परिचय
कृत्तिका मेष 26°40′ से वृषभ 10°00′ तक फैला है। इसका पहला चरण मेष राशि में है और दूसरा, तीसरा व चौथा चरण वृषभ में। इसलिए कृत्तिका में जन्मे व्यक्ति की चंद्र राशि चरण के हिसाब से मेष या वृषभ होती है। आकाश में यह वही तारा-समूह है जिसे सात बहनों के झुंड के रूप में पहचाना जाता है, और कथा है कि कृत्तिकाओं ने बालक कार्तिकेय को पाला था।
विंशोत्तरी दशा में कृत्तिका के स्वामी सूर्य हैं, जिनकी महादशा 6 वर्ष की होती है। इसका प्रतीक छुरा या अग्नि-शिखा माना जाता है: दोनों ही साफ़ काटने और रोशनी देने की ओर इशारा करते हैं। इसकी योनि मेष (भेड़) है।
स्वभाव (परंपरा मानती है)
परंपरा मानती है कि कृत्तिका का स्वभाव साफ़-साफ़ बात कहने वाला और आत्मसम्मान से भरा होता है। अग्नि जलाती भी है और शुद्ध भी करती है, इसलिए ज्योतिष की परंपरा इस नक्षत्र को सच को अलग छाँटने, फालतू बातों को काट देने और काम में ऊँचे मानक रखने से जोड़ती है। कार्तिकेय को पालने की कथा से इसमें देखभाल और रक्षा करने का भाव भी जुड़ता है।
कृत्तिका का गण राक्षस है। राक्षस गण: यह एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। परंपरा में इसका अर्थ है स्वतंत्र, तीव्र और अपने ढंग से चलने वाला स्वभाव। ये सब प्रवृत्तियाँ हैं; व्यक्ति को समझने के लिए पूरी कुंडली देखी जाती है।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: परंपरा कृत्तिका को हिम्मत, ईमानदारी और नेतृत्व से जोड़ती है। गड़बड़ी को जल्दी पहचान लेना, अनुशासन रखना और अपनों के लिए डटकर खड़े होना इसकी खूबियाँ मानी जाती हैं।
ध्यान रखने की बातें: साफ़ बात कहने की आदत कभी-कभी सुनने वाले को तीखी लग सकती है। परंपरा सलाह देती है कि सच के साथ थोड़ी नरमी और दूसरों की रफ़्तार के लिए थोड़ा धीरज रखना, इस नक्षत्र की रोशनी को गरमाहट में बदल देता है।
काम और रुचियाँ
परंपरा कृत्तिका को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें सटीकता, अनुशासन और नेतृत्व चाहिए: प्रशासन और प्रबंधन, गुणवत्ता जाँच और संपादन, रसोई और भोजन से जुड़े काम, सेना या सुरक्षा जैसी सेवाएँ, या पढ़ाना और रास्ता दिखाना। ये विषय हैं, कोई तय पेशा नहीं; असली दिशा पूरी कुंडली और अपनी रुचि बताती है।
रिश्ते
रिश्तों में परंपरा कृत्तिका को वफ़ादार और रक्षा करने वाले स्वभाव से जोड़ती है। ऐसे लोग अपनों के लिए खड़े रहते हैं और दिखावे से ज़्यादा सच्चाई को महत्व देते हैं। अपनी बात नरमी से कहना और साथी की भावनाओं को सुनने का समय निकालना, रिश्ते में गरमाहट बढ़ाता है।
मिलान में गण, योनि और नाड़ी देखे जाते हैं; राक्षस गण का मतलब किसी रिश्ते के लिए रुकावट नहीं, पूरी तस्वीर दोनों कुंडलियों से बनती है।
आस्था
परंपरा में हर नक्षत्र के एक देवता माने गए हैं। मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार कृत्तिका के देवता अग्नि हैं। अग्नि यज्ञ की अग्नि हैं, जो देवताओं तक आहुति पहुँचाते हैं और हर चीज़ को शुद्ध करते हैं। परंपरा इसी से कृत्तिका को स्पष्टता और शुद्धता से जोड़ती है।
जो चाहें, वे शांत मन से यह नाम-मंत्र ले सकते हैं:
ॐ अग्नये नमः
(नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)
दान (लोक मान्यता, वैकल्पिक): किसी ज़रूरतमंद को गरम, ताज़ा भोजन कराना। इसे किसी डर से नहीं, मन की खुशी से करें; न करें तो भी कोई बात नहीं।
नामाक्षर
अवकहड़ा चक्र की परंपरा में कृत्तिका के चारों चरणों के अक्षर ये हैं:
- चरण 1 (मेष): अ
- चरण 2 (वृषभ): ई
- चरण 3 (वृषभ): उ
- चरण 4 (वृषभ): ए
नाम रखने की परंपरा में जन्म के चरण का अक्षर नाम का पहला अक्षर माना जाता है। यह एक परंपरा है; नाम चुनना परिवार का अपना फ़ैसला है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।
अपनी पूरी तस्वीर के लिए मुफ़्त कुंडली में अपना नक्षत्र, चरण और दशा देखिए।