परिचय
चंद्रमा सबसे तेज़ चलने वाला ग्रह है: लगभग सवा दो दिन में एक राशि पार कर लेता है। इसलिए मुहूर्त में चंद्रमा की स्थिति रोज़ बदलती है, और पंडित जी देखते हैं कि आज का चंद्रमा आपकी जन्म-राशि से कहाँ है। इसी को चंद्र बल कहते हैं।
"जन्म-राशि" यहाँ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, यानी आपकी चंद्र राशि। लग्न या सूर्य राशि से यह गिनती नहीं होती।
तारा बल की तरह चंद्र बल भी कोई भविष्यवाणी नहीं है। परंपरा इसे बस नई शुरुआत का दिन चुनने में तारा बल के साथ देखती है।
चंद्र बल कैसे गिनें
- अपनी जन्म-राशि को 1 मानिए।
- वहाँ से आज चंद्रमा जिस राशि में है, उस तक गिनिए।
- जो संख्या आए, वही आज चंद्रमा का स्थान है।
उदाहरण: आपकी जन्म-राशि वृषभ है और आज चंद्रमा कन्या में है। वृषभ (1), मिथुन (2), कर्क (3), सिंह (4), कन्या (5)। यानी चंद्रमा आपकी जन्म-राशि से 5वें स्थान में है।
पंचांग में आज के चंद्रमा की राशि लिखी रहती है। ePandit में अगर आपकी जन्म-जानकारी सहेजी है, तो यह गिनती अपने आप हो जाती है।
मुहूर्त-चिंतामणि का नियम
मुहूर्त-चिंतामणि के गोचर-प्रकरण (श्लोक 1) में हर ग्रह के गोचर के अनुकूल स्थान दिए गए हैं। चंद्रमा के लिए जन्म-राशि से ये स्थान अनुकूल गिने गए हैं:
1, 3, 6, 7, 10 और 11
टीका साथ में यह भी बताती है कि 4, 9, 8, 5, 12 और 2वाँ स्थान इस नियम में अनुकूल नहीं गिने जाते। पर इसमें एक नरमी है: टीका (श्लोक 4) के अनुसार शुक्ल पक्ष में 2, 5 और 9वें स्थान का चंद्रमा भी अनुकूल माना जाता है, अगर कुछ और ग्रह उसे न रोकें। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है, और परंपरा बढ़ते चंद्रमा को ज़्यादा उदार मानती है।
| स्थान | परंपरा की दृष्टि |
|---|---|
| 1, 3, 6, 7, 10, 11 | अनुकूल |
| 2, 5, 9 | शुक्ल पक्ष में अनुकूल |
| 4, 8, 12 | बड़ी नई शुरुआत के लिए कोई और दिन |
रमन का मत: जहाँ ग्रंथ अलग हैं
बी. वी. रमन अपनी पुस्तक Muhurtha में चंद्र बल को सरल रूप में लिखते हैं: मुहूर्त के समय चंद्रमा जन्म-राशि से 6, 8 या 12वें स्थान में नहीं होना चाहिए।
ध्यान दें कि छठे स्थान पर दोनों अलग हैं: मुहूर्त-चिंतामणि के गोचर-नियम में छठा चंद्रमा अनुकूल है, जबकि रमन उसे छोड़ने को कहते हैं। ऐसे मतभेद ज्योतिष के ग्रंथों में आम हैं, और हम उन्हें छिपाते नहीं। ePandit का कार्ड मुहूर्त-चिंतामणि का नियम दिखाता है, और आपके पंडित जी अपनी परंपरा के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
आठवें स्थान के चंद्रमा को लोक में "चंद्राष्टम" भी कहा जाता है। दोनों मतों में परंपरा इस दिन बड़ी नई शुरुआत किसी और दिन रखती है। बस इतना ही; इसमें डरने की कोई बात नहीं।
तारा बल के साथ
मुहूर्त में चंद्र बल अकेले नहीं देखा जाता। रमन के अनुसार लगभग हर मुहूर्त में तारा बल, चंद्र बल और पंचक साथ देखे जाते हैं; और मुहूर्त-चिंतामणि तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और लग्न भी जोड़ता है।
मुहूर्त-चिंतामणि की एक और बात याद रखने लायक है: सब कामों की लग्न-शुद्धि में चंद्रमा लग्न से 3, 6, 10 या 11वें स्थान में अच्छा माना गया है। यह जन्म-राशि वाली गिनती से अलग है; यहाँ मुहूर्त की अपनी कुंडली देखी जाती है।
शांत होकर पढ़ें
- चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदल लेता है। अगर आज का स्थान अनुकूल नहीं गिना जाता, तो एक-दो दिन में बदल जाएगा।
- चंद्र बल सिर्फ़ नई शुरुआत के दिन के लिए देखा जाता है। नौकरी, पढ़ाई, यात्रा और पूजा हर दिन सामान्य चलती हैं।
- सेहत के मामले में डॉक्टर ही पहला सहारा हैं। ऑपरेशन या इलाज का समय डॉक्टर तय करते हैं, चंद्रमा नहीं।