते हैं।

षड्बल और यह ग्रह: सीधी भाषा में

षड्बल यानी छह तरह के बल का जोड़: स्थान, दिक्, काल, चेष्टा, नैसर्गिक और दृक् बल। ePandit इसे बी. वी. रमन की पुस्तक Graha and Bhava Balas की विधि से गिनता है। इकाई विरूप है; 60 विरूप मिलकर 1 रूप बनता है।

रमन ने हर ग्रह के लिए एक पारंपरिक न्यूनतम योग दिया है। बुध के लिए यह 420 विरूप (7 रूप) है। हम आपको सीधा एक अनुपात दिखाते हैं:

अनुपात = बुध का कुल षड्बल ÷ 420

  • अनुपात 1 से ऊपर हो, तो मतलब बस इतना है कि बुध के पास पारंपरिक न्यूनतम से ज़्यादा बल है, यानी अपने विषयों में काम करने की खुली जगह।
  • अनुपात 1 से नीचे हो, तो इसमें कुछ बुरा नहीं है। इसका अर्थ है कि उस कुंडली में दूसरे कारक आगे रहते हैं: कोई और ग्रह, चल रही दशा, या भाव।

बुध का नैसर्गिक बल 25.71 विरूप है; यह हर कुंडली में एक-सा रहता है। पूरा दिग्बल बुध को इस स्थान पर मिलता है: लग्न (पूर्व)। बुध का न्यूनतम (420) सात ग्रहों में सबसे ऊँचा है। इसलिए दो ग्रहों के कुल अंक आपस में न मिलाइए; तुलना अनुपात से कीजिए। रमन की विधि में बुध का स्वभाव इस पर टिका है कि वह किन ग्रहों के साथ एक राशि में बैठा है।

अलग-अलग software कुछ अंतर दिखा सकते हैं; हम रमन की विधि पर चलते हैं। षड्बल गणित पर टिका एक माप है; यह अकेले कोई फल तय नहीं करता।

महादशा

विंशोत्तरी दशा में बुध की महादशा 17 वर्ष की होती है। परंपरा मानती है कि इस समय पढ़ाई, कौशल, लिखना-बोलना, व्यापार और नए संपर्क जैसे विषय आगे आते हैं।

पर असल रंग इस पर टिका है कि बुध आपकी कुंडली में कहाँ है, किन भावों का स्वामी है, किसके साथ है और कौन-सी अंतर्दशा चल रही है। हर महादशा में नौ अंतर्दशाएँ आती हैं।

आस्था

परंपरा में बुधवार बुध का दिन माना जाता है। जो चाहें, सुबह शांत मन से बुध का नाम-मंत्र 11 या 108 बार जप सकते हैं:

ॐ बुधाय नमः (ग्रह नाम-मंत्र: परंपरा)

बुधवार को किसी बच्चे को कॉपी या किताब दे सकते हैं। (लोक मान्यता, वैकल्पिक)

यह श्रद्धा की बात है, कोई शर्त नहीं। कोई महँगा उपाय ज़रूरी नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बुध वक्री हो तो क्या होता है?

वक्री का मतलब है कि धरती से देखने पर बुध उल्टा चलता दिखता है। परंपरा इसे पुराने कामों पर लौटने और दोबारा सोचने से जोड़ती है; यह अकेले कोई फल तय नहीं करता।

बुध का न्यूनतम षड्बल सबसे ज़्यादा क्यों है?

रमन ने हर ग्रह का न्यूनतम अलग रखा है; बुध के लिए 420 विरूप। इसीलिए हम कुल अंक नहीं, अनुपात दिखाते हैं, ताकि हर ग्रह अपनी कसौटी पर देखा जाए।

बुध का षड्बल अनुपात 1 से कम है। क्या चिंता की बात है?

नहीं। 1 से कम का अर्थ बस इतना है कि आपकी कुंडली में दूसरे कारक आगे रहते हैं: कोई और ग्रह, चल रही दशा या कोई भाव। षड्बल अकेले कोई फल तय नहीं करता।

बुध की महादशा कितने साल की होती है?

विंशोत्तरी में 17 वर्ष। जन्म-नक्षत्र आश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती हो, तो जीवन की पहली दशा बुध की होती है।

बुध नीच हो तो क्या पढ़ाई में दिक्कत होगी?

नहीं, ऐसा तय नहीं है। ज्योतिष में इसे नीच स्थिति कहते हैं; इसका अर्थ अकेले कुछ तय नहीं करता। पूरी कुंडली और दशा मिलकर बात कहते हैं।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · ch. 3: planetary dignities and natural relationships
  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas · shadbala method; naisargika bala; required minimum (art. 122)
  • B. V. Raman, A Manual of Hindu Astrology · Vimshottari dasha periods and nakshatra lords

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13