तारा बल: आपके जन्म-नक्षत्र से आज की गिनती

तारा बल में आज का नक्षत्र आपके जन्म-नक्षत्र से गिना जाता है और नौ ताराओं में से एक बनता है। मुहूर्त-चिंतामणि इसका नियम देता है; परंपरा इसे सिर्फ़ नई शुरुआत का दिन चुनने में देखती है, यह कोई भविष्यवाणी नहीं।

स्रोत: B. V. Raman, Muhurtha, ch. III (three common factors), मुहूर्त में तीन आम बातें: तारा बल, चंद्र बल, पंचक / three factors common to elections

आपकी कुंडली में

गिनती
जन्म-नक्षत्र (1) से आज के नक्षत्र तक, 9 से भाग, शेष
मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 11
नौ तारा
जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, सातवाँ, मित्र, अति-मित्र
मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 12
परंपरा नई शुरुआत किसी और दिन रखती है
तीसरी, पाँचवीं और सातवीं तारा (और बड़े संस्कारों में जन्म तारा)
मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 13; शुभाशुभ-प्रकरण 34
तीसरा चक्र
19वें से 27वें नक्षत्र में ये तीनों भी ठीक
मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 13, टीका

परिचय

पंचांग में आज का नक्षत्र सबके लिए एक ही होता है। पर मुहूर्त निकालते समय पंडित जी एक और बात देखते हैं: आज का नक्षत्र आपके अपने जन्म-नक्षत्र से कहाँ है? इसी को तारा बल कहते हैं।

बी. वी. रमन अपनी पुस्तक Muhurtha में लिखते हैं कि लगभग हर मुहूर्त में तीन बातें आम तौर पर देखी जाती हैं: तारा बल, चंद्र बल और पंचक। इनमें तारा बल सबसे सरल है, और इसे थोड़ा-सा समझ लेने पर आप खुद भी इसे पढ़ सकते हैं।

सबसे पहले एक बात: तारा बल आपके दिन के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं है। यह बस एक गिनती है, जिसे परंपरा नई शुरुआत का दिन चुनने में इस्तेमाल करती है।

तारा कैसे निकलती है

मुहूर्त-चिंतामणि (गोचर-प्रकरण 10–11) यह तरीका देता है:

  1. अपने जन्म-नक्षत्र को 1 मानिए।
  2. वहाँ से आज के नक्षत्र तक गिनिए।
  3. इस संख्या को 9 से भाग दीजिए। जो शेष बचे, वही आज की तारा है। शेष 0 हो तो 9वीं तारा।

रमन का उदाहरण: किसी का जन्म अश्विनी में हुआ है और वह श्रवण नक्षत्र वाले दिन यात्रा करना चाहता है। अश्विनी से श्रवण तक गिनती 22 है। 22 को 9 से भाग देने पर शेष 4 बचता है, यानी क्षेम तारा, जिसे परंपरा अनुकूल गिनती है।

27 नक्षत्रों में नौ का यह चक्र तीन बार घूमता है: 1 से 9, 10 से 18, और 19 से 27।

नौ तारा

मुहूर्त-चिंतामणि (गोचर-प्रकरण 12) नौ ताराओं के नाम देता है, और कहता है कि हर तारा का फल उसके नाम जैसा माना जाता है।

क्रम तारा परंपरा की दृष्टि
1 जन्म तारा बड़े संस्कारों का आरंभ आमतौर पर इस दिन नहीं
2 संपत (समृद्धि) अनुकूल
3 विपत नई शुरुआत किसी और दिन
4 क्षेम (कुशल) अनुकूल
5 प्रत्यरि नई शुरुआत किसी और दिन
6 साधक (काम साधने वाली) अनुकूल
7 सातवाँ तारा परंपरा इसे नए काम के लिए टालती है
8 मित्र अनुकूल
9 अति-मित्र (परम मित्र) अनुकूल

यानी नौ में से पाँच तारा सीधे अनुकूल हैं, और बाकी में भी परंपरा बस नई शुरुआत को किसी और दिन रखने की बात करती है। रोज़ का काम, नौकरी, पढ़ाई और पूजा हर तारा में सामान्य चलते हैं।

तीसरा चक्र और आधा दिन

ग्रंथ खुद भी इस नियम को नरम करते हैं।

  • तीसरा चक्र: मुहूर्त-चिंतामणि की टीका (गोचर-प्रकरण 13) कहती है कि तीसरे चक्र में, यानी जन्म-नक्षत्र से 19वें से 27वें नक्षत्र में, तीसरी, पाँचवीं और सातवीं तारा भी पूरी तरह ठीक मानी जाती हैं। दूसरे चक्र में इनका भी सिर्फ़ एक हिस्सा छोड़ा जाता है।
  • पूरा दिन नहीं, बस हिस्सा: रमन लिखते हैं कि जब बाकी दिन अच्छा हो, तो इन ताराओं में पूरा दिन छोड़ने की ज़रूरत नहीं; नक्षत्र का बस शुरुआती हिस्सा छोड़ा जा सकता है।
  • जन्म तारा: मुहूर्त-चिंतामणि (शुभाशुभ-प्रकरण 34) जन्म-नक्षत्र को उन बातों में गिनता है जिनमें बड़े शुभ कार्य नहीं रखे जाते। इसका अर्थ इतना ही है कि विवाह या गृह-प्रवेश जैसे आरंभ के लिए परंपरा कोई और दिन देखती है।

इसीलिए एक "न चुनने वाली" तारा देखकर घबराने की कोई बात नहीं। अगला अनुकूल दिन आमतौर पर एक-दो दिन में ही आ जाता है, क्योंकि चंद्रमा लगभग रोज़ नया नक्षत्र पार करता है।

ePandit में आपका तारा बल

अगर आपने अपनी जन्म-जानकारी सहेजी है, तो ePandit का पंचांग आज के नक्षत्र को आपके जन्म-नक्षत्र से गिनकर आपकी तारा दिखाता है, शांत शब्दों में। वहाँ आप यही देखेंगे: "परंपरा नई शुरुआत किसी और दिन रखने का सुझाव देती है", या "परंपरा इसे अनुकूल गिनती है"। कोई डर वाली भाषा नहीं, क्योंकि यह बस एक गिनती है।

ध्यान दें कि कुंडली-मिलान का "तारा कूट" इससे अलग है: वहाँ वर और कन्या के जन्म-नक्षत्रों को आपस में गिना जाता है, आज के नक्षत्र से नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तारा बल कैसे निकालें?

जन्म-नक्षत्र को 1 मानकर आज के नक्षत्र तक गिनें, 9 से भाग दें; शेष आज की तारा है (0 हो तो 9)।

कौन-सी तारा अनुकूल मानी जाती हैं?

संपत, क्षेम, साधक, मित्र और अति-मित्र, यानी 2, 4, 6, 8 और 9।

तीसरी, पाँचवीं या सातवीं तारा हो तो क्या करें?

परंपरा बस नई शुरुआत किसी और दिन रखने का सुझाव देती है। रोज़ का काम सामान्य चलता है, और तीसरे चक्र में ये भी ठीक मानी जाती हैं।

क्या तारा बल हर काम के लिए देखना ज़रूरी है?

नहीं। परंपरा इसे सिर्फ़ नए आरंभ और संस्कारों का दिन चुनने में देखती है।

तारा बल और चंद्र बल में क्या फ़र्क है?

तारा बल नक्षत्र से गिना जाता है, चंद्र बल राशि से। मुहूर्त में दोनों साथ देखे जाते हैं।

आगे पढ़ें

आधार ग्रंथ

  • B. V. Raman, Muhurtha, ch. III (three common factors) · मुहूर्त में तीन आम बातें: तारा बल, चंद्र बल, पंचक / three factors common to elections
  • मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 10–11 (तारा की गणना) · जन्म-नक्षत्र से दिन-नक्षत्र तक गिनती / counting from the birth nakshatra
  • B. V. Raman, Muhurtha, ch. III (worked example) · अश्विनी से श्रवण का उदाहरण / the Ashwini–Shravana example
  • मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 12 (नौ ताराओं के नाम) · नौ ताराओं के नाम / names of the nine taras
  • मुहूर्त-चिंतामणि, गोचर-प्रकरण 13, टीका (तीसरी आवृत्ति) · तीसरे चक्र में तीसरी, पाँचवीं, सातवीं तारा भी ठीक / the third round
  • B. V. Raman, Muhurtha, ch. III (only part of the tara avoided) · बाकी दिन अच्छा हो तो बस शुरुआती हिस्सा छोड़ें / only the opening part avoided
  • मुहूर्त-चिंतामणि, शुभाशुभ-प्रकरण 34–35 · जन्म-नक्षत्र में बड़े शुभ कार्य नहीं / the birth nakshatra and major ceremonies

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14