परिचय
श्रवण 27 नक्षत्रों में 22वाँ नक्षत्र है। यह मकर 10°00′ से मकर 23°20′ तक फैला है। विंशोत्तरी दशा में इसका स्वामी चंद्र है, जिसकी महादशा 10 वर्ष की होती है। मुहूर्त-चिंतामणि (नक्षत्र-प्रकरण 1) इसके देवता विष्णु बताता है, और परंपरा में इसका प्रतीक कान या तीन पदचिह्न माना जाता है।
"श्रवण" का अर्थ है सुनना। पुराने समय में ज्ञान गुरु (बृहस्पति) से सुनकर ही सीखा जाता था, इसलिए परंपरा इस नक्षत्र को सीखने और परंपरा को आगे ले जाने से जोड़ती है। इसका प्रतीक कान है, और कुछ परंपराएँ इसे विष्णु के तीन पदचिह्नों से भी जोड़ती हैं। इसके चारों पद मकर राशि में हैं।
स्वभाव (परंपरा मानती है)
परंपरा मानती है कि श्रवण में चंद्रमा वाले लोग अच्छे श्रोता होते हैं: वे बोलने से पहले सुनते हैं और बात का सार पकड़ लेते हैं। चंद्र का स्वामित्व संवेदनशीलता और लोगों की भावनाएँ समझने का गुण जोड़ता है, और मकर राशि व्यवस्था, धैर्य और मेहनत का। विष्णु, जो पालन करने वाले देवता हैं, इसमें संभालने और सँवारने का भाव जोड़ते हैं।
इस नक्षत्र का गण देव है। परंपरा इसे कोमल, सात्त्विक और सहयोगी स्वभाव से जोड़ती है। यह भी एक पुराना वर्गीकरण भर है।
ध्यान रहे, ये परंपरा की बातें हैं, किसी व्यक्ति पर फ़ैसला नहीं। लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा मिलकर ही पूरी तस्वीर बनाते हैं; अकेला नक्षत्र कुछ तय नहीं करता।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: ध्यान से सुनना, जल्दी सीखना, बातों को याद रखना, लोगों को जोड़ना और सलाह देना।
ध्यान रखने की बातें: परंपरा कहती है कि बहुत सुनने वाले कभी-कभी दूसरों की बातें मन पर ज़्यादा ले लेते हैं। हर सुनी बात को अपना बोझ न बनाना, और अपनी राय भी खुलकर रखना, इस स्वभाव को संतुलित रखता है।
काम और रुचियाँ
परंपरा इस नक्षत्र को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें सुनना, सिखाना और जानकारी सँभालना हो: शिक्षण, परामर्श, भाषा और अनुवाद, संगीत और श्रव्य माध्यम, पुस्तकालय और अभिलेख, या परंपरा और संस्कृति को सहेजने वाले क्षेत्र। ये रुचियों की दिशाएँ हैं, कोई तय पेशा नहीं।
रिश्ते
रिश्तों में परंपरा इन लोगों को समझदार और ध्यान रखने वाला मानती है। साथी को लगता है कि उसकी बात सुनी जा रही है, और यही रिश्ते की नींव बनता है। अपनी ज़रूरतें भी उतनी ही साफ़ कहना, जितना ध्यान से वे दूसरों को सुनते हैं, रिश्ते को बराबरी का बनाता है।
आस्था
मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार श्रवण के देवता विष्णु हैं। विष्णु जगत का पालन करने वाले माने जाते हैं, और वामन रूप में उनके तीन पग की कथा प्रसिद्ध है। इसलिए यह नक्षत्र संभालने, धैर्य और धीरे-धीरे बड़ा होने के विचार से जुड़ा है।
नाम-मंत्र: ॐ विष्णवे नमः (नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)
चाहें तो किसी बच्चे को कहानियों या पढ़ाई की किताब दीजिए, या किसी बुज़ुर्ग के पास बैठकर उनकी बातें सुनिए। (लोक मान्यता, वैकल्पिक)
नामाक्षर
नामकरण में चंद्रमा के नक्षत्र के पद से पहला अक्षर चुनने की परंपरा है। श्रवण के चार पदों के अक्षर:
- पद 1 (मकर): खी
- पद 2 (मकर): खू
- पद 3 (मकर): खे
- पद 4 (मकर): खो
बच्चे का पद जन्म-समय से तय होता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।
अपनी कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र और पद जानने के लिए मुफ़्त कुंडली बनाइए।