अवकहड़ा चक्र क्या है?

अवकहड़ा चक्र जन्म-कुंडली के साथ छपने वाली एक छोटी तालिका है, जो चंद्रमा की राशि और नक्षत्र से बनती है: नामाक्षर, वर्ण, वश्य, योनि, गण, नाड़ी, तत्त्व और पाया। नामकरण और विवाह-मिलान में यही तालिका काम आती है।

स्रोत: Muhūrta-cintāmaṇi (MC), विवाह-प्रकरण (वर्ण, वश्य, योनि, गण, नाड़ी के वर्ग)

आपकी कुंडली में

आधार
जन्म के समय चंद्रमा की राशि, नक्षत्र और चरण
वर्ण
चंद्र राशि के तत्त्व से (यह एक पुराना ज्योतिषीय वर्गीकरण है; जाति नहीं)
गण
देव · मनुष्य · राक्षस (नक्षत्र से)
नाड़ी
आदि · मध्य · अंत्य (नक्षत्र से)
पाया
दो विधियाँ (नक्षत्र से; लग्न से चंद्र-भाव से); लोक-परंपरा

परिचय

पुरानी जन्मपत्री में कुंडली के पास एक तालिका होती है जिसे अवकहड़ा चक्र कहते हैं। इसका नाम उस अक्षर-तालिका से आया है जो "अ, व, क, ह, ड" जैसे अक्षरों से शुरू होती है, यानी नक्षत्र-चरणों के नामाक्षर।

यह पूरी तालिका जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से बनती है: वह किस राशि में था, किस नक्षत्र में और उसके किस चरण में। इसलिए इसके ज़्यादातर खाने जन्म-समय में थोड़े अंतर से नहीं बदलते, सिवाय तब जब चंद्रमा किसी चरण या नक्षत्र की सीमा पर हो।

अवकहड़ा के खाने, एक-एक करके

  • राशि: चंद्र राशि और उसका स्वामी। उत्तर भारत में नाम और राशिफल इसी से देखे जाते हैं।
  • नक्षत्र और चरण: 27 नक्षत्रों में से जन्म-नक्षत्र, और उसके चार चरणों में से कौन-सा। नक्षत्र का स्वामी विंशोत्तरी दशा की शुरुआत भी तय करता है।
  • नामाक्षर: हर चरण का एक अक्षर है। जैसे भरणी के चार चरण: ली, लू, ले, लो। कई परिवार नाम इसी अक्षर से रखते हैं; कुछ राशि के नौ अक्षरों में से कोई भी लेते हैं। दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं।
  • वर्ण: चंद्र राशि से। जल-तत्त्व राशियाँ (कर्क, वृश्चिक, मीन) ब्राह्मण, अग्नि (मेष, सिंह, धनु) क्षत्रिय, पृथ्वी (वृषभ, कन्या, मकर) वैश्य, वायु (मिथुन, तुला, कुंभ) शूद्र। (यह एक पुराना ज्योतिषीय वर्गीकरण है; जाति नहीं)
  • वश्य: राशि का एक वर्ग: चतुष्पद, नर (द्विपद), जलचर, वनचर या कीट। धनु और मकर के दो आधे अलग वर्ग में गिने जाते हैं।
  • योनि: नक्षत्र से जुड़ा एक प्रतीक-पशु, कुल 14: अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, गौ, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल, सिंह।
  • गण: नक्षत्र से: देव, मनुष्य या राक्षस, हर एक में नौ नक्षत्र। परंपरा इसे स्वभाव की गति से जोड़ती है। राक्षस गण: यह एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। परंपरा इसे स्वतंत्र और तीव्र स्वभाव से जोड़ती है।
  • नाड़ी: नक्षत्र से: आदि, मध्य या अंत्य।
  • तत्त्व: चंद्र राशि का तत्त्व: अग्नि, पृथ्वी, वायु या जल।
  • पाया: इसे दो प्रचलित विधियों से निकाला जाता है, और दोनों अलग उत्तर दे सकती हैं (नीचे देखिए)।

एक उदाहरण

मान लीजिए जन्म के समय चंद्रमा मेष राशि में भरणी नक्षत्र के तीसरे चरण में है। तब अवकहड़ा कुछ ऐसा होगा:

खाना मान
राशि · स्वामी मेष · मंगल
नक्षत्र · चरण · स्वामी भरणी · 3 · शुक्र
नामाक्षर ले
वर्ण क्षत्रिय (यह एक पुराना ज्योतिषीय वर्गीकरण है; जाति नहीं)
वश्य चतुष्पद
योनि गज (हाथी)
गण मनुष्य
नाड़ी मध्य
तत्त्व अग्नि

पाया: दो विधियाँ

पाया (सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा) की दो विधियाँ प्रचलित हैं: एक जन्म-नक्षत्र से, और दूसरी लग्न से चंद्रमा के भाव से। दोनों का उत्तर अलग हो सकता है, और दोनों अपनी विधि से सही हैं। दोनों लोक-परंपरा हैं; मुहूर्त-चिंतामणि, धर्मसिंधु, बृहत् पाराशर होरा शास्त्र और फलदीपिका में पाया का उल्लेख नहीं मिलता। ePandit भाव-विधि का उत्तर, और नक्षत्र-विधि का उत्तर केवल वहाँ छापता है जहाँ प्रचलित नक्षत्र-तालिकाएँ एकमत हों, दोनों विधि के नाम के साथ। पाया को शिशु या परिवार के लिए शुभ-अशुभ का संकेत न मानें।

अवकहड़ा किस काम आता है

  • नामकरण: नामाक्षर और राशि।
  • विवाह-मिलान: अष्टकूट के ज़्यादातर अंक इसी तालिका से आते हैं: वर्ण, वश्य, योनि, गण, नाड़ी, और नक्षत्र से तारा, राशि से ग्रह-मैत्री और भकूट।
  • दशा की शुरुआत: नक्षत्र का स्वामी।

ePandit उत्तर भारतीय अवकहड़ा का सेट छापता है; कुछ दक्षिण भारतीय तालिकाओं में युंजा और रज्जु जैसे खाने भी होते हैं, जो हम नहीं छापते। परंपरा मानती है कि ये सब कुंडली के कई पहलुओं में से कुछ हैं; किसी एक खाने से व्यक्ति के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जाता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नामाक्षर नक्षत्र-चरण से लें या राशि से?

दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं। नक्षत्र-चरण से एक अक्षर मिलता है; राशि के नौ अक्षरों में से कोई भी लिया जा सकता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।

क्या राक्षस गण होना कोई बुरी बात है?

नहीं। राक्षस गण एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। परंपरा इसे स्वतंत्र और तीव्र स्वभाव से जोड़ती है। देव और मनुष्य गण की तरह यह भी तीन वर्गों में से एक है।

क्या वर्ण का अर्थ जाति है?

नहीं। यहाँ वर्ण चंद्र राशि के तत्त्व से तय होने वाला एक पुराना ज्योतिषीय वर्गीकरण है; इसका किसी की जाति से कोई संबंध नहीं।

अवकहड़ा के लिए जन्म-समय कितना ज़रूरी है?

ज़्यादातर खाने चंद्रमा से बनते हैं, जो एक नक्षत्र में लगभग एक दिन रहता है। पर अगर चंद्रमा चरण या नक्षत्र की सीमा पर हो, तो समय का छोटा अंतर नामाक्षर या नक्षत्र बदल सकता है। लग्न वाली पाया-विधि के लिए समय ज़रूरी है।

दो पंडित जी अलग पाया बताएँ तो किसकी मानें?

दोनों सही हो सकते हैं, क्योंकि विधियाँ दो हैं। अंतर विधि का है, व्यक्ति का नहीं। और कोई संस्कार पाया पर निर्भर नहीं है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • Muhūrta-cintāmaṇi (MC) · विवाह-प्रकरण (वर्ण, वश्य, योनि, गण, नाड़ी के वर्ग)
  • B. V. Raman, A Manual of Hindu Astrology · नक्षत्र, राशि और उनके वर्ग

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13