चित्रा नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर

चित्रा 27 नक्षत्रों में चौदहवाँ है; इसके पहले दो चरण कन्या में और बाकी दो तुला में आते हैं। इसके स्वामी मंगल और देवता त्वष्टा (विश्वकर्मा) हैं; परंपरा इसे रचना, सौंदर्य-बोध और निखार से जोड़ती है।

स्रोत: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)

आपकी कुंडली में

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)
मंगल · महादशा 7 वर्ष
BPHS, विंशोत्तरी दशा
देवता
त्वष्टा (विश्वकर्मा)
मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1
प्रतीक
चमकता रत्न या मोती
परंपरा (लोक में प्रचलित प्रतीक)
विस्तार
कन्या 23°20′ से तुला 6°40′ तक
गण
राक्षस (पुराने वर्गीकरण का नाम; बुराई का संकेत नहीं)
योनि
व्याघ्र (बाघ)

परिचय

चित्रा 27 नक्षत्रों में चौदहवाँ नक्षत्र है। यह कन्या 23°20′ से तुला 6°40′ तक फैला है: पहले दो चरण कन्या राशि में और बाक़ी दो तुला राशि में। इसके विंशोत्तरी स्वामी मंगल हैं, जिनकी महादशा 7 वर्ष की होती है। मुहूर्त-चिंतामणि इसके देवता त्वष्टा (विश्वकर्मा) बताता है। लोक में इसका प्रतीक चमकता रत्न या मोती माना जाता है।

जन्म नक्षत्र वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा होता है। इसी से पहली महादशा और नाम का अक्षर तय होते हैं।

स्वभाव (परंपरा मानती है)

त्वष्टा, जिन्हें विश्वकर्मा भी कहा जाता है, परंपरा में देवताओं के शिल्पी माने जाते हैं, जो सुंदर और काम की चीज़ें गढ़ते हैं। इसलिए ज्योतिष की परंपरा चित्रा को रचना, सौंदर्य-बोध, बनावट की समझ और किसी चीज़ को सुंदर रूप देने की लगन से जोड़ती है। चमकते रत्न का प्रतीक आकर्षण और निखार की ओर इशारा करता है।

राक्षस गण: यह एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। इसका अर्थ स्वतंत्र और तीव्र स्वभाव माना जाता है। स्वामी मंगल ऊर्जा और पहल के कारक माने जाते हैं।

यह सब केवल एक झुकाव है। व्यक्ति को समझने के लिए पूरी कुंडली, लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा साथ देखे जाते हैं।

शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें

शक्तियाँ: परंपरा इस नक्षत्र को रचनात्मकता, बारीक नज़र, मेहनत से काम पूरा करने की ऊर्जा और अपना अलग अंदाज़ रखने से जोड़ती है।

ध्यान रखने की बातें: हर चीज़ को पूरी तरह सही बनाने की चाह कभी-कभी काम में देर या बेचैनी ला सकती है। जल्दी नतीजा चाहने से धैर्य की परीक्षा हो सकती है। "अच्छा भी काफ़ी है" यह मान लेना और दूसरों के तरीक़े को भी जगह देना यहाँ सहज संतुलन है। ये बातें किसी पर कितनी लागू होती हैं, यह पूरी कुंडली ही बताती है।

काम और रुचियाँ

परंपरा ऐसे कामों को चित्रा से जोड़ती है जिनमें कुछ बनाना, सजाना या गढ़ना हो। वास्तुकला, इंजीनियरिंग, डिज़ाइन, चित्रकला, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़ैशन, गहनों या हस्तशिल्प से जुड़े काम, इनमें रुचि की बात कही जाती है। यह केवल विषयों का संकेत है; कोई एक पेशा तय नहीं होता। दशम भाव, उसके स्वामी और दशा भी देखे जाते हैं।

रिश्ते

रिश्तों में परंपरा चित्रा को उत्साह, अभिव्यक्ति और घर को सुंदर बनाने की चाह से जोड़ती है। माना जाता है कि ऐसे लोग रिश्ते में नयापन और रंग लाते हैं। साथी को अपनी जगह देना और धीरज से बात करना रिश्ते को और सहज बनाता है।

कुंडली-मिलान में गण, योनि और नाड़ी जन्म नक्षत्र से आते हैं, पर मिलान पूरी तस्वीर देखकर ही समझा जाता है।

आस्था

चित्रा के देवता त्वष्टा (विश्वकर्मा) हैं। परंपरा में अपने औज़ारों, किताबों और काम की जगह को साफ़ और सम्मान से रखना भी उनकी आराधना जैसा माना जाता है।

ॐ त्वष्ट्रे नमः

(नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)

दान (लोक मान्यता, वैकल्पिक): किसी बच्चे को चित्रकारी का सामान या कॉपी-किताबें देना।

नामाक्षर

परंपरा में नक्षत्र के हर चरण का एक अक्षर होता है, और नाम उसी अक्षर से शुरू करने का चलन है। चित्रा के अक्षर ये हैं:

  • चरण 1: पे
  • चरण 2: पो
  • चरण 3: रा
  • चरण 4: री

चरण जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति से तय होता है, इसलिए नक्षत्र के साथ चरण भी देखना ज़रूरी है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।

अपनी पूरी तस्वीर देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाइए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चित्रा किस राशि में है?

यह दो राशियों में फैला है। चरण 1 और 2 कन्या राशि में हैं, चरण 3 और 4 तुला राशि में। इसलिए एक ही नक्षत्र में चंद्र राशि चरण के हिसाब से अलग हो सकती है।

चित्रा का स्वामी मंगल है, तो क्या इससे मंगल-विचार जुड़ता है?

नहीं। मंगल-विचार केवल इससे होता है कि कुंडली में मंगल ग्रह लग्न, चंद्रमा और शुक्र से किस भाव में है, जन्म नक्षत्र के स्वामी से नहीं। चित्रा में जन्म होने से अपने आप कुछ नहीं जुड़ता।

चित्रा का गण राक्षस है, क्या यह चिंता की बात है?

नहीं। राक्षस गण एक पुराने वर्गीकरण का नाम है, बुराई का संकेत नहीं। परंपरा इसे स्वतंत्र और तीव्र स्वभाव से जोड़ती है।

त्वष्टा और विश्वकर्मा क्या एक ही हैं?

परंपरा में त्वष्टा को देवताओं का शिल्पी कहा जाता है, और लोक में उन्हें विश्वकर्मा के रूप में भी याद किया जाता है। इसलिए दोनों नाम साथ लिखे जाते हैं।

चित्रा के नामाक्षर कौन-से हैं?

चरण 1 से 4 तक: पे, पो, रा, री। पहले दो कन्या राशि में और बाद के दो तुला राशि में आते हैं।

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आधार ग्रंथ

  • मुहूर्त-चिंतामणि · नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (Santhanam अनुवाद) · विंशोत्तरी दशा (दशा-स्वामी और वर्ष)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13