षोडशांश (D16): वाहन और सुख-सुविधा का वर्ग

षोडशांश (D16), जिसे कलांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°52′30″ के सोलह भागों में बाँटता है। परंपरा इसे वाहन, सुख-सुविधा और मन की प्रसन्नता से जोड़ती है।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

आपकी कुंडली में

विभाजन
D16 · हर राशि के 16 भाग
एक भाग
1°52′30″
गणना का नियम (पराशर)
चर राशि में गिनती मेष से, स्थिर राशि में सिंह से, द्विस्वभाव राशि में धनु से।
BPHS ch. 6
परंपरा किस विषय से जोड़ती है
वाहन, सुख-सुविधा, प्रसन्नता
BPHS ch. 6–7
जन्म-समय की संवेदनशीलता (औसत)
लगभग 7–8 मिनट (लग्न के लिए)

यह क्या है

षोडशांश में हर राशि के सोलह बराबर हिस्से होते हैं, हर हिस्सा 1 अंश 52 कला 30 विकला का। यहाँ गिनती की शुरुआत राशि के स्वभाव पर टिकती है: चर (मेष, कर्क, तुला, मकर), स्थिर (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) या द्विस्वभाव (मिथुन, कन्या, धनु, मीन)।

कैसे निकाला जाता है

नियम: चर राशि में पहला हिस्सा मेष का, स्थिर राशि में सिंह का, द्विस्वभाव राशि में धनु का; फिर आगे क्रम से।

उदाहरण: कोई ग्रह मेष के 17° पर है। 17 ÷ 1.875 ≈ 9.07, यानी दसवाँ हिस्सा। मेष चर राशि है, इसलिए मेष से दसवीं राशि: मकर। D16 में यह ग्रह मकर में होगा।

परंपरा इसमें क्या देखती है

पराशर षोडशांश को वाहनों से मिलने वाले सुख-दुख से जोड़ते हैं। आज की भाषा में परंपरा इसे सुख-सुविधा, आराम और मन की प्रसन्नता का वर्ग मानती है। इसमें चौथे भाव का स्वामी और शुक्र, जिसे सुविधाओं का कारक माना जाता है, देखे जाते हैं।

जन्म-समय कितना मायने रखता है

लग्न औसतन हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश आगे बढ़ता है; कुछ राशियाँ जल्दी उदय होती हैं, कुछ धीरे। D16 का एक भाग 1°52′30″ का है, इसलिए जन्म-समय में लगभग 7–8 मिनट का अंतर D16 का लग्न बदल सकता है। चंद्रमा एक भाग लगभग साढ़े तीन घंटे में पार करता है। ePandit आपकी कुंडली में हर वर्ग के साथ यह भी दिखाता है कि जन्म-समय कितने मिनट बदलने पर उस वर्ग का लग्न बदलेगा। D16 और उससे ऊँचे वर्ग पक्के जन्म-समय के बिना भरोसे लायक नहीं रहते।

इसे शांति से कैसे पढ़ें

D16 को एक दूसरी नज़र की तरह पढ़िए, फ़ैसले की तरह नहीं। पहले मुख्य कुंडली (D1) में चौथे भाव और उसके स्वामी को देखा जाता है, फिर चल रही दशा को। D16 बस यह देखने में मदद करता है कि वही बात यहाँ भी दिखती है या नहीं। किसी ग्रह का इस वर्ग में किसी ख़ास राशि में होना अकेले कुछ तय नहीं करता। सुख अक्सर छोटी चीज़ों और रिश्तों से आता है; यह वर्ग उसे मापता नहीं, बस परंपरा की एक भाषा में उसकी बात करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या D16 से गाड़ी ख़रीदने का समय निकलता है?

नहीं। समय दशा और गोचर से देखा जाता है। वाहन जैसे काम के लिए लोग मुहूर्त भी देखते हैं, पर वह अलग विषय है।

D16 और D4 में क्या अंतर है?

दोनों का संबंध चौथे भाव के विषयों से है। परंपरा D4 को घर, संपत्ति और भाग्य से, और D16 को वाहन और सुख-सुविधा से जोड़ती है।

क्या केवल D16 देखकर कोई बात तय की जा सकती है?

नहीं। यह बारीक वर्ग है और केवल मुख्य कुंडली व दशा के साथ पढ़ा जाता है।

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आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13