भांश (D27): सामर्थ्य और स्वभाव का वर्ग

भांश (D27), जिसे सप्तविंशांश या नक्षत्रांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°6′40″ के सत्ताईस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे व्यक्ति के सामान्य सामर्थ्य और स्वभाव से जोड़ती है।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

आपकी कुंडली में

विभाजन
D27 · हर राशि के 27 भाग
एक भाग
1°6′40″
गणना का नियम (पराशर)
अग्नि राशि में गिनती मेष से, पृथ्वी राशि में कर्क से, वायु राशि में तुला से, जल राशि में मकर से।
BPHS ch. 6
परंपरा किस विषय से जोड़ती है
सामान्य सामर्थ्य और स्वभाव
BPHS ch. 6–7
जन्म-समय की संवेदनशीलता (औसत)
लगभग 4–5 मिनट (लग्न के लिए)

यह क्या है

भांश में हर राशि के सत्ताईस बराबर हिस्से होते हैं, हर हिस्सा 1 अंश 6 कला 40 विकला का। 'भ' का अर्थ नक्षत्र है, और 27 की संख्या 27 नक्षत्रों की याद दिलाती है; इसीलिए इसे नक्षत्रांश भी कहते हैं। यहाँ गिनती राशि के तत्व से शुरू होती है।

कैसे निकाला जाता है

नियम: अग्नि राशि (मेष, सिंह, धनु) में पहला हिस्सा मेष का, पृथ्वी राशि (वृषभ, कन्या, मकर) में कर्क का, वायु राशि (मिथुन, तुला, कुंभ) में तुला का, जल राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) में मकर का; फिर आगे क्रम से।

उदाहरण: कोई ग्रह मेष के 17° पर है। 17 ÷ 1.111 ≈ 15.3, यानी सोलहवाँ हिस्सा। मेष अग्नि राशि है, इसलिए मेष से सोलहवीं राशि: कर्क (बारह पूरी कर, फिर मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क)। D27 में यह ग्रह कर्क में होगा।

परंपरा इसमें क्या देखती है

पराशर भांश को बल और उसकी कमी, दोनों के विचार से जोड़ते हैं। परंपरा इसे सीधी भाषा में यह देखने का तरीका मानती है कि व्यक्ति की सहज क्षमताएँ कहाँ हैं और स्वभाव किस ओर झुकता है। D27 का लग्न और उसका स्वामी, और पहले भाव का स्वामी यहाँ देखे जाते हैं।

जन्म-समय कितना मायने रखता है

लग्न औसतन हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश आगे बढ़ता है; कुछ राशियाँ जल्दी उदय होती हैं, कुछ धीरे। D27 का एक भाग 1°6′40″ का है, इसलिए जन्म-समय में लगभग 4–5 मिनट का अंतर D27 का लग्न बदल सकता है। चंद्रमा एक भाग लगभग दो घंटे में पार करता है। ePandit आपकी कुंडली में हर वर्ग के साथ यह भी दिखाता है कि जन्म-समय कितने मिनट बदलने पर उस वर्ग का लग्न बदलेगा। इतने बारीक वर्ग में थोड़ी सी भी अनिश्चितता लग्न बदल देती है, इसलिए इसे केवल पक्के जन्म-समय पर ही देखें।

इसे शांति से कैसे पढ़ें

D27 को एक दूसरी नज़र की तरह पढ़िए, फ़ैसले की तरह नहीं। पहले मुख्य कुंडली (D1) में पहले भाव और उसके स्वामी को देखा जाता है, फिर चल रही दशा को। D27 बस यह देखने में मदद करता है कि वही बात यहाँ भी दिखती है या नहीं। किसी ग्रह का इस वर्ग में किसी ख़ास राशि में होना अकेले कुछ तय नहीं करता। यहाँ 'बल' का अर्थ गणित का एक माप है, किसी व्यक्ति के अच्छे-बुरे होने का फ़ैसला नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

D27 और नक्षत्र में क्या संबंध है?

दोनों में 27 की संख्या है, इसलिए इसे नक्षत्रांश कहते हैं। पर D27 हर राशि का अलग विभाजन है; यह आपका जन्म-नक्षत्र नहीं बताता।

क्या D27 षड्बल जैसा है?

दोनों 'बल' से जुड़े हैं, पर अलग तरीके हैं। षड्बल अंकों में माप देता है; D27 एक विभाजित कुंडली है जिसे परंपरा स्वभाव की झलक के लिए पढ़ती है।

क्या केवल D27 देखकर कोई बात तय की जा सकती है?

नहीं। यह एक बारीक, सहायक वर्ग है और मुख्य कुंडली के साथ ही पढ़ा जाता है।

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आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13