वार: सूर्योदय से सूर्योदय तक का दिन

वार पंचांग का दूसरा अंग है: सप्ताह का दिन। हर वार का एक स्वामी ग्रह है, और पंचांग में दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से बदलता है।

स्रोत: Muhūrta-cintāmaṇi (MC), use of the weekday together with tithi and nakshatra in choosing a muhurta

आपकी कुंडली में

रविवार
स्वामी: सूर्य
सोमवार
स्वामी: चंद्र
मंगलवार
स्वामी: मंगल
बुधवार
स्वामी: बुध
गुरुवार
स्वामी: गुरु (बृहस्पति)
शुक्रवार
स्वामी: शुक्र

परिचय

रविवार, सोमवार, मंगलवार... ये नाम हम रोज़ बोलते हैं। पंचांग में इन्हें वार कहा जाता है, और ये पंचांग के पाँच अंगों में से एक हैं। तिथि चंद्रमा से बनती है, पर वार सूर्य से: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक एक वार।

हर वार का नाम एक ग्रह के नाम पर है, और वही ग्रह उस वार का स्वामी माना जाता है।

सात वार और उनके स्वामी

वार स्वामी ग्रह
रविवार सूर्य
सोमवार चंद्र
मंगलवार मंगल
बुधवार बुध
गुरुवार गुरु
शुक्रवार शुक्र
शनिवार शनि

राहु और केतु किसी वार के स्वामी नहीं हैं। परंपरा हर वार को उसके स्वामी के स्वभाव से जोड़ती है। जैसे सोमवार को शिव-पूजा और गुरुवार को गुरु-पूजा का चलन है। मुहूर्त-चिंतामणि जैसे मुहूर्त-ग्रंथ भी किसी काम का दिन चुनते समय वार को तिथि और नक्षत्र के साथ मिलाकर देखते हैं, अकेले नहीं।

वैदिक दिन सूर्योदय से क्यों शुरू होता है

घड़ी और कैलेंडर में तारीख आधी रात 12 बजे बदलती है। पंचांग में वार सूर्योदय पर बदलता है। इसलिए अगर किसी बच्चे का जन्म मंगलवार सुबह 4 बजे हुआ और सूर्योदय 6 बजे था, तो पंचांग के हिसाब से वह जन्म अभी सोमवार के वार में है।

यह बात जन्म-पत्री और मुहूर्त दोनों में काम आती है। कई लोग इसी फ़र्क से उलझते हैं कि "मेरी कुंडली में वार अलग क्यों लिखा है?" उत्तर यही है: सूर्योदय से पहले का समय पिछले वार में गिना जाता है।

सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए ePandit आपके शहर के सूर्योदय से ही वार और बाकी पंचांग निकालता है।

होरा: दिन के घंटे और उनके स्वामी

परंपरा में दिन-रात को 24 होरा में बाँटा जाता है, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है। कई पंचांग दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से सूर्योदय) को 12-12 भागों में बाँटते हैं, इसलिए एक होरा हमेशा ठीक 60 मिनट की नहीं होती।

होरा के स्वामी इस क्रम में आते हैं:

सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि → गुरु → मंगल, फिर दोबारा सूर्य।

यह क्रम ग्रहों की धीमी से तेज़ चाल वाली सूची (शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र) से बनता है। किसी वार की पहली होरा उसी वार के स्वामी की होती है। रविवार की पहली होरा सूर्य की, सोमवार की पहली होरा चंद्र की।

होरा से वारों का क्रम कैसे बनता है

यह एक सुंदर हिसाब है। रविवार सूर्य की होरा से शुरू होता है। ऊपर वाले क्रम में 24 होरा गिनिए: 7-7 के तीन चक्कर (21 होरा) के बाद तीन होरा और बचती हैं: सूर्य, शुक्र, बुध। अगली, यानी 25वीं होरा, चंद्र की होती है, और वही सोमवार की पहली होरा है।

इसी तरह हर दिन क्रम में तीन कदम आगे बढ़ता है, और रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि का क्रम अपने आप बन जाता है। सप्ताह के दिनों का यह क्रम इसी होरा-गणना से निकलता है।

ePandit में वार और होरा

ePandit का दैनिक पंचांग आपके शहर के लिए वार और उस समय चल रही होरा का स्वामी दिखाता है। परंपरा कुछ काम अपने स्वामी की होरा में करने का सुझाव देती है, पर यह एक छोटा सहायक विचार है। किसी भी मुहूर्त में तिथि, नक्षत्र और पूरा पंचांग साथ देखा जाता है, सिर्फ़ एक चीज़ नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचांग में दिन कब बदलता है?

सूर्योदय पर। आधी रात के बाद और सूर्योदय से पहले का समय पिछले वार में गिना जाता है।

मेरी कुंडली में जन्म का वार कैलेंडर से अलग क्यों है?

शायद आपका जन्म आधी रात के बाद और सूर्योदय से पहले हुआ था। कैलेंडर ने तारीख बदल दी, पर पंचांग में वार सूर्योदय पर बदलता है।

होरा क्या होती है?

दिन-रात के 24 हिस्सों में से एक। हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है, और वार की पहली होरा उसी वार के स्वामी की होती है।

होरा का क्रम क्या है?

सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल, और फिर दोबारा सूर्य।

क्या किसी वार पर कोई काम बिल्कुल नहीं करना चाहिए?

वार अकेले कुछ तय नहीं करता। परंपरा मुहूर्त चुनते समय वार को तिथि, नक्षत्र और बाकी पंचांग के साथ देखती है। रोज़ का काम हर दिन सामान्य रूप से होता है।

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आधार ग्रंथ

  • Muhūrta-cintāmaṇi (MC) · use of the weekday together with tithi and nakshatra in choosing a muhurta

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13