परिचय
तुला राशिचक्र की सातवीं राशि है, निरयन राशिचक्र में 180° से 210° तक। तुला का प्रतीक तराज़ू है, और परंपरा इसे संतुलन, न्याय और मेल-जोल से जोड़ती है। इसके स्वामी शुक्र हैं, तत्व वायु है, स्वभाव चर है और यह पुरुष (विषम) राशि है। इसमें चित्रा (चरण 3,4), स्वाती (चरण 1,2,3,4) और विशाखा (चरण 1,2,3) आते हैं।
उत्तर भारत में जब कोई कहता है "मेरी राशि तुला है", तो उसका मतलब चंद्र राशि से होता है: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। नाम का पहला अक्षर, रोज़ का राशिफल और गुण मिलान, तीनों इसी चंद्र राशि से देखे जाते हैं।
ध्यान रखें: निरयन तुला की तारीखें पश्चिमी Libra की तारीखों से अलग हैं; यह फ़र्क नीचे सवाल-जवाब में समझाया गया है।
स्वभाव
वायु तत्व, चर स्वभाव और शुक्र के स्वामित्व के कारण ज्योतिष की परंपरा तुला को मिलनसार, न्यायप्रिय और सौंदर्य पसंद स्वभाव से जोड़ती है। माना जाता है कि तुला चंद्र राशि वाले दोनों पक्षों की बात सुनना पसंद करते हैं, झगड़े के बजाय बीच का रास्ता खोजते हैं और अपने आसपास सुंदरता व शांति चाहते हैं।
फिर भी यह केवल एक झुकाव है, किसी व्यक्ति के बारे में पक्का फ़ैसला नहीं। एक ही राशि के दो लोग बहुत अलग हो सकते हैं, क्योंकि लग्न, नक्षत्र, भाव और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: परंपरा के अनुसार इस राशि से जुड़े गुण हैं: संतुलित सोच, शिष्टता, लोगों को जोड़ने की कला, और कला व सौंदर्य की समझ।
ध्यान रखने की बातें: सबको खुश रखने की चाह कभी-कभी फ़ैसला टालने का कारण बन सकती है। अपनी पसंद को भी उतना ही महत्व देना और समय पर निर्णय लेना अच्छा रहता है।
ये दोनों पहलू एक ही स्वभाव के दो रूप हैं, कोई कमी नहीं।
काम और रुचियाँ
ज्योतिष की परंपरा तुला को इन विषयों से जोड़ती है: ऐसे काम जिनमें मेल-जोल, मध्यस्थता, सौंदर्य या साझेदारी शामिल हो: क़ानून और मध्यस्थता, परामर्श, डिज़ाइन, फ़ैशन और कला, जन-संपर्क, और साझेदारी में चलने वाला व्यापार। यह कोई एक पेशा तय नहीं करता; काम के लिए दशम भाव, दशा और पूरी कुंडली देखी जाती है।
रिश्ते
परंपरा तुला को साझेदारी को बहुत महत्व देने वाली राशि मानती है। माना जाता है कि ये लोग रिश्ते में बराबरी, शिष्टता और मीठी बातचीत चाहते हैं और साथी को खुश रखने की कोशिश करते हैं। अपनी असहमति भी प्यार से कह देना रिश्ते को सच्चा और संतुलित रखता है। रिश्तों की असली तस्वीर सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र और पूरी कुंडली से बनती है, अकेली राशि से नहीं।
जब तुला लग्न हो
लग्न और चंद्र राशि अलग चीज़ें हैं। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उग रही थी। यह लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और स्थान चाहिए, जबकि चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है।
जब तुला लग्न हो, तो शुक्र लग्नेश (लग्न के स्वामी) बनते हैं, और कुंडली में उनकी स्थिति पूरी कुंडली के लिए अहम हो जाती है। परंपरा तुला लग्न को संतुलित, मिलनसार और रिश्तों को महत्व देने वाले दृष्टिकोण से जोड़ती है। आपकी चंद्र राशि और लग्न एक भी हो सकते हैं और अलग भी; दोनों अपनी-अपनी बात कहते हैं।
नामाक्षर
अवकहड़ा चक्र की परंपरा में तुला के नौ नामाक्षर हैं: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते। हर अक्षर एक नक्षत्र-चरण से जुड़ा है:
- चित्रा: चरण 3: रा, चरण 4: री
- स्वाती: चरण 1: रू, चरण 2: रे, चरण 3: रो, चरण 4: ता
- विशाखा: चरण 1: ती, चरण 2: तू, चरण 3: ते
नामकरण में जन्म के चंद्रमा का नक्षत्र-चरण देखकर अक्षर चुना जाता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।