आश्लेषा का चरण 4 कर्क 26°40′ से कर्क 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
कर्क 26°40′ – कर्क 30°00′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
116.666667 – 120.000000
राशि
कर्क
नवांश राशि
मीन
नवांश स्वामी
गुरु (बृहस्पति)
नामाक्षर
डो अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
बुध
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
आश्लेषा का चरण 4 कर्क 26°40′ से कर्क 30°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण कर्क राशि में आता है और इसका नवांश मीन है, जिसके स्वामी गुरु हैं। नक्षत्र के स्वामी बुध हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा बुध की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'डो' है।
परंपरा क्या मानती है
परंपरा मानती है कि आश्लेषा का स्वभाव गहरी समझ वाला और बारीकी से देखने वाला होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: करुणा, कल्पनाशक्ति, आस्था, और दूसरों को बिना शर्त अपनाना। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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