परिचय
मकर राशिचक्र की दसवीं राशि है, निरयन राशिचक्र में 270° से 300° तक। मकर का प्रतीक मगर (मकर) है, और परंपरा इसे मेहनत, अनुशासन और धीरे-धीरे ऊँचाई तक पहुँचने से जोड़ती है। इसके स्वामी शनि हैं, तत्व पृथ्वी है, स्वभाव चर है और यह स्त्री (सम) राशि है। इसमें उत्तराषाढ़ा (चरण 2,3,4), श्रवण (चरण 1,2,3,4) और धनिष्ठा (चरण 1,2) आते हैं।
उत्तर भारत में जब कोई कहता है "मेरी राशि मकर है", तो उसका मतलब चंद्र राशि से होता है: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। नाम का पहला अक्षर, रोज़ का राशिफल और गुण मिलान, तीनों इसी चंद्र राशि से देखे जाते हैं।
ध्यान रखें: निरयन मकर की तारीखें पश्चिमी Capricorn की तारीखों से अलग हैं; यह फ़र्क नीचे सवाल-जवाब में समझाया गया है।
स्वभाव
पृथ्वी तत्व, चर स्वभाव और शनि के स्वामित्व के कारण ज्योतिष की परंपरा मकर को व्यावहारिक, ज़िम्मेदार और लंबी योजना बनाने वाला स्वभाव मानती है। माना जाता है कि मकर चंद्र राशि वाले मेहनत पर भरोसा रखते हैं, ज़िम्मेदारी गंभीरता से लेते हैं और धीरे-धीरे पर पक्का आगे बढ़ना पसंद करते हैं।
फिर भी यह केवल एक झुकाव है, किसी व्यक्ति के बारे में पक्का फ़ैसला नहीं। एक ही राशि के दो लोग बहुत अलग हो सकते हैं, क्योंकि लग्न, नक्षत्र, भाव और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: परंपरा के अनुसार इस राशि से जुड़े गुण हैं: अनुशासन, धैर्य, ज़िम्मेदारी निभाना, और लंबी दौड़ के लिए योजना बनाना।
ध्यान रखने की बातें: काम और कर्तव्य पर ध्यान कभी-कभी आराम और खुशी को पीछे छोड़ सकता है, और भावनाएँ कहने में संकोच हो सकता है। अपनों के साथ हल्के पल बिताना और मन की बात कहना अच्छा रहता है।
ये दोनों पहलू एक ही स्वभाव के दो रूप हैं, कोई कमी नहीं।
काम और रुचियाँ
ज्योतिष की परंपरा मकर को इन विषयों से जोड़ती है: ऐसे काम जिनमें व्यवस्था, ज़िम्मेदारी और धीरे-धीरे कुछ बड़ा बनाना शामिल हो: प्रबंधन और प्रशासन, सरकारी या संस्थागत काम, इंजीनियरिंग और निर्माण, वित्त, और ऐसे क्षेत्र जहाँ अनुभव के साथ ज़िम्मेदारी बढ़ती हो। यह कोई एक पेशा तय नहीं करता; काम के लिए दशम भाव, दशा और पूरी कुंडली देखी जाती है।
रिश्ते
परंपरा मकर को भरोसे और ज़िम्मेदारी से जुड़ने वाली राशि मानती है। माना जाता है कि ये लोग रिश्ते में दिखावे से ज़्यादा निभाने को महत्व देते हैं और अपनों के भविष्य की चिंता करते हैं। प्यार को शब्दों में भी कह देना साथी को अपनापन महसूस कराता है। रिश्तों की असली तस्वीर सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र और पूरी कुंडली से बनती है, अकेली राशि से नहीं।
जब मकर लग्न हो
लग्न और चंद्र राशि अलग चीज़ें हैं। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उग रही थी। यह लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और स्थान चाहिए, जबकि चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है।
जब मकर लग्न हो, तो शनि लग्नेश (लग्न के स्वामी) बनते हैं, और कुंडली में उनकी स्थिति पूरी कुंडली के लिए अहम हो जाती है। परंपरा मकर लग्न को अनुशासित, व्यावहारिक और लंबी योजना से चलने वाले दृष्टिकोण से जोड़ती है। आपकी चंद्र राशि और लग्न एक भी हो सकते हैं और अलग भी; दोनों अपनी-अपनी बात कहते हैं।
नामाक्षर
अवकहड़ा चक्र की परंपरा में मकर के नौ नामाक्षर हैं: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी। हर अक्षर एक नक्षत्र-चरण से जुड़ा है:
- उत्तराषाढ़ा: चरण 2: भो, चरण 3: जा, चरण 4: जी
- श्रवण: चरण 1: खी, चरण 2: खू, चरण 3: खे, चरण 4: खो
- धनिष्ठा: चरण 1: गा, चरण 2: गी
नामकरण में जन्म के चंद्रमा का नक्षत्र-चरण देखकर अक्षर चुना जाता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।