शतभिषा नक्षत्र: एकांत और खोज का नक्षत्र

शतभिषा कुंभ राशि का नक्षत्र है, जिसके स्वामी राहु और देवता वरुण हैं। परंपरा इसे स्वतंत्र सोच, खोज, एकांत और सच की तलाश से जोड़ती है।

स्रोत: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)

आपकी कुंडली में

स्वामी (विंशोत्तरी)
राहु: महादशा 18 वर्ष
BPHS (Santhanam tr.), विंशोत्तरी दशा
देवता
वरुण
मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1
प्रतीक
खाली वृत्त
परंपरा
विस्तार (निरयन)
कुंभ 6°40′ से कुंभ 20°00′ तक
गण
राक्षस (पुराने वर्गीकरण का नाम; बुराई का संकेत नहीं)
योनि
अश्व (घोड़ा)

परिचय

शतभिषा 27 नक्षत्रों में 24वाँ नक्षत्र है। यह कुंभ 6°40′ से कुंभ 20°00′ तक फैला है। विंशोत्तरी दशा में इसका स्वामी राहु है, जिसकी महादशा 18 वर्ष की होती है। मुहूर्त-चिंतामणि (नक्षत्र-प्रकरण 1) इसके देवता वरुण बताता है, और परंपरा में इसका प्रतीक खाली वृत्त माना जाता है।

"शतभिषा" का अर्थ पारंपरिक रूप से "सौ वैद्यों वाला" या "सौ तारों वाला" समझा जाता है, और इसे "शततारका" भी कहा जाता है। इसका प्रतीक खाली वृत्त है: एक घेरा, जो अपने भीतर कुछ छिपाए रखता है। इसके चारों पद कुंभ राशि में हैं।

स्वभाव (परंपरा मानती है)

परंपरा मानती है कि शतभिषा में चंद्रमा वाले लोग अपनी राह खुद सोचते हैं और भीड़ के पीछे चलना कम पसंद करते हैं। राहु का स्वामित्व नई और अलग चीज़ों में रुचि जोड़ता है, और कुंभ राशि समाज, विज्ञान और नए विचारों की ओर झुकाव। वरुण, जो सत्य और नियम के देवता हैं, इसमें ईमानदारी और गहराई का भाव जोड़ते हैं।

इस नक्षत्र का गण राक्षस है। राक्षस गण: यह एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। परंपरा इससे स्वतंत्र, तीव्र और अपनी राह खुद चुनने वाला स्वभाव जोड़ती है। कुंडली-मिलान में गण एक छोटा-सा हिस्सा भर है।

ध्यान रहे, ये परंपरा की बातें हैं, किसी व्यक्ति पर फ़ैसला नहीं। लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा मिलकर ही पूरी तस्वीर बनाते हैं; अकेला नक्षत्र कुछ तय नहीं करता।

शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें

शक्तियाँ: स्वतंत्र सोच, खोज और विश्लेषण, बातों को गुप्त रखना, नए तरीक़े ढूँढना, सच्चाई पर टिकना।

ध्यान रखने की बातें: परंपरा कहती है कि एकांत की चाह कभी-कभी लोगों से दूरी बन सकती है। अपने भरोसेमंद लोगों से मन की बात कहना, और अकेले सब कुछ उठाने की जगह मदद लेना, इस स्वभाव को हल्का रखता है।

काम और रुचियाँ

परंपरा इस नक्षत्र को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें खोज, तकनीक और देखभाल हो: विज्ञान और शोध, तकनीक और कंप्यूटर, खगोल और गणित, समाज-सेवा, या ऐसे क्षेत्र जहाँ लोगों की देखभाल और उनकी समस्या का हल ढूँढना हो। ये रुचियों की दिशाएँ हैं, कोई तय पेशा नहीं।

रिश्ते

रिश्तों में परंपरा इन लोगों को वफ़ादार, पर अपने निजी समय को महत्व देने वाला मानती है। उन्हें ऐसा साथी अच्छा लगता है जो उनकी चुप्पी को नाराज़गी न समझे। धीरे-धीरे खुलना उनका तरीक़ा है; धैर्य और भरोसा इस रिश्ते को गहरा बनाते हैं।

आस्था

मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार शतभिषा के देवता वरुण हैं। वैदिक परंपरा में वरुण जल, आकाश और ऋत, यानी सृष्टि के नियम और सत्य, के रक्षक माने जाते हैं। इसलिए यह नक्षत्र सच्चाई, नियम और गहराई के विचार से जुड़ा है।

नाम-मंत्र: ॐ वरुणाय नमः (नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)

चाहें तो किसी सार्वजनिक जगह पर पीने के साफ़ पानी की व्यवस्था में मदद कीजिए। (लोक मान्यता, वैकल्पिक)

नामाक्षर

नामकरण में चंद्रमा के नक्षत्र के पद से पहला अक्षर चुनने की परंपरा है। शतभिषा के चार पदों के अक्षर:

  • पद 1 (कुंभ): गो
  • पद 2 (कुंभ): सा
  • पद 3 (कुंभ): सी
  • पद 4 (कुंभ): सू

बच्चे का पद जन्म-समय से तय होता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।

अपनी कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र और पद जानने के लिए मुफ़्त कुंडली बनाइए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी दशा में शतभिषा का स्वामी राहु है। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो जीवन की पहली दशा राहु की होती है, और उसमें कितने वर्ष बचे हैं, यह चंद्रमा की सही स्थिति से निकलता है। पूरी महादशा 18 वर्ष की है।

शतभिषा के नामाक्षर कौन से हैं?

चारों पदों के अक्षर क्रम से गो, सा, सी, सू हैं। आपका पद जन्म-समय से तय होता है, इसलिए नामाक्षर कैलकुलेटर से देखना सबसे आसान है।

शतभिषा का अर्थ क्या है?

इसे परंपरा में "सौ वैद्यों वाला" या "सौ तारों वाला" समझा जाता है, और इसे शततारका भी कहते हैं। इसका प्रतीक खाली वृत्त है।

शतभिषा के देवता कौन हैं?

मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार वरुण। वैदिक परंपरा में वरुण जल, आकाश और सृष्टि के नियम (ऋत) के रक्षक माने जाते हैं।

शतभिषा का गण राक्षस होने का क्या अर्थ है?

राक्षस गण एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। परंपरा इसे स्वतंत्र और तीव्र स्वभाव से जोड़ती है। कुंडली-मिलान में गण 36 में से 6 अंकों का एक हिस्सा भर है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • मुहूर्त-चिंतामणि · नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)
  • बृहत् पराशर होरा शास्त्र (संथानम अनुवाद) · विंशोत्तरी दशा (दशा-स्वामी और वर्ष)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13