परिचय
शिशु के जन्म के बाद कई परिवार पूछते हैं: "क्या बच्चा गंडमूल में हुआ है?" यह सवाल अक्सर डर के साथ आता है। इस पेज का उद्देश्य वही बात शांति से और साफ़ बताना है जो परंपरा कहती है।
सबसे पहले: गंडमूल और गंडांत दो अलग बातें हैं। गंडमूल छह पूरे नक्षत्रों की बात है; गंडांत केवल कुछ संधि-बिंदुओं के बहुत पास का समय है।
गंडमूल: छह नक्षत्र
जब जन्म के समय चंद्रमा इन छह में से किसी नक्षत्र में हो, तो उसे गंडमूल जन्म कहा जाता है:
| संधि | पहले का नक्षत्र (बुध) | बाद का नक्षत्र (केतु) |
|---|---|---|
| मीन → मेष | रेवती | अश्विनी |
| कर्क → सिंह | आश्लेषा | मघा |
| वृश्चिक → धनु | ज्येष्ठा | मूल |
ध्यान दीजिए, ये छह नक्षत्र ठीक उन तीन जगहों पर हैं जहाँ जल-तत्त्व की राशि खत्म होकर अग्नि-तत्त्व की राशि शुरू होती है, और जहाँ नक्षत्र के साथ राशि भी एक साथ बदलती है। परंपरा इन्हीं संधियों को विशेष ध्यान का स्थान मानती है।
सत्ताईस में से छह नक्षत्र होने के कारण बहुत-से बच्चों का जन्म गंडमूल में होता है। यह एक सामान्य बात है।
गंडांत: केवल संधि के पास का समय
गंडांत गंडमूल से बहुत छोटा है। यह केवल इन तीन संधियों के ठीक आस-पास का समय है: रेवती–अश्विनी, आश्लेषा–मघा और ज्येष्ठा–मूल। परंपरा में आमतौर पर संधि के दोनों ओर कुछ घटियाँ गिनी जाती हैं (एक घटी = 24 मिनट); यह माप अलग-अलग ग्रंथों में थोड़ा अलग मिलता है।
धर्मसिंधु नक्षत्र-गंडांत के साथ तिथि-गंडांत और लग्न-गंडांत की शांति का भी उल्लेख करता है। परंपरा में आमतौर पर तिथियों की संधियाँ (पंचमी-षष्ठी, दशमी-एकादशी, पूर्णिमा या अमावस्या से प्रतिपदा) और लग्न की वही जल-अग्नि संधियाँ (कर्क-सिंह, वृश्चिक-धनु, मीन-मेष) गिनी जाती हैं।
इसलिए गंडमूल नक्षत्र में हर जन्म गंडांत नहीं होता; गंडांत तभी है जब जन्म संधि के बहुत पास हो।
शांति: ऐच्छिक, शांत मन से
- धर्मसिंधु जन्म के कुछ समयों के लिए एक ऐच्छिक शांति का वर्णन करता है। उसके शांति-प्रकरणों में मूल, आश्लेषा और ज्येष्ठा का विस्तार से उल्लेख है।
- कई परिवार यह सरल पूजा उस दिन रखते हैं जब चंद्रमा फिर से जन्म-नक्षत्र में लौटता है, यानी लगभग 27 दिन बाद। ePandit कुंडली में यह तारीख गणना करके देता है।
- यह करना परिवार की इच्छा पर है। न करने से कोई "दोष" नहीं बनता।
- दान (लोक मान्यता, वैकल्पिक): चाहें तो उस दिन किसी ज़रूरतमंद को अन्न या वस्त्र दे सकते हैं।
सबसे ज़रूरी बात: गंडमूल या गंडांत में जन्म किसी के लिए बुरे समय का संकेत नहीं है। शिशु किसी के लिए "भारी" नहीं होता, न माता-पिता के लिए, न परिवार में किसी और के लिए। परंपरा इसे केवल एक संधि-समय की याद के रूप में देखती है, और एक नक्षत्र पूरी कुंडली नहीं है।
ePandit क्या दिखाता है
ePandit की कुंडली में आपको मिलता है:
- जन्म-नक्षत्र गंडमूल में है या नहीं;
- नक्षत्र, तिथि या लग्न का गंडांत है या नहीं, अलग-अलग;
- चंद्रमा के जन्म-नक्षत्र में लौटने की अगली तारीख और समय।
हम इसके साथ कोई डर वाली भाषा या उपाय नहीं जोड़ते। शिशु की पूरी पत्रिका में नामाक्षर, संस्कार-तिथियाँ और यह जानकारी एक साथ मिलती है।