परिचय
पूर्वाषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 20वाँ नक्षत्र है। यह धनु 13°20′ से धनु 26°40′ तक फैला है। विंशोत्तरी दशा में इसका स्वामी शुक्र है, जिसकी महादशा 20 वर्ष की होती है। मुहूर्त-चिंतामणि (नक्षत्र-प्रकरण 1) इसके देवता आप: (जल) बताता है, और परंपरा में इसका प्रतीक हाथी-दाँत या पंखा माना जाता है।
"आषाढ़ा" का अर्थ पारंपरिक रूप से "जिसे दबाया न जा सके" समझा जाता है, और "पूर्व" यानी पहला। उत्तराषाढ़ा इसका जोड़ीदार नक्षत्र है। पूर्वाषाढ़ा के चारों पद धनु राशि में पड़ते हैं।
स्वभाव (परंपरा मानती है)
परंपरा मानती है कि पूर्वाषाढ़ा में चंद्रमा वाले लोगों में एक भीतरी उत्साह होता है जो आसानी से हार नहीं मानता। शुक्र का स्वामित्व सौंदर्य, कला और जीवन के आनंद की ओर रुचि जोड़ता है, और धनु राशि आदर्शों और खुले विचारों की ओर। जल के देवता होने से परंपरा इसमें ताज़गी लाने और दूसरों को फिर से ऊर्जा देने का गुण देखती है।
इस नक्षत्र का गण मनुष्य है। परंपरा इसे व्यावहारिक, संतुलित और दुनिया के बीच रहकर काम करने वाले स्वभाव से जोड़ती है।
ध्यान रहे, ये परंपरा की बातें हैं, किसी व्यक्ति पर फ़ैसला नहीं। लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा मिलकर ही पूरी तस्वीर बनाते हैं; अकेला नक्षत्र कुछ तय नहीं करता।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: उत्साह, अपनी बात पर टिके रहना, लोगों को प्रेरित करना, कला और सुंदरता की समझ।
ध्यान रखने की बातें: परंपरा कहती है कि यही आत्मविश्वास कभी-कभी दूसरों की राय को जल्दी किनारे कर देने की ओर ले जा सकता है। बहस जीतने से ज़्यादा बात समझने पर ध्यान, और अपने वादों को समय पर पूरा करना, इस ऊर्जा को सही दिशा देता है।
काम और रुचियाँ
परंपरा इस नक्षत्र को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें लोगों को प्रेरित करना, बोलना या सुंदर चीज़ें बनाना हो: कला, संगीत, लेखन, शिक्षण और प्रचार, जल और यात्रा से जुड़ी रुचियाँ, या ऐसे काम जहाँ किसी विचार के लिए लोगों को साथ लाना हो। ये रुचियों की दिशाएँ हैं, कोई तय पेशा नहीं।
रिश्ते
रिश्तों में परंपरा इन लोगों को गर्मजोशी भरा और उदार मानती है। वे अपनों के साथ समय बिताना, घूमना और छोटी-छोटी खुशियाँ मनाना पसंद करते हैं। साथी की बात को उतना ही महत्व देना जितना अपनी बात को, और असहमति में भी नरमी रखना, रिश्ते को लंबा और मीठा बनाता है।
आस्था
मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार पूर्वाषाढ़ा के देवता आप: (जल) हैं। वैदिक परंपरा में जल को शुद्ध करने वाला और जीवन देने वाला माना गया है। जैसे बारिश सूखी ज़मीन को फिर हरा कर देती है, वैसे ही यह नक्षत्र नई ताज़गी और नवीनता के विचार से जुड़ा है।
नाम-मंत्र: ॐ अद्भ्यो नमः (नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)
चाहें तो गर्मी में किसी प्यासे को पानी पिलाइए या पक्षियों के लिए पानी का बर्तन रखिए। (लोक मान्यता, वैकल्पिक)
नामाक्षर
नामकरण में चंद्रमा के नक्षत्र के पद से पहला अक्षर चुनने की परंपरा है। पूर्वाषाढ़ा के चार पदों के अक्षर:
- पद 1 (धनु): भू
- पद 2 (धनु): धा
- पद 3 (धनु): फा
- पद 4 (धनु): ढा
बच्चे का पद जन्म-समय से तय होता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।
अपनी कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र और पद जानने के लिए मुफ़्त कुंडली बनाइए।