द्वादशांश (D12): माता-पिता का वर्ग

द्वादशांश (D12) हर राशि को 2°30′ के बारह भागों में बाँटता है, जो उसी राशि से क्रम से चलते हैं। परंपरा इसे माता-पिता और उनसे मिली विरासत से जोड़ती है।

स्रोत: Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.), अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

आपकी कुंडली में

विभाजन
D12 · हर राशि के 12 भाग
एक भाग
2°30′
गणना का नियम (पराशर)
गिनती उसी राशि से शुरू होकर बारहों राशियों में क्रम से।
BPHS ch. 6
परंपरा किस विषय से जोड़ती है
माता-पिता
BPHS ch. 6–7
जन्म-समय की संवेदनशीलता (औसत)
लगभग 10 मिनट (लग्न के लिए)

यह क्या है

द्वादशांश में हर राशि के बारह बराबर हिस्से होते हैं, हर हिस्सा 2 अंश 30 कला का। इसकी खास बात यह है कि हर राशि के अंदर पूरा राशिचक्र एक बार घूम जाता है: पहला हिस्सा उसी राशि का, आख़िरी हिस्सा उससे बारहवीं राशि का।

कैसे निकाला जाता है

नियम: गिनती उसी राशि से शुरू होती है और बारह राशियों में क्रम से चलती है।

उदाहरण: कोई ग्रह मेष के 17° पर है। 17 ÷ 2.5 = 6.8, यानी सातवाँ हिस्सा। मेष से सातवीं राशि तुला है, इसलिए D12 में यह ग्रह तुला में होगा।

परंपरा इसमें क्या देखती है

पराशर द्वादशांश को माता-पिता से जोड़ते हैं। परंपरा इसमें सूर्य को पिता का और चंद्रमा को माता का कारक मानकर देखती है, साथ ही चौथे भाव (माता) और नौवें भाव (पिता, कुछ परंपराओं में दसवाँ भी) के स्वामियों को। यह माता-पिता से मिले संस्कार, सहारे और जुड़ाव के विषय की एक झलक मानी जाती है।

जन्म-समय कितना मायने रखता है

लग्न औसतन हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश आगे बढ़ता है; कुछ राशियाँ जल्दी उदय होती हैं, कुछ धीरे। D12 का एक भाग 2°30′ का है, इसलिए जन्म-समय में लगभग 10 मिनट का अंतर D12 का लग्न बदल सकता है। चंद्रमा एक भाग लगभग 4–5 घंटे में पार करता है। ePandit आपकी कुंडली में हर वर्ग के साथ यह भी दिखाता है कि जन्म-समय कितने मिनट बदलने पर उस वर्ग का लग्न बदलेगा। D12 का लग्न जन्म-समय पक्का होने पर ही पढ़ें।

इसे शांति से कैसे पढ़ें

D12 को एक दूसरी नज़र की तरह पढ़िए, फ़ैसले की तरह नहीं। पहले मुख्य कुंडली (D1) में चौथे और नौवें भाव और उनके स्वामियों को देखा जाता है, फिर चल रही दशा को। D12 बस यह देखने में मदद करता है कि वही बात यहाँ भी दिखती है या नहीं। किसी ग्रह का इस वर्ग में किसी ख़ास राशि में होना अकेले कुछ तय नहीं करता। माता-पिता की सेहत या उम्र के बारे में कुंडली से कोई निष्कर्ष न निकालें; सेहत के लिए डॉक्टर ही पहला सहारा हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

D12 में माता और पिता अलग-अलग कैसे देखे जाते हैं?

परंपरा चंद्रमा और चौथे भाव को माता से, सूर्य और नौवें भाव को पिता से जोड़ती है, और D12 में इनकी स्थिति देखती है।

क्या D12 पूर्वजों से भी जुड़ा है?

कुछ ज्योतिषी इसमें पूरी पारिवारिक विरासत की झलक देखते हैं। मूल ग्रंथ इसे माता-पिता से जोड़ता है, और ePandit इसी तक सीमित रहता है।

क्या केवल D12 देखकर कोई बात तय की जा सकती है?

नहीं। D12 मुख्य कुंडली (D1) और दशा के साथ एक सहायक नज़र है।

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आधार ग्रंथ

  • Bṛhat Parāśara Horā Śāstra (BPHS, Santhanam tr.) · अध्याय 6 (सोलह वर्ग: गणना और विषय); अध्याय 7 (वर्ग-समूह और विंशोपक)

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13