मृगशिरा का चरण 3 मिथुन 0°00′ से मिथुन 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)।
स्रोत: अवकहड़ा चक्र (परंपरा), नामाक्षर
आपकी कुंडली में
अंश
मिथुन 0°00′ – मिथुन 3°20′
निरयन अंश (राशिचक्र में)
60.000000 – 63.333333
राशि
मिथुन
नवांश राशि
तुला
नवांश स्वामी
शुक्र
नामाक्षर
का अवकहड़ा चक्र (परंपरा)
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी)
मंगल
वर्गोत्तम
नहीं
इस चरण की बातें
मृगशिरा का चरण 3 मिथुन 0°00′ से मिथुन 3°20′ तक फैला है (कुल 3°20′)। यह चरण मिथुन राशि में आता है और इसका नवांश तुला है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, इसलिए इस चरण में जन्म होने पर पहली महादशा मंगल की होती है। अवकहड़ा चक्र (परंपरा) में इस चरण का नामाक्षर 'का' है।
परंपरा क्या मानती है
परंपरा मानती है कि मृगशिरा का स्वभाव जिज्ञासु और खोजी होता है। नवांश के रंग से परंपरा इस चरण में ये गुण भी देखती है: संतुलित सोच, शिष्टता, लोगों को जोड़ने की कला, और कला व सौंदर्य की समझ। ये बातें परंपरा की प्रवृत्तियाँ हैं, किसी व्यक्ति पर लगी मुहर नहीं; असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है।
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