उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: स्थिर निष्ठा का नक्षत्र

उत्तराषाढ़ा धनु के अंत से मकर तक फैला नक्षत्र है, जिसके स्वामी सूर्य और देवता विश्वेदेव हैं। परंपरा इसे धैर्य, ईमानदारी और लंबे समय तक टिकने वाली सफलता से जोड़ती है।

स्रोत: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)

आपकी कुंडली में

स्वामी (विंशोत्तरी)
सूर्य: महादशा 6 वर्ष
BPHS (Santhanam tr.), विंशोत्तरी दशा
देवता
विश्वेदेव
मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1
प्रतीक
हाथी-दाँत या छोटा पलंग
परंपरा
विस्तार (निरयन)
धनु 26°40′ से मकर 10°00′ तक
गण
मनुष्य
योनि
नकुल (नेवला)

परिचय

उत्तराषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 21वाँ नक्षत्र है। यह धनु 26°40′ से मकर 10°00′ तक फैला है। विंशोत्तरी दशा में इसका स्वामी सूर्य है, जिसकी महादशा 6 वर्ष की होती है। मुहूर्त-चिंतामणि (नक्षत्र-प्रकरण 1) इसके देवता विश्वेदेव बताता है, और परंपरा में इसका प्रतीक हाथी-दाँत या छोटा पलंग माना जाता है।

"उत्तर" का अर्थ है बाद वाला। यह पूर्वाषाढ़ा का जोड़ीदार है और "आषाढ़ा" यानी "जिसे दबाया न जा सके" का दूसरा हिस्सा। इसका पहला पद धनु में और बाकी तीन पद मकर में पड़ते हैं, इसलिए इसमें धनु के आदर्श और मकर की मेहनत, दोनों का मेल देखा जाता है।

स्वभाव (परंपरा मानती है)

परंपरा मानती है कि उत्तराषाढ़ा में चंद्रमा वाले लोग धीरे-धीरे, पर पक्के क़दमों से आगे बढ़ते हैं। सूर्य का स्वामित्व आत्मसम्मान, ज़िम्मेदारी और नेतृत्व का भाव जोड़ता है। विश्वेदेव, यानी सब देवताओं का समूह, इसमें सबको साथ लेकर चलने और न्यायपूर्ण होने का विचार जोड़ते हैं।

इस नक्षत्र का गण मनुष्य है। परंपरा इसे व्यावहारिक, संतुलित और दुनिया के बीच रहकर काम करने वाले स्वभाव से जोड़ती है।

ध्यान रहे, ये परंपरा की बातें हैं, किसी व्यक्ति पर फ़ैसला नहीं। लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा मिलकर ही पूरी तस्वीर बनाते हैं; अकेला नक्षत्र कुछ तय नहीं करता।

शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें

शक्तियाँ: धैर्य, ईमानदारी, वादे निभाना, लंबी योजना बनाकर उस पर टिके रहना।

ध्यान रखने की बातें: परंपरा कहती है कि ऊँचे आदर्श कभी-कभी अपने और दूसरों से बहुत ज़्यादा उम्मीद बन सकते हैं। छोटी सफलताओं को भी सराहना, और आराम को भी काम जितना ज़रूरी मानना, इस स्वभाव को हल्का और खुश रखता है।

काम और रुचियाँ

परंपरा इस नक्षत्र को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें ज़िम्मेदारी, व्यवस्था और लंबे समय की मेहनत हो: प्रशासन, संस्थाएँ चलाना, नीति और न्याय से जुड़े क्षेत्र, शिक्षण, और ऐसे काम जहाँ कई लोगों के हित एक साथ साधने हों। ये रुचियों की दिशाएँ हैं, कोई एक पेशा नहीं।

रिश्ते

रिश्तों में परंपरा इन लोगों को भरोसेमंद और वफ़ादार मानती है। वे दिखावे से ज़्यादा निभाने में विश्वास रखते हैं। कभी-कभी वे भावनाएँ कम कहते हैं और काम से ज़्यादा जताते हैं; इसलिए मन की बात शब्दों में कहना भी रिश्ते में गर्माहट लाता है।

आस्था

मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार उत्तराषाढ़ा के देवता विश्वेदेव हैं। विश्वेदेव "सभी देवताओं" का समूह माने जाते हैं, जिनका आह्वान वैदिक यज्ञों में सबके कल्याण के लिए होता है। इसलिए यह नक्षत्र सबको साथ लेकर चलने और सामूहिक भलाई के विचार से जुड़ा है।

नाम-मंत्र: ॐ विश्वेभ्यो देवेभ्यो नमः (नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)

चाहें तो किसी ज़रूरतमंद विद्यार्थी को किताबें या कॉपी-पेन दीजिए। (लोक मान्यता, वैकल्पिक)

नामाक्षर

नामकरण में चंद्रमा के नक्षत्र के पद से पहला अक्षर चुनने की परंपरा है। उत्तराषाढ़ा के चार पदों के अक्षर:

  • पद 1 (धनु): भे
  • पद 2 (मकर): भो
  • पद 3 (मकर): जा
  • पद 4 (मकर): जी

बच्चे का पद जन्म-समय से तय होता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।

अपनी कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र और पद जानने के लिए मुफ़्त कुंडली बनाइए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी दशा में उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है। जन्म के समय चंद्रमा इस नक्षत्र में हो तो जीवन की पहली दशा सूर्य की होती है, और उसमें कितने वर्ष बचे हैं, यह चंद्रमा की सही स्थिति से निकलता है। पूरी महादशा 6 वर्ष की है।

उत्तराषाढ़ा के नामाक्षर कौन से हैं?

चारों पदों के अक्षर क्रम से भे, भो, जा, जी हैं। आपका पद जन्म-समय से तय होता है, इसलिए नामाक्षर कैलकुलेटर से देखना सबसे आसान है।

उत्तराषाढ़ा किस राशि में है?

यह दो राशियों में फैला है: पहला पद धनु में और पद 2 से 4 मकर में। इसलिए इस नक्षत्र वाले व्यक्ति की चंद्र राशि पद के हिसाब से धनु या मकर हो सकती है।

विश्वेदेव कौन हैं?

मुहूर्त-चिंतामणि उत्तराषाढ़ा के देवता विश्वेदेव बताता है। वैदिक परंपरा में विश्वेदेव सभी देवताओं का समूह हैं, जिनका आह्वान सबके कल्याण के लिए होता है।

उत्तराषाढ़ा का गण और नाड़ी क्या है?

इसका गण मनुष्य और नाड़ी अंत्य है। ये कुंडली-मिलान के हिस्से हैं, पर मिलान में भी पूरी कुंडली देखी जाती है; कोई एक अंक अकेले फ़ैसला नहीं करता।

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आधार ग्रंथ

  • मुहूर्त-चिंतामणि · नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)
  • बृहत् पराशर होरा शास्त्र (संथानम अनुवाद) · विंशोत्तरी दशा (दशा-स्वामी और वर्ष)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13