पुष्य नक्षत्र, चरण 2: अंश, नवांश और नामाक्षर

पुष्य का चरण 2 कर्क 6°40′ से कर्क 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)।

स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर

आपकी कुंडली में

अंश
कर्क 6°40′ – कर्क 10°00′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
96.666667 – 100.000000
राशि
कर्क
नवांश राशि
कन्या
नवांश स्वामी
बुध
नामाक्षर
हे
अवकहड़ा चक्र (परंपरा)

इस चरण की बातें

पुष्य का चरण 2 कर्क 6°40′ से कर्क 10°00′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण कर्क राशि में आता है और इसका नवांश कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं। नक्षत्र के स्वामी शनि हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा शनि की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'हे' है।

परंपरा क्या मानती है

परंपरा मानती है कि पुष्य का स्वभाव देखभाल करने वाला, ज़िम्मेदार और श्रद्धा से भरा होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: बारीकी पर ध्यान, विश्लेषण की समझ, व्यवस्था बनाना, और सेवा का भाव। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।

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आधार ग्रंथ

  • अवकहड़ा चक्र (परंपरा) · नामाक्षर

शास्त्रीय ग्रंथों से मिलान · अंतिम बार जाँचा: 2026-10-14