नाड़ी दोष क्या है, और इसके परिहार क्या हैं?

नाड़ी अष्टकूट मिलान का सबसे ज़्यादा अंक (8) वाला कूट है। वर और कन्या के जन्म-नक्षत्र एक ही नाड़ी में हों, तो इसे नाड़ी दोष कहते हैं। मुहूर्त-चिंतामणि इसके तीन परिहार देता है, और ePandit असली अंक के साथ परिहार भी दिखाता है।

स्रोत: Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 34 (नाड़ी-कूट), नाड़ी: आठ कूटों में प्रधान

आपकी कुंडली में

अंक
8 (36 में से; सबसे ज़्यादा अंक वाला कूट)
कब गिना जाता है
वर और कन्या के जन्म-नक्षत्र एक ही नाड़ी में हों
परिहार (मुहूर्त-चिंतामणि)
राशि एक, नक्षत्र अलग · नक्षत्र एक, राशि अलग · नक्षत्र एक, चरण अलग
MC Vivāha-prakaraṇa 36
ePandit में
असली अंक, और साथ में परिहार है या नहीं

परिचय

कुंडली-मिलान में "नाड़ी दोष है" सुनते ही कई परिवार घबरा जाते हैं। यह समझ में आता है, क्योंकि अष्टकूट में नाड़ी के सबसे ज़्यादा अंक (36 में से 8) हैं, और मुहूर्त-चिंतामणि इसे आठ कूटों में सबसे प्रधान कहता है।

पर वही ग्रंथ इसके परिहार भी साफ़ बताता है, यानी वे स्थितियाँ जिनमें यह दोष नहीं माना जाता। इस पेज में हम दोनों बातें शांति से रखते हैं: नाड़ी क्या है, कब दोष गिना जाता है, और कब नहीं।

तीन नाड़ियाँ

हर नक्षत्र तीन में से किसी एक नाड़ी में आता है। मुहूर्त-चिंतामणि (विवाह-प्रकरण, श्लोक 34) यह बँटवारा देता है:

नाड़ी नौ नक्षत्र
आदि अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद
मध्य भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद
अंत्य कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती

अगर वर और कन्या, दोनों के जन्म-नक्षत्र एक ही नाड़ी में हों, तो इस कूट के अंक 0 होते हैं, और परंपरा इसे नाड़ी दोष कहती है। अलग-अलग नाड़ी हो, तो पूरे 8 अंक मिलते हैं। यह जाँच केवल जन्म-नक्षत्र से होती है, इसलिए जन्म-समय थोड़ा अनिश्चित हो तब भी ज़्यादातर हो जाती है, जब तक चंद्रमा नक्षत्र की सीमा पर न हो।

परिहार: जब यह दोष नहीं माना जाता

मुहूर्त-चिंतामणि (विवाह-प्रकरण, श्लोक 36) तीन स्थितियाँ बताता है जिनमें एक नाड़ी होने पर भी दोष नहीं माना जाता:

परिहार ग्रंथ का अपना उदाहरण
राशि एक, नक्षत्र अलग शतभिषा और पूर्वा भाद्रपद (पहले तीन चरण): दोनों कुंभ राशि में, नक्षत्र अलग
नक्षत्र एक, राशि अलग पूर्वा भाद्रपद के पहले तीन चरण (कुंभ) और चौथा चरण (मीन)
नक्षत्र एक, चरण अलग भरणी का पहला चरण और दूसरा चरण

श्लोक कहता है कि इन स्थितियों में गण-दोष भी नहीं माना जाता, और उसकी हिंदी व्याख्या तारा-दोष भी जोड़ती है। कुछ परंपराएँ और भी परिहार मानती हैं; ePandit की स्थिति ऊपर लिखे परिहारों से तय होती है।

ePandit इसे कैसे दिखाता है

परिहार दोष हटाता है, अंक नहीं जोड़ता। इसलिए ePandit नाड़ी के असली अंक (0 या 8) ही दिखाता है, और उसके पास लिखता है कि परिहार है या नहीं, और कौन-सा।

मिलान के सार में ePandit पहले दोष देखता है, फिर कुल अंक (यह हमारा अपना तरीका है, जो अष्टकूट-मिलान के पेज पर लिखा है)। अगर नाड़ी दोष का परिहार न हो, तो सार "बात करके आगे बढ़िए" होता है। इसका अर्थ "मना" नहीं है; इसका अर्थ है कि दोनों परिवार और दोनों साथी खुलकर बात करें। ePandit कभी किसी विवाह को "मत कीजिए" नहीं कहता।

इसका क्या अर्थ नहीं है

  • नाड़ी चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है। यह दो लोगों के स्वभाव, सेहत या भविष्य के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं है।
  • लोक में नाड़ी दोष के बारे में कई डर वाली बातें कही जाती हैं। ePandit उन्हें नहीं दोहराता।
  • गुण अकेले किसी विवाह का फैसला नहीं करते। पूरी कुंडली, दोनों का स्वभाव और आपसी समझ इससे कहीं बड़ी बातें हैं।
  • इसके लिए कोई पूजा, रत्न या ख़र्च ज़रूरी नहीं। अगर कोई परिवार अपनी इच्छा से कुछ करना चाहे, तो /upay पर ₹0 वाले विकल्प पहले दिखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नाड़ी दोष हो तो क्या विवाह नहीं हो सकता?

ऐसा नहीं है। मुहूर्त-चिंतामणि इसके परिहार देता है, और ePandit उन्हें जाँचकर लिखता है। परिहार न हो, तब भी हमारा सार "बात करके आगे बढ़िए" है, "मना" नहीं।

दोनों का नक्षत्र एक है। क्या यह हमेशा नाड़ी दोष है?

नहीं। नक्षत्र एक हो पर राशि अलग हो, या नक्षत्र एक हो पर चरण अलग हो, तो ग्रंथ इसे दोष नहीं मानता।

परिहार होने पर भी 0 अंक क्यों दिख रहे हैं?

क्योंकि परिहार दोष हटाता है, अंक नहीं जोड़ता। हम असली अंक और परिहार, दोनों दिखाते हैं, ताकि कुछ छिपा न रहे।

क्या जन्म-समय के बिना नाड़ी देखी जा सकती है?

हाँ, ज़्यादातर। नाड़ी केवल जन्म-नक्षत्र से निकलती है। अगर उस दिन चंद्रमा नक्षत्र बदल रहा हो, तो सही समय ज़रूरी है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 34 (नाड़ी-कूट) · नाड़ी: आठ कूटों में प्रधान
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 34 (आदि नाड़ी के नौ नक्षत्र) · तीन नाड़ियों के नक्षत्र
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 36 (राशि एक, नक्षत्र भिन्न) · परिहार: राशि एक, नक्षत्र भिन्न
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 36 (नक्षत्र एक, राशि भिन्न) · परिहार: नक्षत्र एक, राशि भिन्न
  • Muhūrta-cintāmaṇi, विवाह-प्रकरण, श्लोक 36 (नक्षत्र एक, चरण भिन्न) · परिहार: नक्षत्र एक, चरण भिन्न

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14