परिचय
वृषभ राशिचक्र की दूसरी राशि है, निरयन राशिचक्र में 30° से 60° तक। वृषभ का प्रतीक बैल है, और परंपरा इसे ठहराव, धैर्य और सुंदर चीज़ों की कद्र से जोड़ती है। इसके स्वामी शुक्र हैं, तत्व पृथ्वी है, स्वभाव स्थिर है और यह स्त्री (सम) राशि है। इसमें कृत्तिका (चरण 2,3,4), रोहिणी (चरण 1,2,3,4) और मृगशिरा (चरण 1,2) आते हैं।
उत्तर भारत में जब कोई कहता है "मेरी राशि वृषभ है", तो उसका मतलब चंद्र राशि से होता है: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। नाम का पहला अक्षर, रोज़ का राशिफल और गुण मिलान, तीनों इसी चंद्र राशि से देखे जाते हैं।
ध्यान रखें: निरयन वृषभ की तारीखें पश्चिमी Taurus की तारीखों से अलग हैं; यह फ़र्क नीचे सवाल-जवाब में समझाया गया है।
स्वभाव
पृथ्वी तत्व, स्थिर स्वभाव और शुक्र के स्वामित्व के कारण ज्योतिष की परंपरा वृषभ को शांत, धीरज वाला और व्यावहारिक स्वभाव मानती है। माना जाता है कि वृषभ चंद्र राशि वाले सोच-समझकर चलते हैं, जल्दी नहीं बदलते और जो चीज़ अपना लेते हैं उसे लंबे समय तक निभाते हैं। अच्छा खाना, संगीत, साफ़-सुथरा घर और आराम उन्हें सुकून देते हैं।
फिर भी यह केवल एक झुकाव है, किसी व्यक्ति के बारे में पक्का फ़ैसला नहीं। एक ही राशि के दो लोग बहुत अलग हो सकते हैं, क्योंकि लग्न, नक्षत्र, भाव और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: परंपरा के अनुसार इस राशि से जुड़े गुण हैं: धैर्य, भरोसेमंद होना, पैसों और साधनों को सँभालने की समझ, और सुंदरता व कला की परख।
ध्यान रखने की बातें: स्थिरता कभी-कभी ज़िद या बदलाव से हिचक का रूप ले सकती है। नई परिस्थिति को थोड़ा खुले मन से देखना और आराम की आदतों में संतुलन रखना अच्छा रहता है।
ये दोनों पहलू एक ही स्वभाव के दो रूप हैं, कोई कमी नहीं।
काम और रुचियाँ
ज्योतिष की परंपरा वृषभ को इन विषयों से जोड़ती है: ऐसे काम जिनमें धैर्य, सौंदर्य-बोध या साधनों की देखभाल चाहिए: लेखा-जोखा और वित्त, खेती-बाग़बानी, खान-पान, कला, संगीत, डिज़ाइन, और ऐसे क्षेत्र जहाँ धीरे-धीरे कुछ टिकाऊ बनाया जाता हो। यह कोई एक पेशा तय नहीं करता; काम के लिए दशम भाव, दशा और पूरी कुंडली देखी जाती है।
रिश्ते
परंपरा वृषभ को वफ़ादार और गर्मजोशी वाले जुड़ाव की राशि मानती है। माना जाता है कि ये लोग रिश्ते में भरोसा धीरे बनाते हैं पर फिर उसे पूरे मन से निभाते हैं, और प्यार अक्सर देखभाल और साथ बिताए समय से जताते हैं। अपनी बात समय पर कह देना रिश्ते को और सहज बनाता है। रिश्तों की असली तस्वीर सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र और पूरी कुंडली से बनती है, अकेली राशि से नहीं।
जब वृषभ लग्न हो
लग्न और चंद्र राशि अलग चीज़ें हैं। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उग रही थी। यह लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और स्थान चाहिए, जबकि चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है।
जब वृषभ लग्न हो, तो शुक्र लग्नेश (लग्न के स्वामी) बनते हैं, और कुंडली में उनकी स्थिति पूरी कुंडली के लिए अहम हो जाती है। परंपरा वृषभ लग्न को धीरज वाले, व्यावहारिक और जीवन की सादी खुशियों की कद्र करने वाले दृष्टिकोण से जोड़ती है। आपकी चंद्र राशि और लग्न एक भी हो सकते हैं और अलग भी; दोनों अपनी-अपनी बात कहते हैं।
नामाक्षर
अवकहड़ा चक्र की परंपरा में वृषभ के नौ नामाक्षर हैं: ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो। हर अक्षर एक नक्षत्र-चरण से जुड़ा है:
- कृत्तिका: चरण 2: ई, चरण 3: उ, चरण 4: ए
- रोहिणी: चरण 1: ओ, चरण 2: वा, चरण 3: वी, चरण 4: वू
- मृगशिरा: चरण 1: वे, चरण 2: वो
नामकरण में जन्म के चंद्रमा का नक्षत्र-चरण देखकर अक्षर चुना जाता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।