परिचय
बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है, इसलिए कुंडली में यह सूर्य से कभी बहुत दूर नहीं जाता; ज़्यादातर सूर्य वाली राशि में या उसके आस-पास मिलता है। यह साल में कई बार वक्री होता है।
बुध की दो राशियाँ हैं: मिथुन और कन्या। ज्योतिष में बुध को "राजकुमार" कहा गया है: जिज्ञासु, हँसमुख और सीखने को तैयार। परंपरा मानती है कि बुध जिन ग्रहों के साथ बैठता है, उनका रंग जल्दी ले लेता है।
क्या दर्शाता है
परंपरा मानती है कि बुध इन विषयों का कारक है:
- बुद्धि, तर्क और जल्दी समझने की क्षमता
- वाणी, लेखन और बातचीत
- हिसाब-किताब, व्यापार और लेन-देन
- पढ़ाई, भाषा और हास्य
काम के संदर्भ में परंपरा बुध को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें लिखना, बोलना, गिनती, व्यापार, पढ़ाना या जानकारी का लेन-देन हो।
ये झुकाव हैं, किसी व्यक्ति के बारे में तय बात नहीं। बुध का भाव, राशि, साथ के ग्रह और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।
उच्च, नीच, स्वगृही: सीधी भाषा में
बुध की अपनी राशियाँ मिथुन और कन्या हैं। उच्च स्थिति कन्या 15° पर मानी जाती है और नीच स्थिति मीन 15° पर, यानी ठीक सामने की राशि में उसी अंश पर। कन्या में तीनों बातें मिलती हैं: 15° उच्च बिंदु है, 15° से 20° मूलत्रिकोण, और यह राशि बुध की अपनी भी है।
नैसर्गिक संबंध में बुध के मित्र सूर्य और शुक्र हैं; सम गुरु, मंगल और शनि हैं; और पुराने वर्गीकरण में शत्रु चंद्र गिने जाते हैं। ये शब्द पुराने हैं; षड्बल में इनका काम बस इतना है कि किस राशि में ग्रह को स्थान बल के कितने अंक मिलें। रमन की विधि जन्म-कुंडली का तात्कालिक संबंध भी जोड़ती है।
उच्च, नीच, स्वगृही और मूलत्रिकोण स्थिति के नाम हैं, किसी के भविष्य का फ़ैसला नहीं। नीच स्थिति भी अकेले कुछ तय नहीं करती; भाव, दृष्टि, दशा, नवांश और पूरी कुंडली मिलकर ही बात कहते हैं।
षड्बल और यह ग्रह: सीधी भाषा में
षड्बल यानी छह तरह के बल का जोड़: स्थान, दिक्, काल, चेष्टा, नैसर्गिक और दृक् बल। ePandit इसे बी. वी. रमन की पुस्तक Graha and Bhava Balas की विधि से गिनता है। इकाई विरूप है; 60 विरूप मिलकर 1 रूप बनता है।
रमन ने हर ग्रह के लिए एक पारंपरिक न्यूनतम योग दिया है। बुध के लिए यह 420 विरूप (7 रूप) है। हम आपको सीधा एक अनुपात दिखाते हैं:
अनुपात = बुध का कुल षड्बल ÷ 420
- अनुपात 1 से ऊपर हो, तो मतलब बस इतना है कि बुध के पास पारंपरिक न्यूनतम से ज़्यादा बल है, यानी अपने विषयों में काम करने की खुली जगह।
- अनुपात 1 से नीचे हो, तो इसमें कुछ बुरा नहीं है। इसका अर्थ है कि उस कुंडली में दूसरे कारक आगे रहते हैं: कोई और ग्रह, चल रही दशा, या भाव।
बुध का नैसर्गिक बल 25.71 विरूप है; यह हर कुंडली में एक-सा रहता है। पूरा दिग्बल बुध को इस स्थान पर मिलता है: लग्न (पूर्व)। बुध का न्यूनतम (420) सात ग्रहों में सबसे ऊँचा है। इसलिए दो ग्रहों के कुल अंक आपस में न मिलाइए; तुलना अनुपात से कीजिए। रमन की विधि में बुध का स्वभाव इस पर टिका है कि वह किन ग्रहों के साथ एक राशि में बैठा है।
अलग-अलग software कुछ अंतर दिखा सकते हैं; हम रमन की विधि पर चलते हैं। षड्बल गणित पर टिका एक माप है; यह अकेले कोई फल तय नहीं करता।
महादशा
विंशोत्तरी दशा में बुध की महादशा 17 वर्ष की होती है। परंपरा मानती है कि इस समय पढ़ाई, कौशल, लिखना-बोलना, व्यापार और नए संपर्क जैसे विषय आगे आते हैं।
पर असल रंग इस पर टिका है कि बुध आपकी कुंडली में कहाँ है, किन भावों का स्वामी है, किसके साथ है और कौन-सी अंतर्दशा चल रही है। हर महादशा में नौ अंतर्दशाएँ आती हैं।
आस्था
परंपरा में बुधवार बुध का दिन माना जाता है। जो चाहें, सुबह शांत मन से बुध का नाम-मंत्र 11 या 108 बार जप सकते हैं:
ॐ बुधाय नमः (ग्रह नाम-मंत्र: परंपरा)
बुधवार को किसी बच्चे को कॉपी या किताब दे सकते हैं। (लोक मान्यता, वैकल्पिक)
यह श्रद्धा की बात है, कोई शर्त नहीं। कोई महँगा उपाय ज़रूरी नहीं है।