शरद पूर्णिमा क्या है
बरसात के बाद शरद ऋतु का आसमान सबसे साफ़ होता है, और आश्विन की पूर्णिमा का चाँद साल के सबसे उजले चाँदों में गिना जाता है। यही शरद पूर्णिमा है। दशहरे के लगभग पाँच दिन बाद और दिवाली से लगभग पंद्रह दिन पहले आती है।
धर्मसिंधु इसे कोजागर व्रत कहता है, जिसमें लक्ष्मी और इंद्र की पूजा, रात भर जागरण और पासों का खेल लिखा है। बंगाल, ओडिशा और असम में यह ‘कोजागरी लक्ष्मी पूजा’ है।
तारीख कैसे तय होती है
शास्त्र (धर्मसिंधु): कोजागर व्रत की पूर्णिमा निशीथ (आधी रात) में देखी जाती है।
- केवल पहले दिन आधी रात में पूर्णिमा → पहला दिन।
- केवल दूसरे दिन, दोनों दिन, या किसी दिन आधी रात में नहीं → दूसरा दिन।
- कुछ आचार्य कहते हैं कि पहले दिन आधी रात में और दूसरे दिन केवल प्रदोष में हो तो भी दूसरा दिन।
चूँकि पूजा और जागरण रात का है, इसलिए यह नियम स्नान-दान वाली पूर्णिमा से अलग दिन दे सकता है। हमारा कैलेंडर कोजागर का दिन इसी नियम से दिखाता है।
कथा: परंपरा और ग्रंथ
‘को जागर्ति?’ धर्मसिंधु एक वचन देता है: आधी रात को वर देने वाली लक्ष्मी पूछती हैं, ‘कौन जाग रहा है?’ इसी से नाम ‘कोजागर’ बना। परंपरा इसे सजगता और परिश्रम का संदेश मानती है।
रास: ब्रज की परंपरा में शरद पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया; इसलिए इसे ‘रास पूर्णिमा’ भी कहते हैं।
खीर और चाँदनी: लोक-मान्यता है कि शरद की चाँदनी अमृत-जैसी है, इसलिए खीर रात भर चाँदनी में रखकर सुबह प्रसाद के रूप में खाई जाती है। यह रीति हमें ग्रंथ में नहीं मिली; इसे लोक-परंपरा के रूप में दिया गया है।
परिवार कैसे मनाते हैं
उत्तर भारत में छत पर खीर, रात में भजन और चाँद को अर्घ्य। ब्रज के मंदिरों में रास-उत्सव। बंगाल, ओडिशा और असम में कोजागरी लक्ष्मी पूजा: घर में चावल के घोल से अल्पना, लक्ष्मी के पैरों के निशान, और खिचड़ी-नारियल-तिल के लड्डू का भोग। महाराष्ट्र में ‘कोजागिरी’: दूध में केसर-मेवे उबालकर चाँदनी में पीना, और घर के पहले बच्चे की आरती। गुजरात में रात भर गरबा। ओडिशा में अविवाहित लड़कियों का ‘कुमार पूर्णिमा’।
सरल पूजा
धर्मसिंधु के अनुसार कमल पर बैठी लक्ष्मी का ध्यान करके ‘ॐ लक्ष्म्यै नमः’ से पूजा, फिर हाथी पर बैठे इंद्र का ध्यान और पूजा; नारियल-पानी और चिवड़ा देवताओं और पितरों को अर्पित करके परिवार के साथ खाना। घर पर सरल रूप:
- शाम को घर साफ़ करें, दीया जलाएँ।
- लक्ष्मी का चित्र, फूल, अक्षत, ‘ॐ लक्ष्म्यै नमः’।
- चंद्रोदय पर चाँद को जल का अर्घ्य।
- खीर बनाकर ढककर चाँदनी में रखें (चाहें तो)।
- जितना हो सके जागकर भजन या परिवार के साथ बातचीत; सुबह खीर का प्रसाद।
सुरक्षा
खीर: रात भर बाहर रखी दूध की चीज़ गर्म मौसम में खराब हो सकती है। उसे जाली या पतले साफ़ कपड़े से ढकें ताकि कीड़े-धूल न पड़ें; सुबह सूँघकर और चखकर ही खाएँ, और छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और कमज़ोर पाचन वालों को शक हो तो न दें।
छत पर: रात को छत की मुंडेर के पास बच्चों पर नज़र रखें; रोशनी रखें। जागरण के बाद अगले दिन गाड़ी चलाने से पहले आराम कर लें।
ePandit में
ePandit में: त्योहार का दिन हमारा कैलेंडर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से दिखाता है। दिन एक बार उज्जैन के हिसाब से तय होता है, आपके शहर का समय अलग दिखता है। हम अभी मुहूर्त नहीं निकालते, और किसी त्योहार को किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं बताते।