भकूट दोष क्या है, और इसके परिहार क्या हैं?

भकूट अष्टकूट मिलान का 7 अंक वाला कूट है, जो दोनों चंद्र राशियों की दूरी से निकलता है। 2-12, 5-9 या 6-8 पर इसे भकूट दोष कहते हैं। मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार नाड़ी शुद्ध हो और राशि-स्वामी एक हों या मित्र हों, तो यह दोष नहीं माना जाता।

स्रोत: Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 31 (बाकी स्थितियाँ सुखकारक), बाकी स्थितियाँ सुखकारक

आपकी कुंडली में

अंक
7 (36 में से)
कब गिना जाता है
दोनों चंद्र राशियाँ आपस में 2-12, 5-9 या 6-8 पर हों
परिहार (ePandit में)
नाड़ी शुद्ध हो, और: स्वामी एक हो · स्वामी मित्र हों · चंद्र-नवांश स्वामी मित्र हों
MC Vivāha-prakaraṇa 32–33
ePandit में
असली अंक, और साथ में परिहार है या नहीं

परिचय

अष्टकूट मिलान का सातवाँ कूट भकूट है, जिसके 36 में से 7 अंक हैं। यह वर और कन्या की चंद्र राशियों की आपसी दूरी से निकलता है। कुछ दूरियों पर इसके अंक 0 होते हैं, और परंपरा इसे भकूट दोष कहती है।

नाड़ी की तरह, मुहूर्त-चिंतामणि भकूट के भी परिहार देता है। इस पेज में हम बताते हैं कि भकूट दोष कब गिना जाता है, कब नहीं, और ePandit इसे कैसे दिखाता है।

भकूट दोष कब गिना जाता है

एक की चंद्र राशि से दूसरे की चंद्र राशि गिनिए, और फिर उलटा भी। अगर दोनों राशियाँ आपस में इन तीन जोड़ियों में से किसी पर हों, तो भकूट दोष गिना जाता है:

दूरी ग्रंथ का अपना उदाहरण
6-8 (षडाष्टक) मेष और कन्या
5-9 (नव-पंचम) सिंह और धनु
2-12 (द्वि-द्वादश) मेष और वृषभ

बाकी सभी दूरियों पर, यानी एक ही राशि, 3-11, 4-10 और 7-7 पर, भकूट के पूरे अंक मिलते हैं। मुहूर्त-चिंतामणि (विवाह-प्रकरण, श्लोक 31) इन बाकी स्थितियों को दोनों के लिए सुखकारक कहता है।

भकूट केवल चंद्र राशि से निकलता है, इसलिए जन्म-समय थोड़ा अनिश्चित हो तब भी ज़्यादातर हो जाता है, जब तक उस दिन चंद्रमा राशि न बदल रहा हो।

परिहार: जब यह दोष नहीं माना जाता

मुहूर्त-चिंतामणि (विवाह-प्रकरण, श्लोक 32 और 33) कहता है कि ऊपर की जोड़ियों में भी विवाह शुभ माना जाता है, अगर नाड़ी शुद्ध हो (नाड़ी में दोष न हो) और साथ में इनमें से कोई एक बात हो:

  • दोनों चंद्र राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो। जैसे मेष और वृश्चिक (दोनों मंगल की, 6-8), वृषभ और तुला (दोनों शुक्र की, 6-8), मकर और कुंभ (दोनों शनि की, 2-12)।
  • दोनों राशियों के स्वामी आपस में मित्र हों। जैसे सिंह (सूर्य) और धनु (गुरु (बृहस्पति)): सूर्य और गुरु आपस में मित्र हैं। ePandit इसे तब भी मित्रता गिनता है जब एक स्वामी दूसरे को मित्र माने और कोई किसी को शत्रु न माने।
  • दोनों चंद्र-नवांश राशियों के स्वामी इसी तरह मित्र हों। यह रास्ता श्लोक 32 में है।

नाड़ी शुद्ध न हो, तो ePandit इनमें से किसी के रहते भी भकूट दोष को कटा हुआ नहीं दिखाता, और यह बात कारण के साथ लिखता है। ग्रंथ तारा-शुद्धि वाले कुछ और रास्ते भी बताता है; ePandit उन्हें नहीं गिनता, ताकि नियम सरल रहे।

ePandit इसे कैसे दिखाता है

परिहार दोष हटाता है, अंक नहीं जोड़ता। इसलिए ePandit भकूट के असली अंक (0 या 7) ही दिखाता है, और उसके पास लिखता है कि परिहार है या नहीं, और कौन-सा: "एक ही स्वामी", "स्वामी मित्र" या "नवांश-स्वामी मित्र", नाड़ी की शुद्धि के साथ।

मिलान के सार में ePandit पहले दोष देखता है, फिर कुल अंक। अगर भकूट दोष का परिहार न हो, तो सार "बात करके आगे बढ़िए" होता है। इसका अर्थ "मना" नहीं; इसका अर्थ है कि दोनों परिवार और दोनों साथी खुलकर बात करें: रहन-सहन, काम, उम्मीदें और एक-दूसरे का स्वभाव।

इसका क्या अर्थ नहीं है

  • मुहूर्त-ग्रंथों में हर जोड़ी के साथ पुराने फल भी लिखे हैं। ePandit उन्हें नहीं दोहराता, क्योंकि दो चंद्र राशियों की दूरी से किसी परिवार के भविष्य के बारे में कुछ तय नहीं होता।
  • गुण अकेले किसी विवाह का फैसला नहीं करते। पूरी कुंडली, दोनों का स्वभाव और आपसी समझ कहीं बड़ी बातें हैं।
  • इसके लिए कोई पूजा, रत्न या ख़र्च ज़रूरी नहीं। अगर कोई परिवार अपनी इच्छा से कुछ करना चाहे, तो /upay पर ₹0 वाले विकल्प पहले दिखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भकूट दोष हो तो क्या विवाह नहीं हो सकता?

ऐसा नहीं है। मुहूर्त-चिंतामणि इसके परिहार देता है: नाड़ी शुद्ध हो और राशि-स्वामी एक हों या मित्र हों। परिहार न हो, तब भी ePandit का सार "बात करके आगे बढ़िए" है, "मना" नहीं।

हमारी राशियाँ मेष और वृश्चिक हैं। क्या यह भकूट दोष है?

ये दोनों 6-8 पर हैं, पर दोनों का स्वामी मंगल है। ग्रंथ के अनुसार एक ही स्वामी होने पर, अगर नाड़ी भी शुद्ध हो, तो यह दोष नहीं माना जाता।

परिहार है, फिर भी भकूट के 0 अंक क्यों?

क्योंकि परिहार दोष हटाता है, अंक नहीं जोड़ता। हम असली अंक और परिहार दोनों दिखाते हैं, ताकि कुछ छिपा न रहे।

दो ऐप में भकूट का उत्तर अलग क्यों?

कुछ परंपराएँ परिहार नहीं गिनतीं, कुछ नवांश या नाड़ी वाले रास्ते भी जोड़ती हैं, और मित्रता की तालिकाएँ भी थोड़ी अलग हैं। ePandit अपना नियम ऊपर साफ़ लिखता है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 31 (बाकी स्थितियाँ सुखकारक) · बाकी स्थितियाँ सुखकारक
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 32 (दुष्ट भकूट का परिहार: एक स्वामी) · परिहार: एक ही राशि-स्वामी या मित्रता
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 33 (राशि-स्वामियों की मित्रता) · परिहार: राशि-स्वामियों की मित्रता दुष्ट भकूट को हटाती है
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 32 (नवांश-स्वामियों का रास्ता) · और रास्ते: नवांश-स्वामियों की मित्रता, नाड़ी शुद्धि के साथ

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14