ePandit में पंचांग क्या है?
व्याख्या · समीक्षा अगस्त २०२६
पंचांग दैनिक काल-गणना का समूह है। आज ePandit इंजन में दैनिक पंचांग किसी तिथि, अक्षांश, देशांतर और समय-क्षेत्र के लिए नक्षत्र, पद, वार, होरा, तिथि और योग लौटाता है — जब स्विस एफेमेरिस उपलब्ध हो।
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वर्तमान क्षेत्र
आज उपलब्ध क्षेत्र: नक्षत्र, नक्षत्र पद, वार, होरा स्वामी, पक्ष सहित तिथि, और योग। गणना सूर्योदय के समय से होती है; सूर्योदय की गणना विफल होने पर ही दोपहर का विकल्प लिया जाता है।
जब कोई मान गणना नहीं हो पाता
यदि इंजन आपकी तिथि और स्थान के लिए कोई मान नहीं निकाल पाता, तो ऐप यह स्पष्ट कहता है और उस जगह कुछ नहीं दिखाता। उसके बदले कोई सही-सा दिखने वाला अंक, कोई पास का शहर, या कोई औसत कभी नहीं रखा जाता। जो पंचांग मान सही दिखता है पर सही नहीं है, वह खाली जगह से अधिक हानिकारक है — क्योंकि आपके पास उसे परखने का कोई साधन नहीं होता।
यह नियम अलग-अलग मानों पर ही नहीं, पूरे वर्गों पर भी लागू है। हम करण की गणना नहीं करते, और अधिक मास के दौरान चंद्र मास की गणना नहीं करते — इसलिए अनुमान लगाने के बजाय हम इन दोनों के बारे में कुछ कहते ही नहीं। ऐप जो भी क्षेत्र दिखाता है, वह आपके अपने अक्षांश-देशांतर और उस दिन के वास्तविक सूर्योदय पर स्विस एफेमेरिस से की गई गणना है।
स्थान-आधारित दैनिक संदर्भ के लिए ऐप इंस्टॉल करें
ePandit इन नियमों की गणना आपकी जन्मकुंडली पर करता है, और बताता है कि कौन-सा नियम शास्त्रीय स्रोत से है और कौन-सा हमारे इंजन का।
पंचांग
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर का शांत समय मुहूर्त-चिंतामणि दिन को 15 मुहूर्तों में बाँटता है, और इनमें आठवाँ अभिजित है, जो स्थानीय दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है। परंपरा इसे दिन का पसंदीदा समय मानती है, पर बुधवार को यह नहीं लिया जाता।
- चंद्र बल: आज का चंद्रमा, आपकी जन्म-राशि से चंद्र बल में आज के चंद्रमा की राशि को आपकी जन्म-राशि से गिना जाता है। मुहूर्त-चिंतामणि के अनुसार 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ स्थान अनुकूल है, और शुक्ल पक्ष में 2, 5 और 9वाँ भी। परंपरा इसे सिर्फ़ नई शुरुआत का दिन चुनने में देखती है।
- चौघड़िया: दिन के आठ हिस्से चौघड़िया दिन और रात को 8-8 हिस्सों में बाँटकर हर हिस्से को अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग नाम देने की परंपरा है। यह पश्चिम भारत में बहुत प्रचलित है, पर शास्त्रीय मुहूर्त-ग्रंथों में नहीं मिलती; इसे परंपरा की तरह समझें।
- होरा: दिन के 24 घंटे और उनके स्वामी होरा दिन का एक 'घंटा' है, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है: सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल के क्रम में। मुहूर्त-चिंतामणि कहता है कि किसी वार का काम ज़रूरत पड़ने पर उस वार के स्वामी की होरा में किया जा सकता है।
- करण: आधी तिथि का माप करण पंचांग का पाँचवाँ अंग है: एक करण आधी तिथि के बराबर होता है। कुल 11 करण हैं, 4 स्थिर और 7 चर। सातवाँ चर करण विष्टि ही "भद्रा" कहलाता है, जिसे परंपरा नई शुरुआत के लिए नहीं चुनती।
- मुहूर्त: अच्छा समय कैसे चुना जाता है मुहूर्त चुनने में पंचांग के पाँच अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण), मुहूर्त का लग्न, और व्यक्ति के लिए तारा बल और चंद्र बल देखे जाते हैं। इसका शास्त्रीय ग्रंथ मुहूर्त-चिंतामणि है; परिवार की कुल-परंपरा और व्यावहारिकता भी साथ चलती हैं।
- पंचांग में नक्षत्र: चंद्रमा का आज का पड़ाव पंचांग में "आज का नक्षत्र" वह नक्षत्र है जिसमें आज चंद्रमा है। आकाश के 27 नक्षत्र 13°20′ के हैं, और मुहूर्त-चिंतामणि इन्हें स्वभाव के अनुसार समूहों में बाँटकर बताता है कि किस तरह के काम के लिए परंपरा कौन-सा समूह देखती है।
- योग: सूर्य और चंद्रमा का मिला-जुला माप पंचांग का चौथा अंग योग है। सूर्य और चंद्रमा के भोगांश को जोड़कर 13°20′ के हिस्सों में बाँटने से 27 योग बनते हैं, विष्कुम्भ से वैधृति तक। यह कुंडली के "राजयोग" जैसे योगों से अलग चीज़ है।
- राहु काल: सूर्योदय-सूर्यास्त से निकला एक समय-खंड राहु काल दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक हिस्सा है जो हर वार के लिए तय क्रम से आता है, और आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला जाता है। परंपरा इसमें नया काम शुरू करना टालती है; हम यह समय बताते हैं, पर मानना या न मानना आपका निर्णय है।
- तारा बल: आपके जन्म-नक्षत्र से आज की गिनती तारा बल में आज का नक्षत्र आपके जन्म-नक्षत्र से गिना जाता है और नौ ताराओं में से एक बनता है। मुहूर्त-चिंतामणि इसका नियम देता है; परंपरा इसे सिर्फ़ नई शुरुआत का दिन चुनने में देखती है, यह कोई भविष्यवाणी नहीं।
- तिथि: चंद्रमा की चाल से बना दिन तिथि पंचांग का पहला अंग है। चंद्रमा जब सूर्य से 12° और आगे निकल जाता है, तो एक तिथि पूरी होती है। एक महीने में 30 तिथियाँ होती हैं, और ज़्यादातर व्रत उसी तिथि से माने जाते हैं जो सूर्योदय के समय चल रही हो।
- वार: सूर्योदय से सूर्योदय तक का दिन वार पंचांग का दूसरा अंग है: सप्ताह का दिन। हर वार का एक स्वामी ग्रह है, और पंचांग में दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से बदलता है।