हस्त नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और नामाक्षर

हस्त 27 नक्षत्रों में तेरहवाँ है और पूरी तरह कन्या राशि में आता है। इसके स्वामी चंद्र और देवता सूर्य (सविता) हैं; परंपरा इसे हाथ के हुनर, सूझ-बूझ और मदद से जोड़ती है।

स्रोत: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)

आपकी कुंडली में

स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)
चंद्र · महादशा 10 वर्ष
BPHS, विंशोत्तरी दशा
देवता
सूर्य (सविता)
मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1
प्रतीक
हाथ (हथेली)
परंपरा (लोक में प्रचलित प्रतीक)
विस्तार
कन्या 10°00′ से कन्या 23°20′ तक
गण
देव
योनि
महिष (भैंस)

परिचय

हस्त 27 नक्षत्रों में तेरहवाँ नक्षत्र है। यह पूरा कन्या राशि में आता है, कन्या 10°00′ से कन्या 23°20′ तक। इसके विंशोत्तरी स्वामी चंद्र हैं, जिनकी महादशा 10 वर्ष की होती है। मुहूर्त-चिंतामणि इसके देवता सूर्य (सविता) बताता है। लोक में इसका प्रतीक हाथ (हथेली) माना जाता है, और "हस्त" का अर्थ भी हाथ ही है।

जन्म नक्षत्र वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा होता है। इसी से पहली महादशा और नाम का अक्षर तय होते हैं।

स्वभाव (परंपरा मानती है)

हाथ का प्रतीक होने से ज्योतिष की परंपरा हस्त को हुनर, बारीकी से काम करने, सूझ-बूझ और मदद के लिए आगे बढ़े हाथ से जोड़ती है। सविता सूर्य का वह रूप हैं जो सुबह जगाते और प्रेरणा देते हैं; गायत्री मंत्र भी सविता को ही समर्पित है। इसलिए परंपरा इस नक्षत्र को नई शुरुआत, सीखने और समझदारी से भी जोड़ती है।

इसका गण देव है, जिसे परंपरा कोमल, सहयोगी स्वभाव से जोड़ती है। स्वामी चंद्र मन और भावनाओं के कारक माने जाते हैं, इसलिए हस्त को संवेदनशील और हाज़िरजवाब भी कहा जाता है।

यह सब केवल एक झुकाव है। व्यक्ति को समझने के लिए पूरी कुंडली, लग्न, ग्रहों की स्थिति और दशा साथ देखे जाते हैं।

शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें

शक्तियाँ: परंपरा इस नक्षत्र को हाथ के हुनर, व्यावहारिक समझ, हास्य-बोध और सेवा-भाव से जोड़ती है। माना जाता है कि ऐसे लोग कम साधनों में भी रास्ता निकाल लेते हैं।

ध्यान रखने की बातें: मन चंद्र की तरह बदलता रह सकता है, इसलिए कभी-कभी छोटी बातों पर ज़्यादा सोचना हो सकता है। हर चीज़ अपने हाथ में रखने की आदत भी थकान दे सकती है। थोड़ा भरोसा दूसरों पर रखना और मन की बात कह देना यहाँ अच्छा संतुलन है। ये बातें किसी पर कितनी लागू होती हैं, यह पूरी कुंडली ही बताती है।

काम और रुचियाँ

परंपरा ऐसे कामों को हस्त से जोड़ती है जिनमें हाथ का हुनर, बारीकी और सूझ-बूझ हो। शिल्प और कारीगरी, लेखन, डिज़ाइन, व्यापार, शिक्षा, परामर्श, या ऐसे काम जिनमें लोगों की सीधी मदद हो, इनमें रुचि की बात कही जाती है। यह केवल विषयों का संकेत है; कोई एक पेशा तय नहीं होता। दशम भाव, उसके स्वामी और दशा भी देखे जाते हैं।

रिश्ते

रिश्तों में परंपरा हस्त को परवाह और व्यावहारिक मदद से जोड़ती है। माना जाता है कि ऐसे लोग प्यार अक्सर शब्दों से ज़्यादा काम से जताते हैं: किसी का काम आसान कर देना, छोटी ज़रूरतों का ध्यान रखना। कभी-कभी भावनाओं को शब्दों में कह देना भी साथी को अच्छा लगता है।

कुंडली-मिलान में गण, योनि और नाड़ी जन्म नक्षत्र से आते हैं, पर मिलान पूरी तस्वीर देखकर ही समझा जाता है।

आस्था

हस्त के देवता सूर्य (सविता) हैं। परंपरा में उगते सूर्य को प्रणाम करना और दिन की शुरुआत उनके नाम से करना एक सरल, सुंदर अभ्यास माना जाता है।

ॐ सवित्रे नमः

(नक्षत्र-देवता: मुहूर्त-चिंतामणि, नक्षत्र-प्रकरण 1; नाम-मंत्र परंपरा में प्रचलित)

दान (लोक मान्यता, वैकल्पिक): गर्मी में पक्षियों के लिए पानी रखना। इसे किसी डर से नहीं, मन की खुशी से करें; न करें तो भी कोई बात नहीं।

नामाक्षर

परंपरा में नक्षत्र के हर चरण का एक अक्षर होता है, और नाम उसी अक्षर से शुरू करने का चलन है। हस्त के अक्षर ये हैं:

  • चरण 1: पू
  • चरण 2: ष
  • चरण 3: ण
  • चरण 4: ठ

चरण जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति से तय होता है, इसलिए नक्षत्र के साथ चरण भी देखना ज़रूरी है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।

अपनी पूरी तस्वीर देखने के लिए अपनी मुफ़्त कुंडली बनाइए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हस्त नक्षत्र के देवता कौन हैं?

मुहूर्त-चिंतामणि इसके देवता सूर्य (सविता) बताता है। सविता सूर्य का प्रेरणा देने वाला रूप हैं; गायत्री मंत्र भी उन्हीं को समर्पित है।

हस्त का स्वामी ग्रह कौन है?

विंशोत्तरी दशा में इसके स्वामी चंद्र हैं, जिनकी महादशा 10 वर्ष की होती है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली महादशा चंद्र की होती है।

ष, ण, ठ से नाम कैसे रखें?

इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम कम हैं। ऐसे में कई परिवार इन्हीं ध्वनियों वाले नाम चुनते हैं या परिवार के पंडित जी से सलाह लेते हैं। नाम का अक्षर एक परंपरा है, कोई बंधन नहीं।

देव गण का क्या अर्थ है?

गण तीन हैं: देव, मनुष्य और राक्षस। यह एक पुराना वर्गीकरण है। परंपरा देव गण को कोमल और सहयोगी स्वभाव से जोड़ती है। मिलान में यह कई बिंदुओं में से एक है।

हस्त के नामाक्षर कौन-से हैं?

चरण 1 से 4 तक: पू, ष, ण, ठ। चारों चरण कन्या राशि में हैं।

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आधार ग्रंथ

  • मुहूर्त-चिंतामणि · नक्षत्र-प्रकरण, श्लोक 1 (नक्षत्र-देवता)
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (Santhanam अनुवाद) · विंशोत्तरी दशा (दशा-स्वामी और वर्ष)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13