परिचय
गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बहुत-से घरों में कोई नया काम शुरू करने से पहले पूछा जाता है: "अभी कौन-सा चौघड़िया चल रहा है?" दुकान का मुहूर्त हो, नई गाड़ी घर लानी हो, या यात्रा पर निकलना हो, लोग अक्सर अमृत, शुभ या लाभ का चौघड़िया देखते हैं।
"चौघड़िया" शब्द "चार घड़ी" से बना है। एक घड़ी (घटी) 24 मिनट की होती है, तो चार घड़ी लगभग 96 मिनट, यानी डेढ़ घंटे से थोड़ा ज़्यादा। दिन को आठ ऐसे हिस्सों में बाँटा जाता है, और रात को भी आठ में।
एक बात शुरू में ही साफ़ कर दें: चौघड़िया एक बाद की, क्षेत्रीय परंपरा है। मुहूर्त-चिंतामणि जैसे शास्त्रीय मुहूर्त-ग्रंथों में यह नहीं मिलती। फिर भी लाखों परिवार इसे प्रेम से मानते हैं, और यह मानना पूरी तरह आपका और आपके परिवार का निर्णय है।
चौघड़िया कैसे निकलता है
गणना सीधी है:
- आपके शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय (दिनमान) लीजिए और उसे 8 बराबर हिस्सों में बाँटिए। ये दिन के 8 चौघड़िये हैं।
- सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक का समय (रात्रिमान) भी 8 हिस्सों में बाँटिए। ये रात के 8 चौघड़िये हैं।
गर्मियों में दिन लंबा होता है, तो दिन का चौघड़िया डेढ़ घंटे से लंबा और रात का छोटा हो जाता है। सर्दियों में इसका उल्टा। इसीलिए चौघड़िया हमेशा आपके शहर और उस दिन के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला जाता है; किसी दूसरे शहर का समय आपके लिए ठीक नहीं बैठेगा।
दिन का पहला चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह का होता है: रविवार को सूर्य का (उद्वेग), सोमवार को चंद्र का (अमृत), मंगलवार को मंगल का (रोग), बुधवार को बुध का (लाभ), गुरुवार को गुरु (बृहस्पति) का (शुभ), शुक्रवार को शुक्र का (चर) और शनिवार को शनि का (काल)। इसके बाद चौघड़िये होरा वाले ग्रह-क्रम में चलते हैं: सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल। आठवाँ चौघड़िया फिर पहले जैसा होता है।
सात चौघड़िये और उनके ग्रह
| चौघड़िया | ग्रह | परंपरा क्या मानती है |
|---|---|---|
| अमृत | चंद्र | हर अच्छे काम की शुरुआत के लिए पसंद |
| शुभ | गुरु | पूजा, पढ़ाई, विवाह की बातचीत |
| लाभ | बुध | व्यापार, लेन-देन, पढ़ाई की शुरुआत |
| चर | शुक्र | यात्रा और आने-जाने के काम |
| उद्वेग | सूर्य | परंपरा नया काम शुरू करना टालती है |
| काल | शनि | परंपरा नया काम शुरू करना टालती है |
| रोग | मंगल | परंपरा नया काम शुरू करना टालती है |
कुछ परिवार उद्वेग को सरकारी काम के लिए ठीक मानते हैं, क्योंकि वह सूर्य से जुड़ा है। ऐसे छोटे-छोटे स्थानीय फ़र्क हर क्षेत्र में मिलते हैं।
रात के चौघड़िये
रात के आठ हिस्सों का क्रम दिन से अलग है। रात का पहला चौघड़िया उस वार से पाँचवें वार के स्वामी का होता है। जैसे रविवार की रात: रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु; तो पहला चौघड़िया गुरु का, यानी शुभ। फिर हर अगला हिस्सा पिछले वाले से पाँचवें वार के स्वामी का होता है। रविवार की रात का पूरा क्रम बनता है: शुभ, अमृत, चर, रोग, काल, लाभ, उद्वेग, और फिर शुभ।
यह हिसाब याद रखना ज़रूरी नहीं। ePandit का पंचांग आपके शहर के लिए दिन और रात के सभी चौघड़िये समय के साथ दिखाता है।
उद्वेग, काल और रोग: शांत होकर समझें
इन तीन नामों से कई लोग घबरा जाते हैं। पर इनका अर्थ बस इतना है: परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करना टालती है।
- "रोग" सिर्फ़ एक पुराना नाम है। इस चौघड़िये में किसी को बीमारी नहीं होती।
- "काल" का अर्थ यहाँ बस "समय" का एक हिस्सा है; यह किसी अनहोनी की सूचना नहीं।
- इन समयों में खाना, नौकरी, पढ़ाई, यात्रा, पूजा और घर के सब काम सामान्य चलते हैं।
हर दिन में ये तीनों आते हैं, क्योंकि सात में से तीन चौघड़िये यही हैं। अगर कोई ज़रूरी काम इसी समय करना पड़े, जैसे अस्पताल जाना या ट्रेन पकड़नी हो, तो बिना चिंता के कीजिए। सेहत के मामले में डॉक्टर ही पहला सहारा हैं; कोई चौघड़िया उसका इंतज़ार नहीं करवाता।
चौघड़िया और पूरा पंचांग
शास्त्रीय मुहूर्त में तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और लग्न देखे जाते हैं। चौघड़िया इनकी जगह नहीं लेता। कई परिवार बड़े संस्कारों, जैसे विवाह या गृह-प्रवेश, के लिए पंडित जी से पूरा मुहूर्त निकलवाते हैं, और छोटे रोज़मर्रा के कामों, जैसे नई खरीदारी या यात्रा की शुरुआत, के लिए चौघड़िया देख लेते हैं।
चौघड़िया का ग्रह-क्रम होरा से लिया गया है। होरा के बारे में अलग पेज पर पढ़ सकते हैं, और राहु काल के बारे में भी, जो एक दूसरी दक्षिण-भारतीय परंपरा है।