परिचय
"पंचमहापुरुष" यानी पाँच तरह के महान व्यक्तित्व। BPHS (अध्याय 75), फलदीपिका (अध्याय 6) और सारावली (अध्याय 37) तीनों में ये पाँच योग मिलते हैं। सूर्य, चंद्र, राहु और केतु इनमें शामिल नहीं; केवल पाँच तारा-ग्रह, यानी मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, इन्हें बनाते हैं।
हर योग का नियम एक ही ढाँचे पर है: ग्रह अपनी राशि या उच्च राशि में हो, और वह राशि लग्न से केंद्र (1, 4, 7 या 10वाँ भाव) हो।
पाँचों योग और उनकी राशियाँ
| योग | ग्रह | अपनी राशि | उच्च राशि |
|---|---|---|---|
| रुचक | मंगल | मेष, वृश्चिक | मकर |
| भद्र | बुध | मिथुन, कन्या | कन्या |
| हंस | गुरु | धनु, मीन | कर्क |
| मालव्य | शुक्र | वृषभ, तुला | मीन |
| शश | शनि | मकर, कुंभ | तुला |
उदाहरण: मेष लग्न में गुरु कर्क (चौथा भाव) में हो, तो गुरु उच्च भी है और केंद्र में भी, इसलिए हंस योग बनता है।
रमन बताते हैं कि हर लग्न के लिए हर योग संभव नहीं। जैसे शश योग चर और स्थिर लग्नों में ही बन सकता है, द्विस्वभाव लग्नों में नहीं, क्योंकि शनि की राशियाँ उनसे केंद्र में नहीं पड़तीं।
लग्न से या चंद्र से भी?
BPHS (75.1-2) साफ़ कहता है कि ग्रह लग्न से केंद्र में हो। सारावली (37.2) भी अपनी या उच्च राशि में केंद्र की बात करता है।
फलदीपिका (6.4) एक कदम आगे जाता है: जैसे ये योग लग्न से गिने जाते हैं, वैसे ही चंद्रमा से गिनने पर भी बनते हैं। होरा सार की एक टिप्पणी में भी एक उदाहरण कुंडली में मालव्य योग लग्न और चंद्र दोनों से गिना गया है।
ePandit दोनों दिखाता है, पर अलग-अलग: "लग्न से" और "चंद्र से"। जन्म-समय पता न हो तो केवल चंद्र वाला रूप जाँचा जाता है।
परंपरा क्या मानती है
ग्रंथ हर योग को उसके ग्रह के स्वभाव से जोड़ते हैं:
- रुचक (मंगल): साहस, अनुशासन, नेतृत्व, परंपराओं का सम्मान।
- भद्र (बुध): तेज़ बुद्धि, सभा में बोलने की कला, परिवार की मदद।
- हंस (गुरु): धर्म में रुचि, साफ़ मन, अच्छा आचरण।
- मालव्य (शुक्र): कला और सौंदर्य की समझ, सुख-सुविधा, परिवार में संतोष।
- शश (शनि): संगठन चलाने की क्षमता, धैर्य, लोगों के साथ काम।
पुराने ग्रंथों के कुछ शब्द (जैसे राजा होना, या शश योग के कुछ कठोर वर्णन) आज शब्दशः नहीं लिए जाते। रमन लिखते हैं कि ग्रह की स्थिति अच्छी न हो तो योग केवल नाम का रह जाता है, और यह देखना ज़रूरी है कि योग बनाने वाला ग्रह और किन ग्रहों से जुड़ा है।
ePandit में कैसे दिखता है
हर महापुरुष योग के साथ लिखा होता है: कौन-सा ग्रह, किस राशि में (अपनी या उच्च), लग्न से या चंद्र से किस केंद्र में, और स्रोत। अगर एक से ज़्यादा योग बनें, तो सब अलग-अलग दिखते हैं।
फलदीपिका एक, दो, तीन या ज़्यादा महापुरुष योगों को बढ़ते क्रम में बताता है; ePandit उनकी संख्या दिखाता है, पर इससे कोई बड़ा दावा नहीं करता।