चित्रा का चरण 2 कन्या 26°40′ से कन्या 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
कन्या 26°40′ – कन्या 30°00′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
176.666667 – 180.000000
राशि
कन्या
नवांश राशि
कन्या
नवांश स्वामी
बुध
नामाक्षर
पो अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
मंगल
वर्गोत्तम
हाँ
इस चरण की बातें
चित्रा का चरण 2 कन्या 26°40′ से कन्या 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण कन्या राशि में आता है और इसका नवांश कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं। नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा मंगल की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'पो' है। इस चरण में राशि और नवांश एक ही (कन्या) हैं; इसे वर्गोत्तम कहा जाता है।
परंपरा क्या मानती है
ज्योतिष की परंपरा चित्रा को रचना, सौंदर्य-बोध, बनावट की समझ और किसी चीज़ को सुंदर रूप देने की लगन से जोड़ती है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: बारीकी पर ध्यान, विश्लेषण की समझ, व्यवस्था बनाना, और सेवा का भाव। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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