षष्ट्यंश (D60): सबसे बारीक वर्ग

षष्ट्यंश (D60) हर राशि को आधे-आधे अंश के साठ भागों में बाँटता है। परंपरा इसे सबसे बारीक वर्ग मानती है और पूर्व कर्म से जोड़ती है; यह इतना संवेदनशील है कि दो मिनट का अंतर भी इसका लग्न बदल देता है।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

आपकी कुंडली में

विभाजन
D60 · हर राशि के 60 भाग
एक भाग
30′ (आधा अंश)
गणना का नियम (पराशर)
गिनती उसी राशि से शुरू होकर क्रम से (60 भागों में राशिचक्र पाँच बार घूमता है)।
BPHS ch. 6
परंपरा किस विषय से जोड़ती है
पूर्व कर्म; परंपरा इसे सबसे बारीक वर्ग मानती है
BPHS ch. 6–7
जन्म-समय की संवेदनशीलता (औसत)
लगभग 2 मिनट (लग्न के लिए)

यह क्या है

षष्ट्यंश में हर राशि के साठ बराबर हिस्से होते हैं, हर हिस्सा 30 कला, यानी आधे अंश का। पराशर के सोलह वर्गों में यह सबसे बारीक है। विंशोपक बल की गणना में, जहाँ सोलह वर्गों को अलग-अलग भार मिलता है, पराशर D60 को सबसे बड़ा भार देते हैं।

कैसे निकाला जाता है

नियम: गिनती उसी राशि से शुरू होकर क्रम से चलती है; 60 हिस्सों में राशिचक्र पाँच बार घूमता है।

उदाहरण: कोई ग्रह मेष के 17°15′ पर है। 17.25 ÷ 0.5 = 34.5, यानी पैंतीसवाँ हिस्सा। मेष से पैंतीसवीं राशि: कुंभ (दो बार बारह पूरी कर, फिर ग्यारहवीं राशि)। D60 में यह ग्रह कुंभ में होगा। अगर यही ग्रह 17°35′ पर होता, यानी केवल 20 कला आगे, तो छत्तीसवें हिस्से में, मीन में चला जाता।

परंपरा इसमें क्या देखती है

परंपरा मानती है कि षष्ट्यंश पिछले कर्मों की छाप की झलक देता है, यानी वे प्रवृत्तियाँ जो व्यक्ति साथ लेकर आता है। पराशर हर भाग को एक नाम भी देते हैं। ePandit इन नामों से कोई अच्छा-बुरा फ़ैसला नहीं निकालता। कर्म की परंपरा का सीधा अर्थ यह भी है कि आज के कर्म आगे की राह बनाते हैं; D60 डराने के लिए नहीं, समझने के लिए है।

जन्म-समय कितना मायने रखता है

लग्न औसतन हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश आगे बढ़ता है; कुछ राशियाँ जल्दी उदय होती हैं, कुछ धीरे। D60 का एक भाग 30′ का है, इसलिए जन्म-समय में लगभग 2 मिनट का अंतर D60 का लग्न बदल सकता है। चंद्रमा भी लगभग एक घंटे में एक भाग पार कर लेता है, और लग्न तो दो मिनट में। ePandit आपकी कुंडली में हर वर्ग के साथ यह भी दिखाता है कि जन्म-समय कितने मिनट बदलने पर उस वर्ग का लग्न बदलेगा। अस्पताल का लिखा समय भी अक्सर एक-दो मिनट आगे-पीछे होता है। इसलिए बिना पक्के समय के D60 के लग्न को कोई महत्व न दें; कुछ ज्योतिषी इसी वर्ग से जन्म-समय का शोधन करते हैं।

इसे शांति से कैसे पढ़ें

D60 को एक दूसरी नज़र की तरह पढ़िए, फ़ैसले की तरह नहीं। पहले पूरी मुख्य कुंडली (D1) देखी जाती है, फिर चल रही दशा। D60 बस यह देखने में मदद करता है कि वही बात यहाँ भी दिखती है या नहीं। किसी ग्रह का इस वर्ग में किसी ख़ास राशि में होना अकेले कुछ तय नहीं करता। D60 का महत्व परंपरा में बड़ा है, पर अनिश्चित जन्म-समय के साथ यह सबसे कम भरोसे लायक वर्ग भी है। इसलिए इसे सबसे आख़िर में और सबसे हल्के से पढ़िए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दो मिनट में D60 कैसे बदल जाता है?

लग्न औसतन 4 मिनट में 1 अंश चलता है, और D60 का एक भाग केवल आधा अंश है। इसलिए लगभग 2 मिनट में लग्न अगले भाग में चला जाता है।

क्या D60 बताता है कि पिछले जन्म में क्या हुआ?

नहीं। परंपरा इसे पिछले कर्मों की प्रवृत्तियों की एक झलक मानती है; ePandit इससे कोई कहानी या फ़ैसला नहीं बनाता।

मेरा जन्म-समय अंदाज़े से है, तो D60 का क्या करूँ?

उसे छोड़ दीजिए। मुख्य कुंडली, चंद्र राशि, नक्षत्र और दशा से ही पूरी बात हो सकती है।

क्या केवल D60 देखकर कोई बात तय की जा सकती है?

नहीं। D60 हमेशा मुख्य कुंडली (D1) और दशा के बाद, सबसे हल्की परत की तरह पढ़ा जाता है।

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आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13