पुष्य का चरण 3 कर्क 10°00′ से कर्क 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
कर्क 10°00′ – कर्क 13°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
100.000000 – 103.333333
राशि
कर्क
नवांश राशि
तुला
नवांश स्वामी
शुक्र
नामाक्षर
हो अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
शनि
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
पुष्य का चरण 3 कर्क 10°00′ से कर्क 13°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण कर्क राशि में आता है और इसका नवांश तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। नक्षत्र के स्वामी शनि हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा शनि की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'हो' है।
परंपरा क्या मानती है
परंपरा मानती है कि पुष्य का स्वभाव देखभाल करने वाला, ज़िम्मेदार और श्रद्धा से भरा होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: संतुलित सोच, शिष्टता, लोगों को जोड़ने की कला, और कला व सौंदर्य की समझ। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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