चित्रा का चरण 3 तुला 0°00′ से तुला 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
तुला 0°00′ – तुला 3°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
180.000000 – 183.333333
राशि
तुला
नवांश राशि
तुला
नवांश स्वामी
शुक्र
नामाक्षर
रा अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
मंगल
वर्गोत्तम
हाँ
इस चरण की बातें
चित्रा का चरण 3 तुला 0°00′ से तुला 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण तुला राशि में आता है और इसका नवांश तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा मंगल की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'रा' है। इस चरण में राशि और नवांश एक ही (तुला) हैं; इसे वर्गोत्तम कहा जाता है।
परंपरा क्या मानती है
ज्योतिष की परंपरा चित्रा को रचना, सौंदर्य-बोध, बनावट की समझ और किसी चीज़ को सुंदर रूप देने की लगन से जोड़ती है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: संतुलित सोच, शिष्टता, लोगों को जोड़ने की कला, और कला व सौंदर्य की समझ। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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