परिचय
सिंह राशिचक्र की पाँचवीं राशि है, निरयन राशिचक्र में 120° से 150° तक। सिंह का प्रतीक शेर है, और परंपरा इसे आत्मविश्वास, उदारता और नेतृत्व से जोड़ती है। इसके स्वामी सूर्य हैं, तत्व अग्नि है, स्वभाव स्थिर है और यह पुरुष (विषम) राशि है। इसमें मघा (चरण 1,2,3,4), पूर्वा फाल्गुनी (चरण 1,2,3,4) और उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1) आते हैं।
उत्तर भारत में जब कोई कहता है "मेरी राशि सिंह है", तो उसका मतलब चंद्र राशि से होता है: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। नाम का पहला अक्षर, रोज़ का राशिफल और गुण मिलान, तीनों इसी चंद्र राशि से देखे जाते हैं।
ध्यान रखें: निरयन सिंह की तारीखें पश्चिमी Leo की तारीखों से अलग हैं; यह फ़र्क नीचे सवाल-जवाब में समझाया गया है।
स्वभाव
अग्नि तत्व, स्थिर स्वभाव और सूर्य के स्वामित्व के कारण ज्योतिष की परंपरा सिंह को आत्मविश्वासी, गरिमा वाला और खुले दिल का स्वभाव मानती है। माना जाता है कि सिंह चंद्र राशि वाले अपने काम और अपने लोगों पर गर्व करते हैं, ज़िम्मेदारी उठाना पसंद करते हैं और जहाँ हों वहाँ गर्मजोशी भर देते हैं। सम्मान और सराहना उन्हें ऊर्जा देती है।
फिर भी यह केवल एक झुकाव है, किसी व्यक्ति के बारे में पक्का फ़ैसला नहीं। एक ही राशि के दो लोग बहुत अलग हो सकते हैं, क्योंकि लग्न, नक्षत्र, भाव और दशा मिलकर तस्वीर बनाते हैं।
शक्तियाँ और ध्यान रखने की बातें
शक्तियाँ: परंपरा के अनुसार इस राशि से जुड़े गुण हैं: आत्मविश्वास, उदारता, नेतृत्व करने की क्षमता, और अपनी बात पर टिके रहना।
ध्यान रखने की बातें: आत्मसम्मान कभी-कभी अहं की तरह दिख सकता है, और आलोचना चुभ सकती है। दूसरों की राय को जगह देना और श्रेय बाँटना इस गरिमा को और बढ़ाता है।
ये दोनों पहलू एक ही स्वभाव के दो रूप हैं, कोई कमी नहीं।
काम और रुचियाँ
ज्योतिष की परंपरा सिंह को इन विषयों से जोड़ती है: ऐसे काम जिनमें नेतृत्व, प्रबंधन, रचनात्मकता या लोगों के सामने आना शामिल हो: टीम या संस्था चलाना, प्रशासन, कला और मंच, शिक्षा, और ऐसे क्षेत्र जहाँ ज़िम्मेदारी और पहचान साथ चलती हों। यह कोई एक पेशा तय नहीं करता; काम के लिए दशम भाव, दशा और पूरी कुंडली देखी जाती है।
रिश्ते
परंपरा सिंह को उदार और वफ़ादार जुड़ाव की राशि मानती है। माना जाता है कि ये लोग अपनों के लिए दिल खोलकर करते हैं और रिश्ते में सम्मान व सराहना को बहुत महत्व देते हैं। साथी की बात ध्यान से सुनना और उसकी उपलब्धियों का भी जश्न मनाना रिश्ते में गर्माहट बनाए रखता है। रिश्तों की असली तस्वीर सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र और पूरी कुंडली से बनती है, अकेली राशि से नहीं।
जब सिंह लग्न हो
लग्न और चंद्र राशि अलग चीज़ें हैं। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उग रही थी। यह लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए इसके लिए जन्म का सही समय और स्थान चाहिए, जबकि चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है।
जब सिंह लग्न हो, तो सूर्य लग्नेश (लग्न के स्वामी) बनते हैं, और कुंडली में उनकी स्थिति पूरी कुंडली के लिए अहम हो जाती है। परंपरा सिंह लग्न को आत्मविश्वासी, गरिमापूर्ण और ज़िम्मेदारी उठाने वाले दृष्टिकोण से जोड़ती है। आपकी चंद्र राशि और लग्न एक भी हो सकते हैं और अलग भी; दोनों अपनी-अपनी बात कहते हैं।
नामाक्षर
अवकहड़ा चक्र की परंपरा में सिंह के नौ नामाक्षर हैं: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे। हर अक्षर एक नक्षत्र-चरण से जुड़ा है:
- मघा: चरण 1: मा, चरण 2: मी, चरण 3: मू, चरण 4: मे
- पूर्वा फाल्गुनी: चरण 1: मो, चरण 2: टा, चरण 3: टी, चरण 4: टू
- उत्तरा फाल्गुनी: चरण 1: टे
नामकरण में जन्म के चंद्रमा का नक्षत्र-चरण देखकर अक्षर चुना जाता है। नामाक्षर कैलकुलेटर से अपना अक्षर देखिए।