रोहिणी नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर

रोहिणी 27 नक्षत्रों में चौथा है और पूरी तरह वृषभ राशि में आता है। इसके स्वामी चंद्र और देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं; परंपरा इसे बढ़त, सुंदरता, ठहराव और रचना से जोड़ती है।

स्रोत: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1 (नक्षत्र-देवता)

आपकी कुंडली में

स्वामी (विंशोत्तरी)
चंद्र · महादशा 10 वर्ष
BPHS, विंशोत्तरी दशा
देवता
ब्रह्मा (प्रजापति)
मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1
प्रतीक
रथ या बैलगाड़ी
परंपरा (लोक में प्रचलित प्रतीक)
विस्तार
वृषभ 10°00′ से वृषभ 23°20′ तक
गण
मनुष्य
योनि
सर्प

परिचय

रोहिणी वृषभ राशि में 10°00′ से 23°20′ तक फैला है, इसलिए इसके चारों चरण वृषभ में ही आते हैं। "रोहिणी" का अर्थ है बढ़ने वाली, ऊपर उठने वाली। आकाश में यह लालिमा लिए एक चमकीला तारा है, और पुरानी कथाओं में रोहिणी को चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी कहा गया है।

विंशोत्तरी दशा में रोहिणी के स्वामी चंद्र हैं, जिनकी महादशा 10 वर्ष की होती है। रोहिणी में जन्मे व्यक्ति की पहली महादशा चंद्र की होती है; कितने वर्ष बचे हैं, यह जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति से निकलता है। इसका प्रतीक रथ या बैलगाड़ी है, जो खेती, अनाज और जीवन को आगे ले जाने की ओर इशारा करता है। इसकी योनि सर्प है।

स्वभाव (परंपरा मानती है)

परंपरा मानती है कि रोहिणी का स्वभाव कोमल, स्थिर और सुंदरता को पहचानने वाला होता है। ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं, इसलिए ज्योतिष की परंपरा इस नक्षत्र को कुछ नया बनाने, धीरे-धीरे बढ़ाने और चीज़ों को सँवारने के भाव से जोड़ती है। चंद्र के स्वामी होने से भावनाओं की गहराई और घर-परिवार से लगाव भी इसकी पहचान माना जाता है।

मनुष्य गण होने से परंपरा यहाँ व्यावहारिक और लोगों से जुड़ने वाला मन देखती है। ये सब प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति के बारे में तय बातें नहीं। असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है: लग्न, चंद्र राशि, ग्रह और चल रही दशा।

शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें

शक्तियाँ: परंपरा रोहिणी को धैर्य, रचनात्मकता और दूसरों को सहज महसूस कराने की कला से जोड़ती है। किसी चीज़ को धीरे-धीरे पालकर बड़ा करना, चाहे वह बगीचा हो, घर हो या कोई काम, इसकी खूबी मानी जाती है।

ध्यान रखने की बातें: जो मन आराम और अपनापन चाहता है, वह कभी-कभी बदलाव से हिचकने लगता है या चीज़ों को कसकर पकड़ लेता है। परंपरा सलाह देती है कि नई बातों के लिए थोड़ा खुलापन रखना और हर चीज़ को अपनी पकड़ में न रखना, इस नक्षत्र के गुणों को और सुंदर बनाता है।

काम और रुचियाँ

परंपरा रोहिणी को ऐसे कामों से जोड़ती है जिनमें सुंदरता, बढ़त और ठहराव हो: कला, संगीत और डिज़ाइन, खेती, बागवानी और भोजन, कपड़े, सजावट और घर से जुड़े काम, या ऐसा व्यापार जो धीरे-धीरे भरोसे से बढ़ता है। ये विषय हैं, कोई तय पेशा नहीं; असली दिशा पूरी कुंडली और अपनी रुचि से तय होती है।

रिश्ते

रिश्तों में परंपरा रोहिणी को स्नेह, अपनापन और साथ निभाने से जोड़ती है। ऐसे लोग छोटे-छोटे कामों से प्यार जताते हैं: अच्छा खाना, सुंदर घर, साथ बिताया समय। साथी को भी अपनी जगह और अपने ढंग देना, रिश्ते में भरोसा और हल्कापन बनाए रखता है।

कुंडली मिलान में गण, योनि और नाड़ी जैसे पहलू देखे जाते हैं, पर वे पूरे मिलान का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं।

आस्था

परंपरा में हर नक्षत्र के एक देवता माने गए हैं। मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार रोहिणी के देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं। ब्रह्मा, जिन्हें प्रजापति भी कहा जाता है, सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं। परंपरा इसी से रोहिणी को रचना और बढ़त के भाव से जोड़ती है।

जो चाहें, वे शांत मन से यह नाम-मंत्र ले सकते हैं:

ॐ ब्रह्मणे नमः

(नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)

दान (लोक मान्यता, वैकल्पिक): घर के पास या किसी सार्वजनिक जगह पर एक पौधा लगाना और उसकी देखभाल करना। इसे किसी डर से नहीं, मन की खुशी से करें; न करें तो भी कोई बात नहीं।

नामाक्षर

अवकहड़ा चक्र की परंपरा में रोहिणी के चारों चरणों के अक्षर ये हैं:

  • चरण 1 (वृषभ): ओ
  • चरण 2 (वृषभ): वा
  • चरण 3 (वृषभ): वी
  • चरण 4 (वृषभ): वू

नाम रखने की परंपरा में जन्म के चरण का अक्षर नाम का पहला अक्षर माना जाता है। यह एक परंपरा है; नाम चुनना परिवार का अपना फ़ैसला है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।

अपनी पूरी तस्वीर के लिए मुफ़्त कुंडली में अपना नक्षत्र, चरण और दशा देखिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रोहिणी नक्षत्र किस राशि में आता है?

रोहिणी पूरी तरह वृषभ राशि में है, 10°00′ से 23°20′ तक। इसलिए रोहिणी में जन्मे हर व्यक्ति की चंद्र राशि वृषभ होती है।

रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी दशा में रोहिणी के स्वामी चंद्र हैं। चंद्र की महादशा 10 वर्ष की होती है, और रोहिणी में जन्म होने पर जीवन इसी महादशा से शुरू होता है।

रोहिणी नक्षत्र के देवता कौन हैं?

मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार रोहिणी के देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं, जो सृष्टि के रचयिता माने जाते हैं।

रोहिणी नक्षत्र के नामाक्षर कौन-से हैं?

चरण 1: ओ, चरण 2: वा, चरण 3: वी, चरण 4: वू। अपना चरण और अक्षर नामाक्षर कैलकुलेटर से देखिए।

क्या रोहिणी अच्छा नक्षत्र है?

परंपरा में कोई भी नक्षत्र अपने आप में अच्छा या बुरा नहीं होता। रोहिणी की अपनी प्रवृत्तियाँ हैं, और जीवन की तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है, एक नक्षत्र से नहीं।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • मुहूर्त-चिंतामणि · नक्षत्र-प्रकरण 1 (नक्षत्र-देवता)
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (Santhanam अनुवाद) · विंशोत्तरी दशा: नक्षत्र-स्वामी और दशा-वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13