होरा: दिन के 24 घंटे और उनके स्वामी

होरा दिन का एक 'घंटा' है, और हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है: सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु (बृहस्पति), मंगल के क्रम में। मुहूर्त-चिंतामणि कहता है कि किसी वार का काम ज़रूरत पड़ने पर उस वार के स्वामी की होरा में किया जा सकता है।

स्रोत: B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, §69 (Horas), होरा = दिन का 24वाँ हिस्सा / a hora is 1/24 of a day

आपकी कुंडली में

होरा
दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय) का 24वाँ हिस्सा
Raman, Graha and Bhava Balas §69
स्वामियों का क्रम
सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि → गुरु → मंगल
Raman, Graha and Bhava Balas §69
पहली होरा
उसी वार के स्वामी की
Raman, Graha and Bhava Balas §69
मुहूर्त में
वार का काम उस वार के स्वामी की होरा (कालहोरा) में
मुहूर्त-चिंतामणि, शुभाशुभ-प्रकरण 56

परिचय

अंग्रेज़ी का "hour" और संस्कृत का "होरा", दोनों का अर्थ लगभग एक है: दिन का एक घंटा। भारतीय परंपरा में हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है। पंचांग में जब लिखा हो "अभी गुरु की होरा है", तो इसका अर्थ है कि इस घंटे का स्वामी गुरु है।

बी. वी. रमन अपनी पुस्तक Graha and Bhava Balas में होरा को दिन का 24वाँ हिस्सा बताते हैं, और लिखते हैं कि हिंदू दिन सूर्योदय से शुरू होकर अगले सूर्योदय तक चलता है। इसलिए पहली होरा सूर्योदय के बाद का पहला घंटा है, आधी रात के बाद का नहीं।

वार वाले पेज पर हमने देखा है कि होरा से ही सप्ताह के दिनों का क्रम बनता है। यह पेज होरा को और पास से देखता है: इसकी लंबाई, मुहूर्त में इसका उपयोग, और कुंडली में होरा बल।

होरा के स्वामियों का क्रम

होरा के स्वामी हमेशा इसी क्रम में आते हैं:

सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि → गुरु → मंगल, और फिर दोबारा सूर्य।

यह क्रम कहाँ से आया? रमन लिखते हैं कि सूर्य-सिद्धांत के अनुसार शनि पृथ्वी से सबसे दूर है, फिर गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध और सबसे पास चंद्रमा। इसी दूरी वाली सूची में एक-एक कदम आगे चलने से होरा का क्रम बनता है।

हर दिन की पहली होरा उसी वार के स्वामी की होती है। रविवार की पहली होरा सूर्य की, दूसरी शुक्र की, तीसरी बुध की, और इसी तरह 24वीं बुध की। 25वीं होरा, यानी सोमवार की पहली, चंद्र की होती है। इसी तरह हर वार अपने स्वामी की होरा से शुरू होता है।

होरा कितनी लंबी होती है

यहाँ दो रीतियाँ चलती हैं, और दोनों को जानना अच्छा है।

  1. बराबर होरा: सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को 24 बराबर हिस्सों में बाँटें। हर होरा लगभग 60 मिनट की होगी। रमन होरा बल की गणना में इसी तरह घंटे गिनते हैं।
  2. दिन-रात की अलग होरा: बहुत-से पंचांग दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 12 हिस्सों में और रात को 12 हिस्सों में बाँटते हैं। तब गर्मियों में दिन की होरा 60 मिनट से लंबी और रात की छोटी होती है।

दोनों में स्वामियों का क्रम वही रहता है, बस घड़ी के समय कुछ मिनट आगे-पीछे होते हैं। इसलिए अगर दो पंचांगों में होरा के समय थोड़े अलग दिखें, तो घबराइए नहीं; हो सकता है वे अलग रीति मान रहे हों। ePandit का पंचांग होरा हमेशा आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय से गिनता है।

मुहूर्त में होरा का उपयोग

मुहूर्त-चिंतामणि (शुभाशुभ-प्रकरण 55–56) कालहोरा की बात करता है। इसका सार यह है: जो काम किसी वार के लिए बताया गया है, अगर वह ज़रूरी हो और वह वार न हो, तो उसे उस वार के स्वामी की होरा में किया जा सकता है। जैसे जो काम गुरुवार के लिए उचित माना जाता है, उसे किसी और दिन गुरु की होरा में किया जा सकता है।

इसी श्लोक में आगे कहा गया है कि दिशा-शूल जैसी बातें भी साथ देखी जाएँ। यानी होरा एक सहायक विचार है, पूरा मुहूर्त नहीं। तिथि, नक्षत्र, योग और बाकी पंचांग साथ में देखे जाते हैं।

लोक-व्यवहार में कई लोग पढ़ाई शुरू करने के लिए बुध या गुरु की होरा, और यात्रा के लिए चंद्र की होरा पसंद करते हैं। ये परंपरा की पसंद हैं, कोई नियम नहीं जिसे तोड़ने पर कुछ बिगड़ जाए।

कुंडली में होरा बल

होरा का एक उपयोग कुंडली में भी है। षड्बल की गणना में "काल बल" का एक हिस्सा होरा बल है: रमन के अनुसार जिस ग्रह की होरा में जन्म हुआ, उसे होरा बल के 60 षष्ट्यंश मिलते हैं। इसके लिए जन्म के दिन का वार और सूर्योदय से जन्म तक बीते घंटे देखे जाते हैं।

यह षड्बल का एक छोटा हिस्सा है। अकेले इससे कुंडली के बारे में कोई बात तय नहीं होती।

होरा और 'होरा वर्ग' अलग हैं

"होरा" शब्द ज्योतिष में एक और अर्थ में भी आता है: राशि का आधा हिस्सा। मुहूर्त-चिंतामणि के विवाह-प्रकरण में लिखा है कि पंद्रह अंशों का एक होरा होता है, और एक राशि में दो होरा। यह कुंडली का एक वर्ग (D2) है।

दिन का होरा (घंटा) और राशि का होरा (15°) दो अलग चीज़ें हैं, बस नाम एक है। इस पेज की बात दिन के होरा की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होरा कितने मिनट की होती है?

बराबर बाँटने पर लगभग 60 मिनट। कई पंचांग दिन और रात को 12-12 हिस्सों में बाँटते हैं, तब यह मौसम के साथ घटती-बढ़ती है।

आज की पहली होरा किसकी है?

आज के वार के स्वामी की: सोमवार को चंद्र की, शनिवार को शनि की, इत्यादि।

होरा का क्रम क्या है?

सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल, और फिर सूर्य।

क्या सिर्फ़ होरा देखकर मुहूर्त चुन सकते हैं?

नहीं। मुहूर्त-चिंतामणि होरा को एक सहायक विचार की तरह देता है; तिथि, नक्षत्र और बाकी पंचांग भी देखे जाते हैं।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, §69 (Horas) · होरा = दिन का 24वाँ हिस्सा / a hora is 1/24 of a day
  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, §69 · हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक / the Hindu day runs sunrise to sunrise
  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, §69 (order of the planets) · ग्रहों का दूरी वाला क्रम / the order of the planets by distance
  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, §69 · रविवार की होरा का क्रम / the Sunday hora sequence
  • B. V. Raman, Graha and Bhava Balas, §68 (Horabala) · होरा बल: जन्म-होरा के स्वामी को 60 षष्ट्यंश / hora bala
  • मुहूर्त-चिंतामणि, शुभाशुभ-प्रकरण 55–56 (कालहोरा और उसका प्रयोजन) · कालहोरा का प्रयोजन / use of the kāla-horā
  • मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 38 (राशि का होरा) · राशि का होरा (15°) अलग चीज़ है / the hora of a sign

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14