उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर
उत्तराषाढ़ा का चरण 2 मकर 0°00′ से मकर 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
मकर 0°00′ – मकर 3°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
270.000000 – 273.333333
राशि
मकर
नवांश राशि
मकर
नवांश स्वामी
शनि
नामाक्षर
भो अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
सूर्य
वर्गोत्तम
हाँ
इस चरण की बातें
उत्तराषाढ़ा का चरण 2 मकर 0°00′ से मकर 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण मकर राशि में आता है और इसका नवांश मकर है, जिसके स्वामी शनि हैं। नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा सूर्य की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'भो' है। इस चरण में राशि और नवांश एक ही (मकर) हैं; इसे वर्गोत्तम कहा जाता है।
परंपरा क्या मानती है
परंपरा मानती है कि उत्तराषाढ़ा में चंद्रमा वाले लोग धीरे-धीरे, पर पक्के क़दमों से आगे बढ़ते हैं। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: अनुशासन, धैर्य, ज़िम्मेदारी निभाना, और लंबी दौड़ के लिए योजना बनाना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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