योग: सूर्य और चंद्रमा का मिला-जुला माप

पंचांग का चौथा अंग योग है। सूर्य और चंद्रमा के भोगांश को जोड़कर 13°20′ के हिस्सों में बाँटने से 27 योग बनते हैं, विष्कुम्भ से वैधृति तक। यह कुंडली के "राजयोग" जैसे योगों से अलग चीज़ है।

स्रोत: B. V. Raman, A Manual of Hindu Astrology, calculation of the panchang yoga from Sun and Moon longitudes

आपकी कुंडली में

कुल योग
27
गणना
सूर्य और चंद्रमा के निरयन भोगांश का योग, 13°20′ के हिस्सों में
पहला और अंतिम
विष्कुम्भ … वैधृति

परिचय

पंचांग के पाँच अंगों में चौथा है योग। "योग" शब्द ज्योतिष में कई जगह आता है, इसलिए पहले एक बात साफ़ कर लें: पंचांग का योग और कुंडली के योग (जैसे गजकेसरी या राजयोग) दो अलग चीज़ें हैं। कुंडली का योग ग्रहों की आपसी स्थिति से बनता है। पंचांग का योग हर दिन का एक माप है, जैसे तिथि और नक्षत्र।

योग कैसे निकलता है

तिथि सूर्य और चंद्रमा के अंतर से बनती है। योग उनके जोड़ से बनता है।

  1. सूर्य और चंद्रमा का निरयन भोगांश लीजिए (राशिचक्र में दोनों कितने अंश पर हैं)।
  2. दोनों को जोड़िए। 360° से ज़्यादा हो तो 360° घटा दीजिए।
  3. इस संख्या को 13°20′ से भाग दीजिए। जितने पूरे हिस्से बीते, उसके अगले क्रम का योग चल रहा है।

उदाहरण: सूर्य 100° पर और चंद्रमा 50° पर हो, तो जोड़ 150° हुआ। 150° को 13°20′ से बाँटें तो 11 पूरे हिस्से बीते हैं, यानी 12वाँ योग, ध्रुव, चल रहा है।

बी. वी. रमन की A Manual of Hindu Astrology में योग की यही गणना दी गई है। ePandit का इंजन आपके शहर के सूर्योदय पर यही हिसाब करता है, और दैनिक पंचांग में आज का योग दिखाता है।

27 योगों के नाम

# योग # योग # योग
1 विष्कुम्भ 10 गण्ड 19 परिघ
2 प्रीति 11 वृद्धि 20 शिव
3 आयुष्मान 12 ध्रुव 21 सिद्ध
4 सौभाग्य 13 व्याघात 22 साध्य
5 शोभन 14 हर्षण 23 शुभ
6 अतिगण्ड 15 वज्र 24 शुक्ल
7 सुकर्मा 16 सिद्धि 25 ब्रह्म
8 धृति 17 व्यतीपात 26 ऐन्द्र
9 शूल 18 वरीयान 27 वैधृति

एक योग आमतौर पर लगभग एक दिन चलता है, पर तिथि की तरह इसकी लंबाई भी बदलती रहती है। पंचांग में योग के साथ उसका अंत-समय लिखा रहता है।

नामों के बारे में एक बात

कई योगों के नाम सुनकर लोग डर जाते हैं: शूल, गण्ड, वज्र, व्याघात। ये पुराने नाम हैं, जैसे किसी तारे या जगह का नाम होता है। किसी योग में जन्म होना व्यक्ति के बारे में कुछ तय नहीं करता। कुंडली को हमेशा पूरा देखा जाता है, एक अंग से नहीं।

व्यतीपात और वैधृति

27 में से दो योग, व्यतीपात (17वाँ) और वैधृति (27वाँ), परंपरा में खास तौर पर याद रखे जाते हैं। परंपरा इन्हें नामकरण, विवाह या गृह-प्रवेश जैसे शुभ कामों की शुरुआत के लिए नहीं चुनती। धर्मसिंधु नामकरण के समय के प्रसंग में भी इन दोनों को टालने की बात कहता है।

इसका सीधा मतलब इतना है कि इन दिनों संस्कार का आरंभ न रखें। रोज़ का काम, पढ़ाई, नौकरी और पूजा-पाठ सामान्य रूप से चलते हैं। इन योगों में जन्म लेने वाले बच्चे के लिए कोई चिंता की बात नहीं है।

मुहूर्त में योग की जगह

मुहूर्त चुनते समय योग पाँच अंगों में से एक है। तिथि, वार, नक्षत्र और करण भी साथ देखे जाते हैं, और परिवार की अपनी परंपरा भी। कोई एक अंग अकेले दिन तय नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचांग का योग और कुंडली का योग एक ही हैं?

नहीं। पंचांग का योग सूर्य-चंद्र के भोगांश के जोड़ से बनने वाला रोज़ का माप है। कुंडली के योग ग्रहों की आपसी स्थिति से बनते हैं।

योग कितने हैं?

27, विष्कुम्भ से वैधृति तक। हर एक 13°20′ का है।

व्यतीपात या वैधृति के दिन क्या न करें?

परंपरा इन दिनों संस्कार या नई शुरुआत नहीं रखती। बाकी रोज़ का काम सामान्य रूप से होता है।

मेरा जन्म-योग क्या बताता है?

यह पंचांग का एक अंग है जो जन्म के दिन का विवरण देता है। अकेले इससे स्वभाव या भाग्य तय नहीं होता; पूरी कुंडली देखी जाती है।

आज का योग कहाँ देखूँ?

ePandit के दैनिक पंचांग में आपके शहर के सूर्योदय के हिसाब से आज का योग दिखता है।

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आधार ग्रंथ

  • B. V. Raman, A Manual of Hindu Astrology · calculation of the panchang yoga from Sun and Moon longitudes
  • Dharmasindhu · nāmakaraṇa-kāla: vaidhṛti and vyatīpāta among the times to avoid

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-13