चतुर्विंशांश (D24): विद्या और पढ़ाई का वर्ग

चतुर्विंशांश (D24), जिसे सिद्धांश भी कहते हैं, हर राशि को 1°15′ के चौबीस भागों में बाँटता है। परंपरा इसे विद्या, पढ़ाई और ज्ञान से जोड़ती है।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

आपकी कुंडली में

विभाजन
D24 · हर राशि के 24 भाग
एक भाग
1°15′
गणना का नियम (पराशर)
विषम राशि में गिनती सिंह से, सम राशि में कर्क से।
BPHS ch. 6
परंपरा किस विषय से जोड़ती है
विद्या, पढ़ाई, ज्ञान
BPHS ch. 6–7
जन्म-समय की संवेदनशीलता (औसत)
लगभग 5 मिनट (लग्न के लिए)

यह क्या है

चतुर्विंशांश में हर राशि के चौबीस बराबर हिस्से होते हैं, हर हिस्सा 1 अंश 15 कला का। इसकी गिनती केवल दो राशियों से शुरू होती है: विषम राशियों में सिंह से और सम राशियों में कर्क से।

कैसे निकाला जाता है

नियम: विषम राशि में पहला हिस्सा सिंह का, सम राशि में कर्क का; फिर आगे क्रम से, और 24 हिस्सों में राशिचक्र दो बार घूमता है।

उदाहरण: कोई ग्रह मेष के 17° पर है। 17 ÷ 1.25 = 13.6, यानी चौदहवाँ हिस्सा। मेष विषम है, इसलिए सिंह से चौदहवीं राशि: कन्या (सिंह से बारह राशि पूरी कर, फिर सिंह, कन्या)। D24 में यह ग्रह कन्या में होगा। वृषभ के 17° पर होता, तो कर्क से चौदहवीं राशि, यानी सिंह।

परंपरा इसमें क्या देखती है

पराशर चतुर्विंशांश को विद्या से जोड़ते हैं। परंपरा इसमें बुध (समझ और भाषा) और गुरु (बृहस्पति) (ज्ञान) की स्थिति, और चौथे व पाँचवें भाव के स्वामी देखती है। इससे यह झलक मिलती है कि किस तरह की पढ़ाई में मन लगता है, जैसे ऐसे विषय जिनमें गणना हो, भाषा हो, या गहरी सोच।

जन्म-समय कितना मायने रखता है

लग्न औसतन हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश आगे बढ़ता है; कुछ राशियाँ जल्दी उदय होती हैं, कुछ धीरे। D24 का एक भाग 1°15′ का है, इसलिए जन्म-समय में लगभग 5 मिनट का अंतर D24 का लग्न बदल सकता है। चंद्रमा एक भाग लगभग सवा दो घंटे में पार करता है। ePandit आपकी कुंडली में हर वर्ग के साथ यह भी दिखाता है कि जन्म-समय कितने मिनट बदलने पर उस वर्ग का लग्न बदलेगा। पाँच मिनट का अंतर आम बात है, इसलिए D24 का लग्न केवल पक्के समय पर पढ़ें।

इसे शांति से कैसे पढ़ें

D24 को एक दूसरी नज़र की तरह पढ़िए, फ़ैसले की तरह नहीं। पहले मुख्य कुंडली (D1) में चौथे और पाँचवें भाव और उनके स्वामियों को देखा जाता है, फिर चल रही दशा को। D24 बस यह देखने में मदद करता है कि वही बात यहाँ भी दिखती है या नहीं। किसी ग्रह का इस वर्ग में किसी ख़ास राशि में होना अकेले कुछ तय नहीं करता। बच्चे की पढ़ाई का रास्ता उसकी रुचि, मेहनत और अच्छे मार्गदर्शन से बनता है; कुंडली को उस पर दबाव न बनने दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या D24 से विषय (विज्ञान, वाणिज्य, कला) चुनना चाहिए?

नहीं। परंपरा इसे रुचि की झलक मानती है, फ़ैसले का आधार नहीं। विषय रुचि, अंक और शिक्षक की सलाह से चुनिए।

D24 को सिद्धांश क्यों कहते हैं?

यह इस वर्ग का दूसरा पारंपरिक नाम है, जो विद्या और सिद्धि के भाव से जुड़ा है।

क्या केवल D24 देखकर कोई बात तय की जा सकती है?

नहीं। D24 मुख्य कुंडली के चौथे-पाँचवें भाव और दशा के साथ ही पढ़ा जाता है।

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आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13