चित्रा का चरण 4 तुला 3°20′ से तुला 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
तुला 3°20′ – तुला 6°40′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
183.333333 – 186.666667
राशि
तुला
नवांश राशि
वृश्चिक
नवांश स्वामी
मंगल
नामाक्षर
री अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
मंगल
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
चित्रा का चरण 4 तुला 3°20′ से तुला 6°40′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण तुला राशि में आता है और इसका नवांश वृश्चिक है, जिसके स्वामी मंगल हैं। नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा मंगल की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'री' है।
परंपरा क्या मानती है
ज्योतिष की परंपरा चित्रा को रचना, सौंदर्य-बोध, बनावट की समझ और किसी चीज़ को सुंदर रूप देने की लगन से जोड़ती है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: लगन, गहरी समझ, रहस्य सँभालने का भरोसा, और कठिन समय में भी डटे रहना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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