परिचय
बुध (बुद्ध नहीं, ग्रह बुध) और आदित्य (सूर्य) से बना नाम: बुधादित्य। यह योग सोशल मीडिया और पत्रिकाओं में बहुत चर्चित है, और लोग अक्सर इसे बहुत बड़ा संकेत मान लेते हैं। पर इसकी असलियत समझने के लिए दो बातें जानना ज़रूरी है: यह कितना आम है, और इसका स्रोत क्या है।
नियम
बी. वी. रमन (Three Hundred Important Combinations, योग 24) के अनुसार: बुध सूर्य के साथ हो, तो इसे बुधादित्य योग कहते हैं। ePandit "साथ" का अर्थ लेता है: दोनों एक ही राशि में।
रमन इसके साथ एक ज़रूरी शर्त भी लिखते हैं। आम तौर पर सूर्य के बहुत पास कोई ग्रह अस्त माना जाता है। रमन कहते हैं कि शायद बुध इसमें अपवाद है, पर यह मान लेना ठीक नहीं कि सूर्य और बुध की दूरी कितनी भी हो, योग बन ही जाएगा। उनके अनुसार बुध सूर्य से 10° के भीतर नहीं होना चाहिए।
ePandit दोनों बातें दिखाता है: सूर्य और बुध एक राशि में हैं या नहीं, और उनके बीच कितने अंश की दूरी है।
यह इतना आम क्यों है
बुध आकाश में सूर्य से कभी ज़्यादा दूर नहीं जाता, लगभग 28° तक ही। इसका मतलब है कि बुध या तो सूर्य की राशि में होता है, या उसके ठीक आगे या पीछे वाली राशि में। इसलिए बहुत-सी कुंडलियों में सूर्य और बुध एक ही राशि में मिलते हैं।
रमन खुद लिखते हैं कि यह योग दुर्लभ नहीं है। इसलिए इसे अकेले कोई ख़ास संकेत मानना ठीक नहीं। 10° की शर्त लगाने पर संख्या कुछ कम होती है, पर फिर भी यह आम योग ही है।
स्रोत: "परंपरा" क्यों
ePandit हर योग पर उसका स्रोत लिखता है। हमने अपने पुस्तकालय के शास्त्रीय ग्रंथों (BPHS, फलदीपिका, सारावली, बृहज्जातक, जातक पारिजात) में "बुधादित्य" नाम खोजा, पर यह हमें इन ग्रंथों में अलग योग के रूप में नहीं मिला। यह नाम रमन की आधुनिक पुस्तक में और प्रचलित परंपरा में मिलता है।
इसलिए इस योग पर "परंपरा" लिखा जाता है, "शास्त्र" नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि यह गलत है; बस यह कि इसका आधार हम किसी शास्त्रीय श्लोक से नहीं दिखा सकते।
परंपरा क्या मानती है
रमन इस योग के फल में तेज़ बुद्धि, हर काम में कुशलता, अच्छा नाम और सुख-सुविधा बताते हैं। परंपरा सूर्य को आत्मविश्वास और बुध को बुद्धि, वाणी और हिसाब-किताब से जोड़ती है, इसलिए दोनों के साथ होने को सोच और अभिव्यक्ति के मेल से जोड़ा जाता है।
यह एक झुकाव है। बुध किस राशि में है, किस भाव में है, किन ग्रहों से जुड़ा है, और उसकी दशा कब आती है, ये सब इसके साथ देखे जाते हैं।
ePandit में कैसे दिखता है
आपकी कुंडली के "योग" टैब में बुधादित्य के साथ ये बातें लिखी होती हैं:
- सूर्य और बुध किस राशि में और लग्न से किस भाव में हैं,
- दोनों के बीच कितने अंश की दूरी है,
- रमन की 10° वाली शर्त पूरी होती है या नहीं,
- और स्रोत-स्तर: "परंपरा", साथ में यह नोट कि नाम शास्त्रीय ग्रंथों में नहीं मिला।
यह योग चंद्रमा या लग्न पर निर्भर नहीं, इसलिए जन्म-समय पता न हो तब भी इसे जाँचा जा सकता है। बस भाव तभी लिखा जाता है जब लग्न पता हो।