अभिजित मुहूर्त: दोपहर का शांत समय

मुहूर्त-चिंतामणि दिन को 15 मुहूर्तों में बाँटता है, और इनमें आठवाँ अभिजित है, जो स्थानीय दोपहर के आसपास लगभग 48 मिनट का होता है। परंपरा इसे दिन का पसंदीदा समय मानती है, पर बुधवार को यह नहीं लिया जाता।

स्रोत: मुहूर्त-चिंतामणि, शुभाशुभ-प्रकरण 2 (टीका: मुहूर्त के दो अर्थ), मुहूर्त: दिन-रात का पंद्रहवाँ भाग, और चुना हुआ समय / the two meanings of muhurta

आपकी कुंडली में

क्या है
दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ
मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 52
कब
स्थानीय दोपहर के आसपास
मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 52 (गणना से)
अवधि
दिनमान का 1/15 (12 घंटे के दिन में 48 मिनट)
मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 52
बुधवार
परंपरा इस दिन अभिजित नहीं लेती
मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 54
ध्यान दें
अभिजित नक्षत्र से अलग: यह दिन का समय है

परिचय

जब किसी काम के लिए पूरा मुहूर्त न मिल रहा हो, तो घर के बड़े अक्सर कहते हैं: "दोपहर में अभिजित में कर लो।" अभिजित मुहूर्त दिन का वह छोटा-सा समय है जिसे परंपरा बहुत प्रेम से देखती है।

"अभिजित" का अर्थ है "जिसने जीत लिया"। यह दिन के बीच में, स्थानीय दोपहर के आसपास आता है, और आमतौर पर 45 से 50 मिनट का होता है।

यह पेज बताता है कि अभिजित कैसे निकलता है, मुहूर्त-चिंतामणि इसके बारे में क्या कहता है, और बुधवार को इसे क्यों नहीं लिया जाता।

दिन के पंद्रह मुहूर्त

"मुहूर्त" शब्द के दो अर्थ हैं। एक, किसी काम के लिए चुना हुआ समय। दो, दिन या रात का पंद्रहवाँ हिस्सा। मुहूर्त-चिंतामणि की टीका दोनों अर्थ बताती है।

विवाह-प्रकरण (श्लोक 52) में दिन के 15 मुहूर्तों के स्वामी गिनाए गए हैं: पहले के महादेव, दूसरे के सर्प, तीसरे के मित्र, चौथे के पितर, पाँचवें के वसु, छठे के जल, सातवें के विश्वेदेव, आठवें का अभिजित, नवें के विधाता, और आगे इंद्र, इंद्र-अग्नि, राक्षस, वरुण, अर्यमा और भग।

यानी अभिजित कोई अलग से जोड़ा गया समय नहीं है; यह दिन के मुहूर्तों की इसी पंक्ति का आठवाँ सदस्य है। 15 के बीच में आठवाँ ठीक बीच में पड़ता है, इसीलिए यह दोपहर के आसपास आता है।

अभिजित कैसे निकालें

मुहूर्त-चिंतामणि कहता है: दिन का जितना मान हो, उसमें 15 का भाग देने से एक मुहूर्त का मान निकलता है।

  1. अपने शहर में उस दिन का सूर्योदय और सूर्यास्त लीजिए। दोनों का अंतर दिनमान है।
  2. दिनमान को 15 से भाग दीजिए। यह एक मुहूर्त की लंबाई है।
  3. सूर्योदय से 7 मुहूर्त बीतने पर अभिजित शुरू होता है, और 8 मुहूर्त पूरे होने पर खत्म।

उदाहरण: सूर्योदय सुबह 6:00 और सूर्यास्त शाम 6:00, तो दिनमान 12 घंटे यानी 720 मिनट। एक मुहूर्त = 720 ÷ 15 = 48 मिनट। 7 मुहूर्त = 336 मिनट = 5 घंटे 36 मिनट। तो अभिजित सुबह 11:36 से दोपहर 12:24 तक।

ध्यान दें कि बीच का समय घड़ी का 12 बजे नहीं, बल्कि स्थानीय दोपहर है, यानी सूर्योदय और सूर्यास्त का ठीक बीच। अहमदाबाद में यह घड़ी के 12 बजे के बाद, मौसम के अनुसार लगभग 12:25 से 12:55 के बीच पड़ता है, और कोलकाता में 12 बजे से पहले, लगभग 11:20 से 11:50 के बीच। इसलिए ePandit अभिजित आपके चुने हुए शहर से निकालता है।

बुधवार का नियम

मुहूर्त-चिंतामणि (विवाह-प्रकरण 54) हर वार के लिए कुछ मुहूर्त गिनाता है जिनमें शुभ कार्य नहीं रखे जाते। बुधवार के लिए इनमें अभिजित का नाम है।

इसलिए परंपरा बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं लेती। बुधवार की दोपहर का समय बाकी दिनों की तरह ही सामान्य है; बस उसे "अभिजित" मानकर कोई खास शुरुआत नहीं की जाती। इसी श्लोक की टीका यह भी बताती है कि अगर किसी काम का नक्षत्र उस समय न हो, तो उस नक्षत्र के स्वामी वाले मुहूर्त में काम किया जा सकता है; यानी ग्रंथ व्यावहारिक रास्ते भी देता है।

परंपरा में अभिजित का स्थान

मुहूर्त-चिंतामणि में अभिजित कई जगह आदर से आता है:

  • विवाह-प्रकरण (श्लोक 43) की टीका कहती है कि अभिजित मुहूर्त में विवाह आदि शुभ कार्य हों, तो गंडांत का दोष नहीं गिना जाता।
  • यात्रा-प्रकरण (श्लोक 54) में अभिजित को यात्रा के लिए अच्छा बताया गया है, सिर्फ़ दक्षिण दिशा की यात्रा को छोड़कर।

लोक-व्यवहार में भी जब पूरा मुहूर्त न मिले, तो कई परिवार छोटे कामों के लिए अभिजित देख लेते हैं। फिर भी विवाह या गृह-प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए पंडित जी पूरा पंचांग और लग्न देखते हैं; अभिजित उसकी जगह नहीं लेता।

अभिजित नक्षत्र और अभिजित मुहूर्त अलग हैं

एक ही नाम की दो चीज़ें हैं:

  • अभिजित नक्षत्र: आकाश का एक छोटा हिस्सा, उत्तराषाढ़ा के अंतिम चरण से श्रवण के शुरुआती हिस्से तक। मुहूर्त में कभी-कभी इसे 28वाँ नक्षत्र गिना जाता है।
  • अभिजित मुहूर्त: दिन का आठवाँ मुहूर्त, यानी घड़ी का एक समय।

जब पंचांग में "अभिजित मुहूर्त 11:52 से 12:40" लिखा हो, तो बात समय की है, नक्षत्र की नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अभिजित मुहूर्त कितने समय का होता है?

दिनमान का पंद्रहवाँ हिस्सा। 12 घंटे के दिन में 48 मिनट; गर्मियों में थोड़ा लंबा, सर्दियों में छोटा।

क्या अभिजित ठीक 12 बजे होता है?

नहीं। यह स्थानीय दोपहर (सूर्योदय-सूर्यास्त के बीच) के आसपास होता है, जो शहर के साथ घड़ी में आगे-पीछे होता है।

बुधवार को अभिजित क्यों नहीं?

मुहूर्त-चिंतामणि बुधवार के लिए अभिजित को उन मुहूर्तों में गिनता है जिनमें शुभ कार्य नहीं रखे जाते।

क्या अभिजित में विवाह हो सकता है?

परंपरा अभिजित को आदर देती है, पर विवाह का मुहूर्त पूरा पंचांग और लग्न देखकर निकाला जाता है।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • मुहूर्त-चिंतामणि, शुभाशुभ-प्रकरण 2 (टीका: मुहूर्त के दो अर्थ) · मुहूर्त: दिन-रात का पंद्रहवाँ भाग, और चुना हुआ समय / the two meanings of muhurta
  • मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 52 (दिन के पंद्रह मुहूर्त) · दिनमान ÷ 15 = एक मुहूर्त / day length ÷ 15
  • मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 52, टीका · दिन के 15 मुहूर्तों के स्वामी / lords of the 15 daytime muhurtas
  • मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 52, टीका (आठवाँ मुहूर्त अभिजित) · आठवाँ मुहूर्त अभिजित / the eighth is Abhijit
  • मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 54 (वारों में निषिद्ध मुहूर्त) · बुधवार को अभिजित निषिद्ध / Abhijit set aside on Wednesday
  • मुहूर्त-चिंतामणि, विवाह-प्रकरण 43, टीका · अभिजित में गंडांत दोष नहीं गिना जाता / gandanta not counted in Abhijit
  • मुहूर्त-चिंतामणि, यात्रा-प्रकरण 54 (समय-बल) · दक्षिण की यात्रा अभिजित में नहीं / not for travel southwards

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14