परिचय
वृश्चिक राशिचक्र की आठवीं राशि है, निरयन राशिचक्र में 210° से 240° तक। वृश्चिक का प्रतीक बिच्छू है, और परंपरा इसे गहराई, लगन और भीतरी शक्ति से जोड़ती है। इसके स्वामी मंगल हैं, तत्व जल है, स्वभाव स्थिर है और यह स्त्री (सम) राशि है। इसमें विशाखा (चरण 4), अनुराधा (चरण 1,2,3,4) और ज्येष्ठा (चरण 1,2,3,4) आते हैं।
उत्तर भारत में जब कोई कहता है "मेरी राशि वृश्चिक है", तो उसका मतलब चंद्र राशि से होता है: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। नाम का पहला अक्षर, रोज़ का राशिफल और गुण मिलान, तीनों इसी चंद्र राशि से देखे जाते हैं।
ध्यान रखें: निरयन वृश्चिक की तारीखें पश्चिमी Scorpio की तारीखों से अलग हैं; यह फ़र्क नीचे सवाल-जवाब में समझाया गया है।
स्वभाव
जल तत्व, स्थिर स्वभाव और मंगल के स्वामित्व के कारण ज्योतिष की परंपरा वृश्चिक को गहरी भावनाओं वाला, दृढ़ और भीतर तक सोचने वाला स्वभाव मानती है। माना जाता है कि वृश्चिक चंद्र राशि वाले बात की तह तक जाना पसंद करते हैं, अपनी भावनाएँ हर किसी से नहीं कहते, और जो ठान लेते हैं उसे पूरा करने में पूरी लगन लगाते हैं।
फिर भी यह केवल एक झुकाव है, किसी व्यक्ति के बारे में पक्का फ़ैसला नहीं। एक ही राशि के दो लोग बहुत अलग हो सकते हैं, क्योंकि लग्न, नक्षत्र, भाव और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: परंपरा के अनुसार इस राशि से जुड़े गुण हैं: लगन, गहरी समझ, रहस्य सँभालने का भरोसा, और कठिन समय में भी डटे रहना।
ध्यान रखने की बातें: भावनाओं को भीतर रखने की आदत कभी-कभी मन पर बोझ बन सकती है, और पुरानी बात भुलाना कठिन लग सकता है। भरोसेमंद लोगों से मन की बात करना और माफ़ कर देना मन को हल्का करता है।
ये दोनों पहलू एक ही स्वभाव के दो रूप हैं, कोई कमी नहीं।
काम और रुचियाँ
ज्योतिष की परंपरा वृश्चिक को इन विषयों से जोड़ती है: ऐसे काम जिनमें गहराई से खोज, धैर्य या गोपनीयता चाहिए: शोध और जाँच, विज्ञान, मनोविज्ञान और परामर्श, वित्त और बीमा, और ऐसे क्षेत्र जहाँ छिपी बातों को समझना होता है। यह कोई एक पेशा तय नहीं करता; काम के लिए दशम भाव, दशा और पूरी कुंडली देखी जाती है।
रिश्ते
परंपरा वृश्चिक को गहरे और पूरे मन से जुड़ने वाली राशि मानती है। माना जाता है कि ये लोग रिश्ते में सच्चाई और वफ़ादारी को सबसे ऊपर रखते हैं और एक बार भरोसा हो जाए तो पूरी तरह निभाते हैं। शक करने के बजाय खुलकर बात करना रिश्ते को और सुरक्षित बनाता है। रिश्तों की असली तस्वीर सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र और पूरी कुंडली से बनती है, अकेली राशि से नहीं।
जब वृश्चिक लग्न हो
लग्न और चंद्र राशि अलग चीज़ें हैं। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उग रही थी। यह लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और स्थान चाहिए, जबकि चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है।
जब वृश्चिक लग्न हो, तो मंगल लग्नेश (लग्न के स्वामी) बनते हैं, और कुंडली में उनकी स्थिति पूरी कुंडली के लिए अहम हो जाती है। परंपरा वृश्चिक लग्न को गहराई से सोचने वाले, दृढ़ और अपने लक्ष्य पर टिके रहने वाले दृष्टिकोण से जोड़ती है। आपकी चंद्र राशि और लग्न एक भी हो सकते हैं और अलग भी; दोनों अपनी-अपनी बात कहते हैं।
नामाक्षर
अवकहड़ा चक्र की परंपरा में वृश्चिक के नौ नामाक्षर हैं: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू। हर अक्षर एक नक्षत्र-चरण से जुड़ा है:
- विशाखा: चरण 4: तो
- अनुराधा: चरण 1: ना, चरण 2: नी, चरण 3: नू, चरण 4: ने
- ज्येष्ठा: चरण 1: नो, चरण 2: या, चरण 3: यी, चरण 4: यू
नामकरण में जन्म के चंद्रमा का नक्षत्र-चरण देखकर अक्षर चुना जाता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।