परिचय
मान लीजिए मंगल शुक्र की राशि (वृषभ या तुला) में बैठा है, और शुक्र मंगल की राशि (मेष या वृश्चिक) में। दोनों ग्रह एक-दूसरे के घर में हैं। इसे परिवर्तन या राशि-परिवर्तन कहते हैं।
परिवर्तन में दोनों भाव आपस में गहराई से जुड़ जाते हैं: एक भाव का स्वामी दूसरे भाव में बैठकर उसके विषयों से जुड़ता है, और दूसरा पहले से। इसलिए ग्रंथ इसे अलग योग मानते हैं।
नियम
फलदीपिका (6.32) के अनुसार: जब दो भावों के स्वामी एक-दूसरे के भाव में बैठें, तो उसे परिवर्तन कहते हैं। बारह भावों के स्वामियों के बीच ऐसे 66 जोड़े बन सकते हैं।
ePandit हर जोड़े को भावों के हिसाब से लिखता है, जैसे "चौथे और दसवें भाव के स्वामियों का परिवर्तन"। जो ग्रह दो राशियों का स्वामी है (जैसे मंगल, शुक्र, बुध, गुरु (बृहस्पति), शनि), वह अपनी किसी भी राशि के ज़रिए परिवर्तन में शामिल हो सकता है; ePandit वही भाव लिखता है जिनके बीच असल में अदला-बदली हुई है।
तीन समूह: महा, खल, दैन्य
फलदीपिका 66 जोड़ों को तीन समूहों में बाँटता है:
| समूह | कौन-से जोड़े | संख्या |
|---|---|---|
| दैन्य | जिनमें 6, 8 या 12वें भाव का स्वामी शामिल हो | 30 |
| खल | जिनमें तीसरे भाव का स्वामी हो (और 6, 8, 12 नहीं) | 8 |
| महा | बाक़ी सब (1, 2, 4, 5, 7, 9, 10, 11 के बीच) | 28 |
ये पुराने वर्ग-नाम हैं, किसी व्यक्ति पर ठप्पा नहीं।
परंपरा क्या मानती है
फलदीपिका (6.33-34) इन समूहों के फल बताता है, जिन्हें आज शांति से ऐसे पढ़ा जाता है:
- महा परिवर्तन: ग्रंथ इसे लक्ष्मी की कृपा, अच्छे वस्त्र-आभूषण, अधिकार और परिवार के सुख से जोड़ता है। परंपरा इसे समृद्धि और ज़िम्मेदारी की ओर झुकाव मानती है।
- खल परिवर्तन: ग्रंथ उतार-चढ़ाव बताता है: कभी राह से भटकना, कभी मधुर व्यवहार; कभी समृद्धि का लौटना, कभी तंगी। यानी संभलने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
- दैन्य परिवर्तन: ग्रंथ इसे बेचैन मन और कामों में रुकावट वाले समय से जोड़ता है। परंपरा मानती है कि ऐसे समय में धैर्य और सोच-समझकर उठाया गया कदम काम आता है।
ये झुकाव हैं, तय नतीजे नहीं। कौन-से भाव जुड़े हैं और ग्रह किस स्थिति में हैं, इससे तस्वीर बहुत बदलती है।
BPHS में विशेष परिवर्तन
BPHS कुछ परिवर्तनों को सीधे राज योग में गिनता है:
- केंद्र और त्रिकोण के स्वामियों का परिवर्तन (34.11-12) राज योग है। जैसे मिथुन लग्न में बुध कुंभ में और शनि कन्या में।
- लग्नेश और पंचमेश का परिवर्तन (39.6-7) को BPHS "महा राज योग" कहता है।
ePandit इन्हें परिवर्तन के साथ-साथ राज योग वाले हिस्से में भी दिखाता है।
ePandit में कैसे दिखता है
हर परिवर्तन के साथ लिखा होता है: कौन-से दो ग्रह, कौन-से दो भाव, समूह (महा, खल या दैन्य) और स्रोत। ऊपर वाले मिथुन लग्न के उदाहरण में शनि आठवें (मकर) का भी स्वामी है, पर अदला-बदली कुंभ (नवम) और कन्या (चतुर्थ) के बीच हुई है; इसलिए ePandit इसे चौथे और नौवें भाव का परिवर्तन लिखता है, और साथ में नोट देता है कि शनि आठवें का भी स्वामी है।
परिवर्तन के लिए जन्म-समय ज़रूरी है, क्योंकि भाव लग्न से गिने जाते हैं।